कोलकाता गोदाम हादसा: निर्माणाधीन गोदाम ढहने से 4 की दर्दनाक मौत, 21 का रेस्क्यू, 40 से अधिक लोगों के दबे होने की आशंका

कोलकाता गोदाम हादसा ने उठाए सुरक्षा मानकों पर सवाल

कोलकाता के तारातला इलाके में निर्माणाधीन गोदाम का शेड ढहने के बाद मलबे में फंसे लोगों को निकालते NDRF और बचाव दल।
कोलकाता गोदाम हादसा: NDRF, सेना, पुलिस टीमें मलबे में फंसे लोगों को निकालने में जुटी हैं, 40 से अधिक लोगों के दबे होने की आशंका

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी में हुए कोलकाता गोदाम हादसा ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। दक्षिण कोलकाता के तारातला ट्रांसपोर्ट डिपो के पास बुधवार दोपहर एक निर्माणाधीन गोदाम का विशाल शेड अचानक गिर गया। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 4 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 21 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। प्रशासन को आशंका है कि 40 से अधिक मजदूर अभी भी मलबे में दबे हो सकते हैं। इस वजह से मृतकों की संख्या बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

दोपहर 12:07 बजे हुआ कोलकाता गोदाम हादसा

जानकारी के अनुसार कोलकाता गोदाम हादसा बुधवार दोपहर करीब 12:07 बजे हुआ। तारातला ट्रांसपोर्ट डिपो के समीप एक निर्माणाधीन गोदाम में मजदूर निर्माण कार्य कर रहे थे। अचानक गोदाम का लोहे का ढांचा और शेड भरभराकर गिर पड़ा। हादसे के समय बड़ी संख्या में मजदूर अंदर मौजूद थे, जिससे कई लोग मलबे में दब गए।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसा इतना भयावह था कि कुछ ही सेकंड में पूरा ढांचा जमीन पर आ गिरा और चारों तरफ धूल का गुबार छा गया।

21 मजदूरों को बचाया गया, कई अब भी लापता

कोलकाता गोदाम हादसा के बाद राहत और बचाव अभियान तुरंत शुरू कर दिया गया। पुलिस, दमकल विभाग और स्थानीय लोगों की मदद से अब तक 21 लोगों को मलबे से बाहर निकाला जा चुका है। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।

हालांकि प्रशासन के पास अभी यह स्पष्ट जानकारी नहीं है कि हादसे के समय गोदाम में कुल कितने मजदूर मौजूद थे। स्थानीय लोगों और श्रमिकों के परिजनों का दावा है कि 40 से अधिक लोग अभी भी मलबे में फंसे हो सकते हैं।

NDRF और सेना बचाव अभियान में जुटी

कोलकाता गोदाम हादसा की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमों को मौके पर बुलाया गया। इसके साथ ही सेना के जवान भी बचाव कार्य में सहयोग कर रहे हैं।

रेस्क्यू टीम गैस कटर की मदद से लोहे के भारी पोल और स्टील स्ट्रक्चर को काट रही है। मलबे को हटाने के लिए बड़ी क्रेनों और जेसीबी मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि हर कदम सावधानी के साथ उठाया जा रहा है ताकि मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकाला जा सके।

कंक्रीट ढलाई के दौरान हुआ हादसा

स्थानीय लोगों के मुताबिक कोलकाता गोदाम हादसा उस समय हुआ जब गोदाम में कंक्रीट ढलाई का कार्य चल रहा था। मजदूर छत और लोहे के ढांचे पर काम कर रहे थे। इसी दौरान पूरा शेड अचानक गिर गया।

प्रारंभिक स्तर पर यह आशंका जताई जा रही है कि निर्माण कार्य में तकनीकी खामी, कमजोर संरचना या सुरक्षा मानकों की अनदेखी हादसे का कारण हो सकती है। हालांकि वास्तविक कारणों का पता जांच के बाद ही चल सकेगा।

“मेरा पैर काट लो, लेकिन मुझे बचा लो”

कोलकाता गोदाम हादसा के दौरान एक बेहद मार्मिक घटना सामने आई। बचाव कार्य में शामिल युवक अंकित सिंह ने मलबे में दबे एक मजदूर को खोजने में अहम भूमिका निभाई।

अंकित ने बताया कि मलबे के भीतर से एक मजदूर की आवाज सुनाई दे रही थी। उसने घायल मजदूर का पैर पकड़कर रेस्क्यू टीम को उसकी सही स्थिति बताई। मजदूर दर्द से कराहते हुए लगातार मदद की गुहार लगा रहा था।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वह कह रहा था, “मैंने अपना पैर खो दिया है, अगर जरूरत पड़े तो बाकी हिस्सा भी काट दो, लेकिन मुझे यहां से बाहर निकालकर मेरी जान बचा लो।”

इस घटना ने मौके पर मौजूद लोगों को भावुक कर दिया।

मुख्यमंत्री और मंत्री पहुंचे घटनास्थल

कोलकाता गोदाम हादसा की सूचना मिलते ही राज्य सरकार के वरिष्ठ नेता और अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मौके का दौरा कर राहत एवं बचाव कार्य का जायजा लिया।

उनके साथ मंत्री अग्निमित्रा पॉल, कौशिक चौधरी और अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। प्रशासन ने घायलों के समुचित इलाज और बचाव अभियान को तेज करने के निर्देश दिए हैं।

हेल्पलाइन नंबर जारी

कोलकाता गोदाम हादसा के बाद राज्य सरकार ने लोगों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। जिन लोगों के परिजन इस गोदाम में कार्यरत थे, वे इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं।

हेल्पलाइन नंबर

  • 1070
  • 8697981070
  • 033-22143526
  • 033-22535185

प्रशासन ने लोगों से अफवाहों से बचने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है।

गोदाम की जमीन और निर्माण प्रक्रिया की होगी जांच

जानकारी के अनुसार जिस जमीन पर यह गोदाम बन रहा था, वह ओडिशा के एक व्यवसायी की बताई जा रही है। जमीन को एक निजी फर्म को लीज पर दिया गया था। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाएंगी कि निर्माण कार्य के दौरान सभी जरूरी अनुमतियां और सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।

कोलकाता गोदाम हादसा के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता, तकनीकी निरीक्षण और सुरक्षा प्रबंधन को लेकर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं।

सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल

यह कोलकाता गोदाम हादसा एक बार फिर निर्माण स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलता नजर आ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी अक्सर गंभीर हादसों का कारण बनती है।

फिलहाल राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। प्रशासन की प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। जैसे-जैसे रेस्क्यू ऑपरेशन आगे बढ़ेगा, मृतकों और घायलों की संख्या में बदलाव संभव है। (Amar Bharti)

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