दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम देश में बसे हैं हजारों हिंदू मंदिर, पीएम मोदी करेंगे ऐतिहासिक प्रम्बानन मंदिर के दर्शन

इंडोनेशिया दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सांस्कृतिक संदेश, जानिए प्रम्बानन मंदिर का इतिहास, वास्तुकला और भारत से इसका प्राचीन संबंध

इंडोनेशिया के जावा द्वीप पर स्थित ऐतिहासिक प्रम्बानन हिंदू मंदिर
जावा द्वीप पर स्थित प्रम्बानन मंदिर दक्षिण-पूर्व एशिया का सबसे भव्य हिंदू मंदिर माना जाता है।

नई दिल्ली/अमर भारती। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीन देशों—इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड—के दौरे के पहले चरण में इंडोनेशिया पहुंच चुके हैं। अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री विश्व प्रसिद्ध प्रम्बानन मंदिर का भी दौरा करेंगे। दुनिया के सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाले देश में स्थित यह भव्य हिंदू मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि भारत और इंडोनेशिया के हजारों वर्षों पुराने सांस्कृतिक संबंधों का भी प्रतीक माना जाता है। प्रधानमंत्री की इस यात्रा के बाद एक बार फिर यह सवाल चर्चा में है कि आखिर दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम देश में हिंदू मंदिरों की इतनी समृद्ध विरासत कैसे संरक्षित रही।

इंडोनेशिया में कितने हिंदू मंदिर हैं?

इंडोनेशिया में लगभग 87 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है, लेकिन यहां हिंदू और बौद्ध सभ्यता की गहरी ऐतिहासिक छाप आज भी दिखाई देती है। स्थानीय भाषा में मंदिरों को “पुरा” या “चांडी” कहा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, अकेले बाली द्वीप पर ही 20,000 से अधिक हिंदू मंदिर हैं। इसके अलावा जावा, लोम्बोक और अन्य द्वीपों पर भी सैकड़ों प्राचीन मंदिर मौजूद हैं, जिनमें कई मंदिर एक हजार वर्ष से अधिक पुराने हैं।

क्या है प्रम्बानन मंदिर का इतिहास?

प्रम्बानन मंदिर इंडोनेशिया के जावा द्वीप पर योग्यकार्ता (Yogyakarta) शहर के निकट स्थित है। इसका निर्माण 9वीं शताब्दी में संजय वंश के राजा रकाई पिकातन ने कराया था। बाद में अन्य शासकों ने भी इसका विस्तार किया। यह मंदिर मुख्य रूप से भगवान शिव को समर्पित है, जबकि परिसर में भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा के भी भव्य मंदिर बनाए गए हैं। उस दौर में जावा हिंदू और बौद्ध संस्कृति का प्रमुख केंद्र था।

क्यों खास है प्रम्बानन मंदिर?

दक्षिण-पूर्व एशिया के सबसे भव्य हिंदू मंदिरों में शामिल प्रम्बानन मंदिर अपनी ऊंची शिखर शैली और अद्भुत पत्थर की नक्काशी के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है।

  • भगवान शिव का मुख्य मंदिर लगभग 47 मीटर ऊंचा है।
  • पूरे मंदिर परिसर में मूल रूप से 240 संरचनाएं थीं।
  • शिव, विष्णु और ब्रह्मा के मंदिरों के सामने क्रमशः नंदी, गरुड़ और हंस को समर्पित मंदिर भी बनाए गए हैं।

दीवारों पर उकेरी गई है रामायण

प्रम्बानन मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी उत्कृष्ट शिल्पकला है। मंदिर की दीवारों पर रामायण की पूरी कथा को पत्थरों पर उकेरा गया है। भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण, हनुमान और रावण से जुड़े अनेक दृश्य आज भी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। मंदिर परिसर में नियमित रूप से रामायण बैले का आयोजन भी होता है, जिसमें नृत्य और संगीत के माध्यम से रामायण का मंचन किया जाता है।

कैसे उजड़ गया था यह मंदिर?

समय के साथ राजनीतिक परिवर्तन, राजधानी के स्थानांतरण, भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियों के कारण प्रम्बानन मंदिर को भारी नुकसान पहुंचा। सदियों तक यह खंडहर के रूप में पड़ा रहा। 19वीं शताब्दी में यूरोपीय खोजकर्ताओं ने इस ऐतिहासिक स्थल को फिर से दुनिया के सामने लाया, जिसके बाद संरक्षण और पुनर्निर्माण का कार्य शुरू हुआ।

UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल

साल 1991 में यूनेस्को ने प्रम्बानन मंदिर को विश्व धरोहर स्थल (World Heritage Site) घोषित किया। इसके बाद यह इंडोनेशिया के सबसे प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल हो गया। हर वर्ष लाखों देशी-विदेशी पर्यटक यहां पहुंचते हैं।

भारत और इंडोनेशिया का हजारों साल पुराना रिश्ता

भारत और इंडोनेशिया के संबंध केवल आधुनिक कूटनीति तक सीमित नहीं हैं। प्राचीन काल में समुद्री व्यापार, संस्कृति और धर्म के माध्यम से भारतीय सभ्यता का गहरा प्रभाव इंडोनेशिया तक पहुंचा। यही कारण है कि आज भी वहां रामायण, महाभारत, संस्कृत और हिंदू परंपराओं के अनेक सांस्कृतिक स्वरूप जीवित हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रम्बानन मंदिर दौरा केवल धार्मिक महत्व नहीं रखता, बल्कि यह भारत और इंडोनेशिया के साझा सांस्कृतिक इतिहास और सभ्यतागत रिश्तों को भी वैश्विक मंच पर नई पहचान देने वाला माना जा रहा है।


इंडोनेशिया के प्रमुख हिंदू मंदिर

क्षेत्रप्रमुख मंदिर
जावा द्वीपप्रम्बानन मंदिर, चांडी सुकुह, चांडी चेतो
बाली द्वीपबेसाकीह मंदिर, तनाह लोट मंदिर, उलुवातु मंदिर, तिर्ता एम्पुल मंदिर, गोवा लवाह मंदिर, तमन आयुन मंदिर, पुरा उलुन दानु ब्रातन मंदिर

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