शिवलोचन हत्याकांड में पत्नी और प्रेमी को उम्रकैद: 8 साल बाद आया फैसला, घर में दफनाया था शव

2018 के चर्चित शिवलोचन हत्याकांड में अदालत ने पत्नी माया देवी और उसके कथित प्रेमी टुल्लू लोध को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। जानिए पूरे मामले की कहानी और कोर्ट के फैसले की अहम बातें।

शिवलोचन हत्याकांड में अदालत का फैसला सुनाते हुए सांकेतिक तस्वीर
2018 के चर्चित शिवलोचन हत्याकांड में पत्नी और उसके कथित प्रेमी को उम्रकैद की सजा।

नई दिल्ली/अमर भारती। उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले के चर्चित शिवलोचन हत्याकांड में करीब आठ वर्ष बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम एवं स्पेशल एनडीपीएस एक्ट कोर्ट ने मृतक की पत्नी माया देवी और उसके कथित प्रेमी टुल्लू लोध को हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों आरोपियों पर हत्या के मामले में 10-10 हजार रुपये और साक्ष्य मिटाने के अपराध में 4-4 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। न्यायालय ने इस अपराध को गंभीर और जघन्य माना, हालांकि इसे “रेयर ऑफ रेयरेस्ट” श्रेणी में न रखते हुए मृत्युदंड देने से इनकार कर दिया।

अदालत ने क्या सुनाई सजा?

अपर सत्र न्यायाधीश राहुल मिश्रा की अदालत ने माया देवी और टुल्लू लोध को भारतीय दंड संहिता के तहत हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा साक्ष्य नष्ट करने के आरोप में दोनों को सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा भी दी गई। अदालत ने स्पष्ट किया कि दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी।

कैसे सामने आया था मामला?

सरकारी पक्ष के अनुसार, 7 जुलाई 2018 को मृतक शिवलोचन विश्वकर्मा के भाई मूलचंद्र विश्वकर्मा ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि शिवलोचन करीब छह महीने से लापता हैं और उनकी पत्नी माया देवी तथा गांव के ही टुल्लू लोध पर हत्या का संदेह जताया था। शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और बाद में दोनों आरोपियों को कर्वी बस स्टैंड से गिरफ्तार कर लिया।

दोस्ती से शुरू हुआ रिश्ता, फिर बनी हत्या की वजह

जांच के दौरान सामने आया कि टुल्लू लोध की शिवलोचन से मित्रता थी और वह अक्सर उनके घर आता-जाता था। इसी दौरान टुल्लू और माया देवी के बीच नजदीकियां बढ़ गईं। पुलिस जांच के मुताबिक, नवंबर 2017 में शिवलोचन को दोनों के संबंधों की जानकारी मिल गई थी। बताया गया कि उन्हें दोनों की एक तस्वीर मिली थी, जिसके बाद पति-पत्नी के बीच विवाद हुआ।

घर के अंदर दफनाया गया शव

अभियोजन पक्ष के अनुसार, विवाद के बाद रात में माया देवी ने टुल्लू को घर बुलाया और दोनों ने मिलकर शिवलोचन की हत्या कर दी। हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने के लिए घर के अंदर ही गड्ढा खोदा गया और शव को मिट्टी में दबा दिया गया। आरोप है कि शव छिपाने के बाद जमीन को गोबर और मिट्टी से लीपकर सामान्य दिखाने की कोशिश की गई। इसके बाद टुल्लू मुंबई चला गया, जबकि कुछ समय बाद माया देवी भी अपने मायके चली गई और फिर मुंबई जाकर उसके साथ रहने लगी।

छह महीने बाद खुला राज

करीब छह महीने बाद घर के एक कमरे की जमीन धंसने लगी। इस पर शिवलोचन की मां को शक हुआ और उन्होंने परिवार को इसकी जानकारी दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर खुदाई कराई, जहां से मानव कंकाल बरामद हुआ। परिजनों ने कपड़ों और गले में मिली मोतियों की माला के आधार पर उसकी पहचान शिवलोचन विश्वकर्मा के रूप में की।

साक्ष्यों के आधार पर हुई दोषसिद्धि

जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने परिस्थितिजन्य साक्ष्य, गवाहों के बयान और बरामदगी को अदालत के सामने प्रस्तुत किया। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों को पर्याप्त और विश्वसनीय मानते हुए दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया और उम्रकैद की सजा सुनाई। शिवलोचन हत्याकांड का यह फैसला उन मामलों में शामिल हो गया है, जहां हत्या के बाद साक्ष्य छिपाने की कोशिश लंबे समय तक सच को दबा नहीं सकी। आठ साल की कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने पत्नी और उसके कथित प्रेमी को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

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