पिछले छह महीनों से केंद्रीय एजेंसियों के रडार पर मॉड्यूल; अब तक करीब 60 संदिग्धों की गिरफ्तारी, सोशल मीडिया नेटवर्क की भी जांच तेज

नई दिल्ली/अमर भारती। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से कथित तौर पर जुड़े गैंगस्टर शहजाद भट्टी मॉड्यूल के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी कार्रवाई और तेज कर दी है। केंद्रीय एजेंसियां और विभिन्न राज्यों की आतंकवाद निरोधक इकाइयां (ATS) पिछले छह महीनों से इस नेटवर्क पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। इसी क्रम में सोमवार तड़के छह और संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इनसे पूछताछ में नेटवर्क से जुड़े कई अन्य लोगों और गतिविधियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
लगातार बदल रहा है मॉड्यूल का तरीका
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, जब किसी एक नेटवर्क या साजिश का खुलासा हो जाता है, तो संचालक कथित तौर पर नए संपर्कों और नए तरीकों का इस्तेमाल करने लगते हैं। शुरुआती चरण में केवल शहजाद भट्टी से सीधे जुड़े संदिग्ध सामने आ रहे थे, लेकिन हाल के महीनों में उसके कथित सहयोगियों से जुड़े लोगों तक भी जांच का दायरा बढ़ा है। जांचकर्ताओं का मानना है कि नेटवर्क लगातार अपनी कार्यप्रणाली बदलकर सुरक्षा एजेंसियों से बचने की कोशिश करता है।
अब तक करीब 60 संदिग्ध गिरफ्तार
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल अब तक इस मॉड्यूल से जुड़े करीब 60 संदिग्धों को अलग-अलग अभियानों में गिरफ्तार कर चुकी है। एजेंसियां सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, डिजिटल कम्युनिकेशन और अन्य तकनीकी माध्यमों की निगरानी भी कर रही हैं ताकि कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके। हालांकि, इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों द्वारा समय-समय पर की जाती है।
रिमांड के दौरान कई राज्यों में होगी जांच
सोमवार को गिरफ्तार किए गए छह संदिग्धों को अदालत से 9 जुलाई तक पुलिस रिमांड मिली है। इस दौरान जांच टीम उन्हें पंजाब और उत्तर प्रदेश भी ले जा सकती है, जहां उनसे जुड़े संभावित ठिकानों, संपर्कों और अन्य तथ्यों की जांच की जाएगी। सुरक्षा एजेंसियों का उद्देश्य पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली, फंडिंग, संपर्क श्रृंखला और संभावित सहयोगियों की पहचान करना है।
राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियां सतर्क
अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में केंद्रीय और राज्य एजेंसियां समन्वय के साथ काम कर रही हैं। संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने, डिजिटल प्लेटफॉर्म की निगरानी और खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान के जरिए ऐसे नेटवर्क पर लगातार कार्रवाई की जा रही है।
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