देश में COPD के इलाज की नई दिशा तय करेंगे केजीएमयू के डॉ. सूर्यकांत, केंद्र सरकार की राष्ट्रीय गाइडलाइन कमेटी में मिली अहम जिम्मेदारी


लखनऊ: राजधानी लखनऊ स्थित King George’s Medical University (केजीएमयू) के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत को भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के नॉन कम्युनिकेबल डिजीज (एनसीडी) प्रभाग द्वारा राष्ट्रीय COPD (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) रोकथाम एवं प्रबंधन गाइडलाइन तैयार करने के लिए गठित टेक्निकल एक्सपर्ट ग्रुप (TEG) का सदस्य नामित किया गया है। इसे चिकित्सा जगत में केजीएमयू और उत्तर प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।


यह तकनीकी विशेषज्ञ समूह देशभर में COPD की रोकथाम, समय पर पहचान, मानकीकृत उपचार और प्रभावी प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक एवं साक्ष्य-आधारित राष्ट्रीय दिशानिर्देश तैयार करेगा। इन गाइडलाइंस के लागू होने से पूरे देश में COPD मरीजों के इलाज की गुणवत्ता में एकरूपता आएगी और स्वास्थ्य सेवाएं अधिक प्रभावी बन सकेंगी।
डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि भारत में लगभग 6 करोड़ लोग COPD से पीड़ित हैं, जबकि हर वर्ष करीब 5 लाख लोगों की मौत इस बीमारी के कारण होती है। उन्होंने कहा कि यह भारत में मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है और तेजी से बढ़ती गंभीर श्वसन बीमारी बन चुकी है। ऐसे में इसके प्रभावी नियंत्रण और बेहतर उपचार व्यवस्था के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत गाइडलाइन की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नई राष्ट्रीय गाइडलाइन न केवल चिकित्सकों को वैज्ञानिक एवं मानकीकृत उपचार पद्धति उपलब्ध कराएगी, बल्कि समय पर रोग की पहचान, बेहतर प्रबंधन और मृत्यु दर कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे देशभर के लाखों COPD मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार का लाभ मिलेगा।