झारखंड छात्र आंदोलन का 16वां दिन, आज तीसरे दौर की वार्ता

झारखंड छात्र आंदोलन: 14वीं JPSC और JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने की मांग पर अड़े छात्र

झारखंड छात्र आंदोलन के दौरान रांची में प्रदर्शन करते छात्र
रांची में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्र आंदोलन।

डिजिटल डेस्क, रांची। झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ जारी छात्र आंदोलन रविवार को 16वें दिन में प्रवेश कर गया। आंदोलनकारी छात्र संगठनों और राज्य सरकार के बीच गतिरोध अभी भी बना हुआ है। इसी बीच रविवार दोपहर 12 बजे सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच तीसरे दौर की बातचीत प्रस्तावित है। छात्र संगठनों ने साफ कर दिया है कि उनकी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

झारखंड छात्र आंदोलन पिछले कई दिनों से राज्य की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था के केंद्र में बना हुआ है। भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और सरकार से ठोस निर्णय की मांग कर रहे हैं।

झारखंड छात्र आंदोलन पर आज तीसरे दौर की बातचीत

झारखंड छात्र आंदोलन को लेकर शनिवार को भी सरकार और विभिन्न छात्र संगठनों के बीच कई दौर की बैठकें हुईं। हालांकि इन बैठकों से कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, आंदोलन से जुड़े एक गुट ने सरकार की पहल को राजनीतिक पैंतरेबाजी करार दिया।

राज्य सरकार ने अलग-अलग छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों से अलग-अलग बातचीत की। सबसे पहले पांच सदस्यीय सरकारी समिति ने झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेकेएलएम) के नेता देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की।

देवेंद्र नाथ महतो पिछले आठ दिनों से भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में अनशन पर बैठे हुए हैं। इसके बाद कांग्रेस समर्थित एनएसयूआई, एसीएस और जेसीएम के प्रतिनिधियों के साथ भी बैठक की गई।

बैठकों के बाद भी सहमति नहीं बन सकी और छात्र संगठनों ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया।

मुख्यमंत्री के सामने रखी जाएंगी छात्रों की मांगें

बैठक के बाद राज्य मंत्री संजय प्रसाद यादव ने कहा कि आंदोलनकारी अभ्यर्थियों की मांगों को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के समक्ष रखा जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार छात्रों की बात सुनने और समाधान तलाशने की दिशा में काम कर रही है।

वहीं मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि सरकार सभी छात्र संगठनों और संबंधित पक्षों से सुझाव लेने के लिए एक ई-मेल आईडी जारी कर रही है।

उन्होंने बताया कि JPSSC.feedback@gmail.com पर छात्र, अभ्यर्थी और अन्य संबंधित पक्ष अपने सुझाव भेज सकते हैं। सरकार इन सुझावों के आधार पर सुधार नीति तैयार करने और सामूहिक निर्णय तक पहुंचने का प्रयास करेगी।

सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि सरकार संवाद के माध्यम से समाधान निकालने के पक्ष में है और सभी संगठनों से बातचीत जारी रखेगी।

आंदोलन में शामिल हुए नए संगठन, बढ़े मंच

झारखंड छात्र आंदोलन के दौरान शनिवार को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) ने भी अलग मंच बनाकर आंदोलन को तेज करने का ऐलान किया। आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा स्वयं प्रदर्शन स्थल पहुंचीं और छात्रों के साथ धरने में शामिल हुईं।

उन्होंने 14वीं जेपीएससी और जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर नारेबाजी की। आइसा के शामिल होने के बाद जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलन कर रहे छात्र संगठनों के मंचों की संख्या बढ़कर तीन हो गई है।

जेएसएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच और जेपीएससी-जेएसएससी कैंडिडेट्स फोरम पहले से 25 जुलाई से यहां प्रदर्शन कर रहे हैं। अब आइसा के अलग मंच बनने से आंदोलन को नया राजनीतिक और संगठनात्मक आयाम मिला है।

पीयूष मिश्रा ने दिया छात्रों को समर्थन

झारखंड छात्र आंदोलन को शनिवार को अभिनेता और गायक पीयूष मिश्रा का भी समर्थन मिला। वह जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंचे और आंदोलनकारी छात्रों से मुलाकात की।

पत्रकारों से बातचीत में पीयूष मिश्रा ने कहा कि उन्होंने छात्रों के इंटरव्यू देखे और उनकी आंखों में दर्द महसूस किया। उन्होंने कहा कि छात्रों की परेशानियों और उनके संघर्ष ने उन्हें यहां आने के लिए प्रेरित किया।

पीयूष मिश्रा ने कहा, “मैं युवाओं से बहुत प्यार करता हूं और उनके साथ खड़े होने आया हूं।”

उन्होंने बताया कि पिछले तीन-चार दिनों से वह अपनी क्षमता के अनुसार आंदोलनकारी छात्रों की मदद करने की कोशिश कर रहे हैं। उनके अनुसार छात्रों के लिए भोजन, चटाई और तिरपाल जैसी आवश्यक वस्तुओं की व्यवस्था भी की जा रही है।

सीजेपी ने भी आंदोलन को दिया समर्थन

इससे पहले शुक्रवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का एक प्रतिनिधिमंडल भी प्रदर्शन स्थल पहुंचा था। संगठन ने छात्रों के आंदोलन को समर्थन देने का ऐलान किया।

सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि संगठन की एक टीम रांची पहुंच चुकी है और वह छात्रों की मदद करेगी। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर आंदोलन के दौरान मिले अनुभवों का उपयोग झारखंड के छात्रों की सहायता में किया जाएगा।

उन्होंने छात्रों की एकजुटता की सराहना करते हुए कहा कि संगठन मजबूती के साथ उनके साथ खड़ा है और आंदोलन की सफलता की उम्मीद कर रहा है।

नेहा बोरा पर स्याही फेंकने का मामला भी चर्चा में

झारखंड छात्र आंदोलन के दौरान शुक्रवार को एक और विवाद सामने आया। झारखंड विधानसभा की ओर निकाले गए छात्र मार्च के दौरान आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा पर स्याही फेंकी गई।

घटना के बाद नेहा बोरा ने भाजपा और आरएसएस पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जो लोग छात्रों के साथ होने का दावा करते हैं, वही छात्र मार्च के दौरान उन पर स्याही फेंक रहे हैं।

नेहा बोरा ने कहा कि छात्र 14वीं जेपीएससी और जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर विधानसभा की ओर मार्च कर रहे थे। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या स्याही फेंकने जैसी घटनाओं से छात्रों और युवाओं का गुस्सा दबाया जा सकता है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग राजनीतिक हितों के लिए छात्रों के मुद्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि उनका छात्रों की वास्तविक समस्याओं से कोई संबंध नहीं है।

आंदोलन का केंद्र बना भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का मुद्दा

वर्तमान झारखंड छात्र आंदोलन का मुख्य मुद्दा भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताएं हैं। आंदोलनकारी छात्र 14वीं जेपीएससी और जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा को रद्द करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर लगातार धरना और प्रदर्शन कर रहे हैं।

छात्र संगठनों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। दूसरी ओर सरकार बातचीत और सुझावों के माध्यम से समाधान निकालने की कोशिश कर रही है।

आगे की राह

झारखंड छात्र आंदोलन अब अपने 16वें दिन में पहुंच चुका है और सरकार तथा छात्र संगठनों के बीच सहमति अभी भी नहीं बन सकी है। रविवार को होने वाली तीसरे दौर की वार्ता पर सभी की नजरें टिकी हैं। एक ओर छात्र संगठन अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, वहीं सरकार संवाद के जरिए समाधान तलाशने का प्रयास कर रही है। भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब राज्य की प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है। (Expose India)

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