बृजभूषण शरण सिंह बरी: 3 साल से ज्यादा चली कानूनी लड़ाई के बाद कोर्ट का बड़ा फैसला

बृजभूषण शरण सिंह बरी: 3 साल से ज्यादा चली कानूनी लड़ाई के बाद कोर्ट का बड़ा फैसला

बृजभूषण शरण सिंह बरी मामले में अदालत का फैसला
महिला पहलवानों के मामले में अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह को बरी किया।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े बहुचर्चित मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) प्रमुख और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को बरी कर दिया है। अदालत ने WFI के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को भी सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। यह फैसला करीब तीन साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद आया है।

राउज एवेन्यू कोर्ट ने सुनाया फैसला

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 3 अगस्त 2026 को अपना फैसला सुनाते हुए बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को आरोपों से बरी कर दिया। अदालत के समक्ष यह मामला छह महिला पहलवानों की शिकायतों के आधार पर चल रहा था। इस प्रकरण ने देशभर में व्यापक राजनीतिक, सामाजिक और खेल जगत की बहस को जन्म दिया था।

इस मामले में अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने 2 जुलाई 2026 को फैसला सुरक्षित रख लिया था और 3 अगस्त को निर्णय सुनाने की तारीख तय की थी।

बृजभूषण शरण सिंह बरी मामले में क्या कहा गया?

फैसले के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने शुरू से जो कहा था, वही अब सही साबित हुआ है। उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा जताया और आरोपों को लेकर अपनी पुरानी स्थिति दोहराई।

वहीं, उनके वकील ने कहा कि बचाव पक्ष लगातार शिकायतों और बयानों में मौजूद कथित विरोधाभासों तथा विसंगतियों का मुद्दा उठाता रहा। उन्होंने अदालत के विस्तृत आदेश का इंतजार करने की बात कही।

छह महिला पहलवानों की शिकायत से शुरू हुआ था मामला

यह मामला छह महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न, पीछा करने और आपराधिक धमकी जैसे आरोपों से जुड़ा था। आरोपों के बाद वर्ष 2023 में जंतर-मंतर पर देश के कई प्रमुख पहलवानों ने लंबे समय तक विरोध प्रदर्शन किया था। इस आंदोलन ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी चर्चा पैदा की थी और खेल प्रशासन में जवाबदेही की मांग को तेज किया था।

दिल्ली पुलिस ने जून 2023 में इस मामले में चार्जशीट दाखिल की थी। बाद में अदालत ने मई 2024 में विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए, जिसके बाद मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ी।

ट्रायल के दौरान 32 गवाहों से हुई पूछताछ

अदालती कार्यवाही के दौरान अभियोजन पक्ष ने 32 गवाहों से पूछताछ कराई, जिनमें शिकायतकर्ता पहलवानों के अलावा भारतीय कुश्ती महासंघ और खेल प्राधिकरण से जुड़े अधिकारी भी शामिल थे। सुनवाई इन-कैमरा तरीके से हुई और अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने अभियोजन और बचाव पक्ष दोनों ने अपने-अपने तर्क रखे। इसके बाद अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने निर्णय सुरक्षित रखा था।

फैसले के बाद चर्चा में फिर आया पूरा विवाद

बृजभूषण शरण सिंह बरी होने के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। यह विवाद केवल खेल जगत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संसद, राजनीतिक दलों और खेल संगठनों तक इसकी गूंज सुनाई दी। अदालत के फैसले के साथ इस बहुचर्चित मुकदमे का एक महत्वपूर्ण कानूनी अध्याय समाप्त हो गया है।

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