
बाराबंकी। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच हैदरगढ़ विधानसभा क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी के संभावित उम्मीदवार को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। हालांकि पार्टी ने अभी तक किसी भी प्रत्याशी के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन क्षेत्र में विभिन्न नेताओं की बढ़ती सक्रियता ने टिकट को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू कर दिया है। इनमें जिला पंचायत सदस्य (डीडीसी) नेहा और समाजसेवी एवं भाजपा नेत्री शिवानी सिंह की सक्रियता विशेष रूप से चर्चा का विषय बनी हुई है।
डीडीसी नेहा पिछले कई महीनों से लगातार गांव-गांव पहुंचकर जनसंपर्क अभियान चला रही हैं। वह महिलाओं, युवाओं, स्वयं सहायता समूहों और पंचायत प्रतिनिधियों से संवाद कर स्थानीय समस्याओं को सुन रही हैं। धार्मिक, सामाजिक और जनहित के कार्यक्रमों में उनकी नियमित भागीदारी ने उन्हें क्षेत्र में एक सक्रिय जनप्रतिनिधि के रूप में स्थापित किया है। उनके समर्थकों का दावा है कि जिला पंचायत सदस्य के रूप में उन्होंने विकास कार्यों और जनता से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी है।
वहीं समाजसेवी एवं भाजपा नेत्री शिवानी सिंह भी लगातार क्षेत्र में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के महादेवा कार्यक्रम से लौट रहे भाजपा कार्यकर्ताओं का स्वागत, महिलाओं के बीच संवाद, पौधरोपण अभियान, सामाजिक कार्यक्रमों और संगठनात्मक गतिविधियों में उनकी सक्रिय भागीदारी ने उन्हें भी संभावित दावेदारों की चर्चाओं में शामिल कर दिया है। भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच उनकी सक्रियता और जनसंपर्क की चर्चा लगातार बढ़ रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार भाजपा संगठन केवल पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों के आधार पर उम्मीदवार तय करने के बजाय संगठन के प्रति समर्पण, जनता के बीच सक्रियता, सामाजिक स्वीकार्यता और चुनाव जीतने की क्षमता जैसे पहलुओं पर भी विशेष ध्यान दे सकता है। यही कारण है कि कई संभावित दावेदार अभी से क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं।
हैदरगढ़ विधानसभा क्षेत्र में गांवों की चौपालों, बाजारों, चाय की दुकानों और सोशल मीडिया पर टिकट को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। कार्यकर्ता अपने-अपने पसंदीदा नेताओं के समर्थन में माहौल बनाने में लगे हैं। हालांकि भाजपा नेतृत्व की ओर से अभी तक किसी भी नाम पर आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है।
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि संगठन का मुख्य लक्ष्य आगामी विधानसभा चुनाव में जीत सुनिश्चित करना है। इसी उद्देश्य से कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को सरकार की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने और लगातार जनता के बीच रहने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में क्षेत्र में सक्रिय रहने वाले नेताओं की दावेदारी स्वाभाविक रूप से मजबूत मानी जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि हैदरगढ़ विधानसभा सीट पर इस बार मुकाबला काफी रोचक हो सकता है। नए चेहरों की सक्रियता ने चुनावी समीकरणों को नई दिशा दी है। हालांकि टिकट को लेकर फिलहाल सभी चर्चाएं और दावे केवल राजनीतिक अटकलों तक सीमित हैं। अंतिम फैसला भाजपा का केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व ही करेगा।