राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: जांच में बड़ा खुलासा, ट्रस्टियों की सिफारिश पर रखे गए थे काउंटिंग कर्मी!

SIT जांच में नए दावे, आउटसोर्सिंग कंपनी ने कहा- नियुक्तियां ट्रस्टियों और बैंक अधिकारियों की सिफारिश पर हुईं

राम मंदिर चढ़ावा गिनती केंद्र और जांच से जुड़ी सांकेतिक तस्वीर
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में कर्मचारियों की नियुक्ति और दानराशि गणना प्रक्रिया जांच के दायरे में।

नई दिल्ली/अमर भारती। SIT जांच में नए दावे, आउटसोर्सिंग कंपनी ने कहा- नियुक्तियां ट्रस्टियों और बैंक अधिकारियों की सिफारिश पर हुईं; SBI के दो कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए तथ्य सामने आ रहे हैं। अब जांच में यह दावा सामने आया है कि दानराशि की गिनती के लिए नियुक्त किए गए कई कर्मियों का चयन केवल आउटसोर्सिंग कंपनी ने नहीं किया था, बल्कि उनकी नियुक्ति ट्रस्टियों की सिफारिश और बैंक अधिकारियों की मंजूरी के बाद हुई थी। जांच एजेंसियां इस पूरे घटनाक्रम को कथित रूप से पहले से बनाई गई साजिश के नजरिए से भी देख रही हैं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

वाराणसी की कंपनी, लेकिन कर्मचारी अयोध्या के

जांच में सामने आया है कि दानराशि की काउंटिंग का काम भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने वाराणसी स्थित सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज को सौंपा था। कंपनी का मुख्य कार्य हाउसकीपिंग और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की उपलब्धता कराना बताया जाता है। दानराशि की गिनती जैसे संवेदनशील कार्य का उसे पहले कोई विशेष अनुभव नहीं था। सूत्रों के अनुसार, कंपनी के नाम पर नियुक्त किए गए लगभग 25 कर्मचारी अयोध्या और आसपास के क्षेत्रों के रहने वाले थे। आरोप है कि इनमें कई लोगों के नाम ट्रस्टियों की ओर से सुझाए गए थे।

छह आरोपी कंपनी के कर्मचारी

चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार किए गए छह आरोपी-अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, करुणेश पांडेय, अविनाश शुक्ल, मनीष यादव और रमाशंकर मिश्र-कंपनी के कर्मचारी बताए गए हैं। वहीं रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और सुभाष चंद्र श्रीवास्तव ट्रस्ट से जुड़े कर्मचारी बताए जा रहे हैं।

SIT पूछताछ में क्या सामने आया?

सूत्रों के मुताबिक, विशेष जांच दल (SIT) की पूछताछ में कंपनी के संचालक गौरव सिंह ने कथित तौर पर कहा कि कर्मचारियों की नियुक्ति ट्रस्टियों के दबाव और बैंक अधिकारियों की सिफारिश के आधार पर की गई थी। उनका यह भी कहना था कि कंपनी की भूमिका केवल औपचारिक रही और नियुक्त कर्मचारियों के चयन में उसका स्वतंत्र निर्णय नहीं था। हालांकि, इस संबंध में जांच एजेंसियों की ओर से अभी कोई आधिकारिक निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है।

SBI कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

जांच के दौरान भारतीय स्टेट बैंक के दो कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। सूत्रों का कहना है कि पुलिस उनके खिलाफ साक्ष्यों की जांच कर रही है और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें भी मामले में आरोपी बनाया जा सकता है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक कार्रवाई घोषित नहीं की गई है।

टिन्नू और सुभाष पर भी उठे सवाल

जांच में यह सवाल भी उठ रहे हैं कि ट्रस्ट कर्मचारी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू को नकदी गणना कक्ष में आने-जाने की अनुमति कैसे मिली, जबकि वह गर्भगृह की व्यवस्था से जुड़ा हुआ था। इसी तरह नकदी गणना कक्ष का प्रभारी बनाए गए सेवानिवृत्त बैंककर्मी सुभाष चंद्र श्रीवास्तव की नियुक्ति को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि वह पहले एक बैंक संबंधी मामले में निलंबित हो चुके थे और बाद में न्यायालय के आदेश पर उनकी सेवा बहाल हुई थी।

जांच जारी, आधिकारिक निष्कर्ष का इंतजार

फिलहाल पुलिस, एसआईटी और संबंधित एजेंसियां पूरे मामले की गहन जांच कर रही हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि नियुक्तियों में किस स्तर पर अनियमितता हुई और चोरी की कथित साजिश में किन-किन लोगों की भूमिका रही।

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