भारत-अमेरिका ट्रेड विवाद: 12.5% टैरिफ प्रस्ताव पर भारत की दोटूक, USTR से फैसले पर पुनर्विचार की मांग

अमेरिका के 12.5% टैरिफ प्रस्ताव पर भारत ने USTR से पुनर्विचार की मांग की है। जानिए सेक्शन 301 विवाद, भारत की आपत्ति और दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों पर इसका संभावित असर।

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित टैरिफ विवाद का सांकेतिक चित्र।
अमेरिका के प्रस्तावित 12.5% टैरिफ पर भारत ने पुनर्विचार की मांग करते हुए USTR से बातचीत की इच्छा जताई।

नई दिल्ली/अमर भारती। भारत ने अमेरिका द्वारा प्रस्तावित 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है। भारत सरकार ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) से इस प्रस्ताव पर दोबारा विचार करने का अनुरोध किया है। साथ ही भारत ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले में किसी भी वास्तविक चिंता का समाधान करने के लिए अमेरिका के साथ रचनात्मक बातचीत के लिए तैयार है।

यह विवाद उन प्रस्तावित शुल्कों से जुड़ा है, जिन्हें अमेरिका ने कथित तौर पर जबरन श्रम (Forced Labour) से बने उत्पादों के आयात पर पर्याप्त रोक न लगाने वाले देशों पर लागू करने का सुझाव दिया है। फिलहाल यह केवल एक प्रस्ताव है और इसे अंतिम मंजूरी नहीं मिली है।

क्या है पूरा मामला?

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने मार्च 2026 में दो अलग-अलग सेक्शन 301 जांच शुरू की थीं। इन जांचों का उद्देश्य जबरन श्रम से बने उत्पादों और वैश्विक बाजार में औद्योगिक क्षमता से जुड़े मुद्दों की समीक्षा करना था। जून 2026 में जारी प्रारंभिक निष्कर्षों में USTR ने कई देशों से आने वाले आयात पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव के अनुसार भारत, चीन सहित 48 अर्थव्यवस्थाओं पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की सिफारिश की गई, जबकि कुछ अन्य देशों के लिए 10 प्रतिशत शुल्क का प्रस्ताव रखा गया। हालांकि, यह प्रस्ताव अभी अंतिम निर्णय नहीं है और इस पर संबंधित देशों की आपत्तियां तथा सुझाव भी मांगे गए हैं।

भारत ने उठाए कानूनी और व्यापारिक सवाल

भारत ने अपने आधिकारिक जवाब में कहा कि अमेरिकी एजेंसी यह साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी है कि संबंधित देशों की नीतियों के कारण वैश्विक बाजार में व्यापक स्तर पर व्यापारिक असंतुलन या अमेरिकी कंपनियों को गंभीर नुकसान हुआ है।

भारत का कहना है कि किसी देश में जबरन श्रम से जुड़े उत्पादों पर पूर्ण प्रतिबंध का अभाव अपने आप में सेक्शन 301 के तहत कार्रवाई का आधार नहीं बन सकता। भारत ने यह भी तर्क दिया कि प्रत्येक देश की कानूनी व्यवस्था, श्रम कानून और व्यापारिक ढांचे का अलग-अलग मूल्यांकन किया जाना चाहिए।

सेक्शन 301 के इस्तेमाल पर भारत की आपत्ति

भारत ने अमेरिका के सेक्शन 301 प्रावधान के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए हैं। भारत का कहना है कि USTR ने संबंधित देशों के श्रम कानूनों, नियामक व्यवस्था और व्यापारिक नीतियों का विस्तृत विश्लेषण किए बिना एक व्यापक निष्कर्ष निकाल लिया। भारत के अनुसार, किसी भी व्यापारिक कार्रवाई से पहले प्रत्येक देश की परिस्थितियों और लागू कानूनों का निष्पक्ष मूल्यांकन आवश्यक है। इसलिए प्रस्तावित टैरिफ पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

बातचीत से समाधान चाहता है भारत

भारत ने अपने जवाब में स्पष्ट किया है कि वह टकराव के बजाय संवाद के माध्यम से समाधान चाहता है। भारत ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के साथ विस्तृत चर्चा करने और यदि कोई विशेष चिंता है तो उसे दूर करने की इच्छा भी जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच मजबूत व्यापारिक संबंधों को देखते हुए बातचीत के जरिए समाधान निकलने की संभावना बनी हुई है।

व्यापारिक रिश्तों पर पड़ सकता है असर

यदि प्रस्तावित टैरिफ भविष्य में लागू किए जाते हैं, तो भारत से अमेरिका निर्यात होने वाले कुछ उत्पाद प्रभावित हो सकते हैं। इससे निर्यातकों की लागत बढ़ सकती है और कुछ उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर असर पड़ सकता है। हालांकि अभी यह केवल एक प्रस्ताव है। अंतिम निर्णय से पहले सभी संबंधित देशों के जवाबों और व्यापारिक प्रभावों का मूल्यांकन किया जाएगा।

आगे क्या?

अब सभी की नजर अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि के अगले फैसले पर है। यदि अमेरिका भारत की आपत्तियों पर विचार करता है, तो प्रस्ताव में बदलाव संभव है। वहीं यदि प्रस्ताव यथावत रहता है, तो दोनों देशों के बीच आगे और व्यापारिक वार्ता होने की संभावना है। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह नियम-आधारित वैश्विक व्यापार व्यवस्था का समर्थन करता है और अपने व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए सभी उचित कूटनीतिक और कानूनी विकल्पों का उपयोग करेगा।

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