Vaibhav Suryavanshi Debut: 15 साल 99 दिन की उम्र में वैभव सूर्यवंशी ने सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड तोड़ा।

नई दिल्ली/अमर भारती। भारत और इंग्लैंड के बीच खेले गए दूसरे टी20 मुकाबले में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने इतिहास रच दिया। महज 15 साल 99 दिन की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण कर उन्होंने भारत के लिए सबसे कम उम्र में इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने 37 वर्षों से कायम सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। हालांकि, भारत की हार के बाद मैच में सबसे ज्यादा चर्चा स्पिनर रवि बिश्नोई के प्रदर्शन को लेकर हुई।
Vaibhav Suryavanshi Debut: सचिन का रिकॉर्ड टूटा
वैभव सूर्यवंशी ने 4 जुलाई 2026 को इंग्लैंड के खिलाफ अपना अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया। उस समय उनकी उम्र 15 वर्ष 99 दिन थी। इससे पहले भारत के लिए सबसे कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने का रिकॉर्ड सचिन तेंदुलकर के नाम था। सचिन ने 15 नवंबर 1989 को पाकिस्तान के खिलाफ कराची में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मैच खेला था। उस समय उनकी उम्र 16 वर्ष 205 दिन थी। अब वैभव इस सूची में सबसे ऊपर पहुंच गए हैं।
पहली पारी में सिर्फ एक रन से पीछे रहे वैभव
डेब्यू मैच की पहली पारी में भी वैभव ने प्रभावित किया। उन्होंने 14 रन बनाए। वहीं सचिन तेंदुलकर ने अपने पहले अंतरराष्ट्रीय मैच की पहली पारी में 15 रन बनाए थे। यानी दोनों के डेब्यू स्कोर में केवल एक रन का अंतर रहा। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि वैभव में लंबी पारी खेलने की क्षमता है और यदि उन्हें सही मार्गदर्शन मिला तो वे भारतीय क्रिकेट के भविष्य के बड़े सितारे बन सकते हैं।
रवि बिश्नोई का ओवर बना टर्निंग पॉइंट
हालांकि मैच के बाद सबसे ज्यादा चर्चा रवि बिश्नोई के प्रदर्शन की रही। भारत मैच में मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहा था, लेकिन 17वें ओवर ने मुकाबले का रुख पूरी तरह बदल दिया। उस समय इंग्लैंड को जीत के लिए 24 गेंदों में 49 रन चाहिए थे और रन गति 12 रन प्रति ओवर से अधिक थी। लेकिन बिश्नोई के इस ओवर में 29 रन बने, जिससे इंग्लैंड ने मैच पर पकड़ मजबूत कर ली।
तीन नो-बॉल और 60 रन बने भारी
रवि बिश्नोई ने अपने चार ओवरों में 60 रन खर्च किए और एक भी विकेट नहीं ले सके। उनका इकॉनमी रेट 15.00 रहा। सबसे बड़ी चिंता उनकी गेंदबाजी में लगातार तीन नो-बॉल रहीं, जिनमें से दो नो-बॉल 17वें ओवर में आईं। क्रिकेट कमेंटेटर हर्षा भोगले ने मैच के बाद कहा कि किसी भी गेंदबाज के लिए नो-बॉल स्वीकार्य नहीं है और एक स्पिनर द्वारा लगातार नो-बॉल फेंकना टीम के लिए बड़ा नुकसान साबित होता है।
श्रेयस अय्यर ने भी माना टर्निंग पॉइंट
भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने भी मैच के बाद माना कि 17वां ओवर मुकाबले का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। उन्होंने कहा कि टीम को इस हार से सीख लेने की जरूरत है और भविष्य में ऐसी गलतियों से बचना होगा।
अर्शदीप सिंह का महंगा ओवर भी रहा अहम
हालांकि हार का पूरा ठीकरा केवल रवि बिश्नोई पर नहीं फोड़ा जा सकता। तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह ने भी तीसरे ओवर में 27 रन खर्च किए थे। यह ओवर पावरप्ले के दौरान आया था। अर्शदीप ने मैच की शुरुआत में दो विकेट लेकर भारत को शानदार शुरुआत दिलाई थी, लेकिन उनका महंगा ओवर इंग्लैंड को मुकाबले में वापस ले आया। हालांकि मैच के बाद चर्चा का केंद्र बिश्नोई का 17वां ओवर ही बना रहा।
क्या तीसरे टी20 में मिलेगा मौका?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या रवि बिश्नोई को तीसरे टी20 मुकाबले में भी प्लेइंग इलेवन में जगह मिलेगी। इंग्लैंड की परिस्थितियों को देखते हुए भारतीय टीम अतिरिक्त तेज गेंदबाज के साथ उतर सकती है। ऐसी स्थिति में युवा तेज गेंदबाज प्रिंस यादव, जिन्होंने हाल ही में आयरलैंड के खिलाफ टी20 अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया था, उन्हें मौका मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि अंतिम फैसला टीम प्रबंधन और कप्तान श्रेयस अय्यर की रणनीति पर निर्भर करेगा। भारत के लिए सकारात्मक पहलू यह रहा कि वैभव सूर्यवंशी ने अपने ऐतिहासिक डेब्यू से भविष्य की मजबूत उम्मीदें जगाई हैं। वहीं टीम को गेंदबाजी में अनुशासन और डेथ ओवरों की रणनीति पर काम करने की जरूरत होगी।
यहां भी पढ़ें-