
कोसीकलां/छाता, मथुरा। छाता शुगर मिल को चालू कराने की मांग को लेकर पिछले एक सप्ताह से चल रहा आंदोलन लगातार गति पकड़ता जा रहा है। आंदोलन की कमान अब भूतपूर्व सैनिकों ने संभाल ली है। धरना स्थल पर प्रतिदिन किसानों, नौजवानों और युवाओं की भीड़ बढ़ रही है। वहीं स्थानीय जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता भी आंदोलन से जुड़ रहे हैं।
रविवार को मथुरा से तीन बार सांसद रहे कुंवर मानवेंद्र सिंह छाता शुगर मिल स्थित आंदोलन स्थल पर पहुंचे। उन्होंने धरने पर बैठे किसानों और भूतपूर्व सैनिकों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने स्थानीय मंत्री पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि मंत्री किसानों को खुशहाल नहीं देखना चाहते।

कुंवर मानवेंद्र सिंह ने कहा कि किसान खुशहाल होगा तो उसकी पीढ़ियां सुधरेंगी। बच्चे पढ़-लिखकर आगे बढ़ेंगे और उन्हें रोजगार के अवसर मिलेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि छाता क्षेत्र में स्थानीय जनप्रतिनिधि के कथित समर्थकों का आतंक है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि थानों में पुलिस अधिकारियों के साथ अभद्रता की जाती है तथा लोगों की जमीन पर दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि तरौली की चुनावी सभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छाता शुगर मिल को चालू कराने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि इसी क्रम में प्रदेश सरकार में चौधरी लक्ष्मी नारायण को गन्ना एवं चीनी मिल मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई और कैबिनेट में प्रस्ताव पारित कर शुगर मिल के लिए 300 करोड़ रुपये की प्रारंभिक राशि आवंटित की गई। मानवेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि स्थानीय मंत्री की कथित मंशा के कारण शुगर मिल शुरू नहीं हो सकी और इससे मुख्यमंत्री तथा पार्टी की छवि भी प्रभावित हुई है।
कुंवर मानवेंद्र सिंह ने धरना स्थल पर मौजूद भूतपूर्व सैनिकों और किसानों को आश्वस्त करते हुए कहा कि वह जल्द ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर छाता शुगर मिल की समस्या के संबंध में वार्ता करेंगे। उन्होंने कहा कि शुगर मिल को चालू कराने के लिए वह हरसंभव प्रयास करेंगे। मुख्यमंत्री से वार्ता के बाद वह दोबारा धरना स्थल पर पहुंचकर किसानों को पूरी जानकारी देंगे।
धरने में जबर प्रधान, पूर्व छाता नगर पंचायत अध्यक्ष ठाकुर झब्बू सिंह, गौ रक्षा से जुड़ी श्रीमती गौतम, गोपाल जिंदल प्रधान नवझील, चतुर सिंह सोलंकी, नितिन चौहान, सुमित चौहान, शुभम चौहान, ठाकुर नवल सिंह, अनिल सिंह, पहलवान रमन अकबरपुर, ठाकुर महेश पाल सिंह बुखारी, कलुआ, गिर्राज, वीर सिंह, लव सिंह, टीकम, धर्मेंद्र, वेदपाल, हिमालय, वासुदेव, भीम सिंह सहित सैकड़ों किसान एवं अन्य लोग मौजूद रहे।