NCLAT ने जेट एयरवेज मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि कंपनी या नियोक्ता द्वारा अलग PF और ग्रेच्युटी फंड न बनाए जाने पर भी कर्मचारियों को उनका पूरा बकाया मिलेगा। जानिए फैसले का कर्मचारियों पर क्या असर पड़ेगा।

नई दिल्ली/अमर भारती। देशभर के लाखों कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। दिवालिया मामलों की सुनवाई करने वाले National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि कोई कंपनी अपने कर्मचारियों के लिए अलग से प्रोविडेंट फंड (PF) और ग्रेच्युटी फंड का प्रबंधन नहीं करती है, तब भी कर्मचारियों को उनका पूरा बकाया भुगतान किया जाएगा। ट्रिब्यूनल ने कहा कि कर्मचारियों का PF और ग्रेच्युटी का पैसा कंपनी की परिसमापन (Liquidation) संपत्ति का हिस्सा नहीं माना जा सकता और इसे कर्मचारियों को प्राथमिकता के आधार पर देना होगा।
जेट एयरवेज मामले में आया फैसला
यह फैसला चर्चित Jet Airways मामले में सुनाया गया है। NCLAT ने एयरलाइन के पूर्व कर्मचारियों के पक्ष में फैसला देते हुए बैंकों और अन्य वित्तीय लेनदारों (Financial Creditors) की अपीलों को खारिज कर दिया। ट्रिब्यूनल ने माना कि कर्मचारियों का वैधानिक अधिकार किसी भी वित्तीय दावे से ऊपर है और PF व ग्रेच्युटी का भुगतान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
क्या था पूरा विवाद?
नवंबर 2024 में जेट एयरवेज का पुनर्गठन (Resolution Plan) विफल हो गया था, जिसके बाद कंपनी परिसमापन प्रक्रिया में चली गई। इसके बाद कर्मचारियों ने दावा किया कि उनका प्रोविडेंट फंड और ग्रेच्युटी बकाया इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) की धारा 36(4)(a)(iii) के तहत लिक्विडेशन एस्टेट का हिस्सा नहीं होना चाहिए। दूसरी ओर, बैंकों और अन्य लेनदारों का तर्क था कि यह सुरक्षा केवल तभी मिलेगी जब कंपनी ने पहले से अलग PF और ग्रेच्युटी फंड बनाए हों।
NCLAT ने क्या कहा?
NCLAT ने लेनदारों की इस दलील को खारिज कर दिया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि कर्मचारी अपने पूरे PF और ग्रेच्युटी के हकदार हैं, चाहे नियोक्ता ने अलग फंड बनाए हों या नहीं। यह राशि कर्मचारियों का वैधानिक अधिकार है और इसे कंपनी की परिसमापन संपत्ति में शामिल नहीं किया जा सकता। फैसले में कहा गया कि लिक्विडेटर की जिम्मेदारी है कि वह कर्मचारियों को कानून के अनुसार उनका पूरा बकाया भुगतान सुनिश्चित करे।
किन कानूनों का दिया गया हवाला?
ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में दो प्रमुख कानूनों का उल्लेख किया-
- Employees’ Provident Fund Organisation से संबंधित Employees’ Provident Funds and Miscellaneous Provisions Act, 1952
- Payment of Gratuity Act, 1972
अदालत ने कहा कि इन कानूनों के तहत देय राशि कर्मचारियों का संरक्षित अधिकार है और इसे किसी भी हालत में रोका नहीं जा सकता।
कर्मचारियों की एक मांग हुई खारिज
हालांकि NCLAT ने कर्मचारियों की एक अन्य मांग को स्वीकार नहीं किया। कुछ कर्मचारियों ने जनवरी से मार्च 2019 तक के वेतन बकाये को भी लिक्विडेशन एस्टेट से बाहर रखने की मांग की थी। इसके लिए डिप्टी लेबर कमिश्नर द्वारा जारी रिकवरी सर्टिफिकेट का हवाला दिया गया था। ट्रिब्यूनल ने इस मांग को खारिज करते हुए कहा कि वेतन संबंधी दावे IBC के “वॉटरफॉल मैकेनिज्म” के तहत तय किए जाएंगे और उन्हें अलग श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।
कर्मचारियों के लिए फैसले का क्या मतलब है?
यह फैसला उन लाखों कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो ऐसी कंपनियों में काम करते हैं जो आर्थिक संकट या दिवालियापन का सामना कर रही हैं।
इस निर्णय से स्पष्ट संदेश गया है कि:
- PF और ग्रेच्युटी कर्मचारियों का वैधानिक अधिकार है।
- कंपनी के दिवालिया होने पर भी यह अधिकार समाप्त नहीं होता।
- अलग फंड न होने की स्थिति में भी भुगतान करना होगा।
- बैंकों और अन्य लेनदारों से पहले कर्मचारियों के इन अधिकारों की सुरक्षा की जाएगी।
NCLAT का यह फैसला भारतीय दिवालियापन कानून और कर्मचारी अधिकारों के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। जेट एयरवेज मामले में दिया गया यह निर्णय भविष्य में अन्य दिवालिया कंपनियों के मामलों के लिए भी एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी कंपनी की वित्तीय स्थिति चाहे जैसी भी हो, कर्मचारियों के PF और ग्रेच्युटी जैसे वैधानिक अधिकारों से समझौता नहीं किया जा सकता।