Swine Flu को लेकर ICMR अलर्ट, 65+ उम्र वालों और कमजोर इम्युनिटी वालों के लिए अहम सलाह

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश के कई राज्यों में स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ने के बीच भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने H1N1 को लेकर अहम जानकारी दी है। ICMR के मुताबिक, फिलहाल सामने आ रहा H1N1 कोई नया स्ट्रेन नहीं है, बल्कि मौसमी फ्लू का सामान्य रूप है। परिषद ने यह भी बताया है कि किन लोगों को फ्लू वैक्सीन पर डॉक्टर की सलाह से विचार करना चाहिए और किन मरीजों को ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है।
Swine Flu को लेकर ICMR ने क्या कहा?
ICMR के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल के मुताबिक, देश में इन्फ्लूएंजा A और B दोनों की मौजूदगी देखी जा रही है। इनमें इन्फ्लूएंजा A का H1N1 सबसे ज्यादा पाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि फ्लू वायरस में हर साल छोटे-छोटे बदलाव होते हैं। इन्हीं बदलावों की वजह से वायरस लोगों को संक्रमित करता रहता है। मौजूदा स्थिति में भी इसी तरह का सामान्य बदलाव देखने को मिल रहा है। ICMR के अनुसार, यह कोई नया H1N1 स्ट्रेन नहीं है और इससे किसी अलग तरह की बीमारी होने की आशंका नहीं है।

Swine Flu वैक्सीन किसे लगवानी चाहिए?
ICMR ने फिलहाल हर व्यक्ति के लिए फ्लू वैक्सीन की सिफारिश नहीं की है। डॉ. बहल के मुताबिक, ICMR ने भारत में फ्लू वैक्सीन की लागत और इसके फायदे को लेकर अध्ययन किया है।
खास जोखिम वाले लोगों में विशेष रूप से 65 साल से अधिक उम्र के लोगों और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों को डॉक्टर से सलाह लेकर वैक्सीन लेने पर विचार करना चाहिए।
बच्चों के लिए क्या है ICMR की सलाह?
बच्चों को लेकर भी ICMR ने स्पष्ट किया है कि फ्लू वैक्सीन फिलहाल राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम का हिस्सा नहीं है। डॉ. बहल के मुताबिक, ICMR को इसे राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल करने की जरूरत फिलहाल नहीं दिखती।
क्या हर मरीज को Swine Flu का टेस्ट कराना जरूरी है?
ICMR के मुताबिक, फ्लू के हर मरीज का टेस्ट कराने की जरूरत नहीं है। ICMR DG ने कोविड महामारी के दौरान देश में हुए करीब 94 करोड़ टेस्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि मौजूदा फ्लू की स्थिति में हर व्यक्ति की जांच करना जरूरी नहीं है।
इसका मतलब है कि हर फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्ति के लिए टेस्ट को अनिवार्य नहीं माना गया है। मरीज की स्थिति और जोखिम को देखते हुए डॉक्टर आगे की जांच और उपचार को लेकर फैसला कर सकते हैं।
इलाज में एंटीबायोटिक नहीं, जरूरत पर एंटीवायरल
फ्लू एक वायरल बीमारी है। ऐसे में सामान्य मामलों में एंटीबायोटिक का खास फायदा नहीं होता। गंभीर बीमारी का खतरा रखने वाले मरीजों में डॉक्टर की सलाह पर एंटीवायरल दवा दी जा सकती है।
स्रोत सामग्री के मुताबिक, Oseltamivir (Tamiflu) जैसी एंटीवायरल दवा जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल की जा सकती है। इसे डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लिया जाना चाहिए।
ICMR के मुताबिक, 99 फीसदी से ज्यादा मामलों में अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं पड़ती। बीमारी की स्थिति में घर पर आराम करना, खांसते या छींकते समय मुंह ढकना और हाथों की सफाई रखना संक्रमण के प्रसार को रोकने में मदद कर सकता है।
किन लोगों को ज्यादा सावधानी की जरूरत?
मौजूदा जानकारी के मुताबिक, खास जोखिम वाले लोगों को फ्लू के दौरान विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। इनमें विशेष रूप से 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोग और कमजोर इम्युनिटी वाले लोग शामिल हैं।
ऐसे लोगों के लिए वैक्सीन को लेकर डॉक्टर से सलाह लेना महत्वपूर्ण बताया गया है। वहीं सामान्य मामलों में हर मरीज के लिए अस्पताल में भर्ती होना या टेस्ट कराना जरूरी नहीं माना गया है।
अस्पतालों को लेकर क्या स्थिति है?
स्रोत सामग्री के मुताबिक, देश के कई राज्यों में स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ने के बीच स्वास्थ्य मंत्रालय अलर्ट मोड पर है। अस्पतालों को आइसोलेशन बेड तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।
हालांकि, ICMR ने मौजूदा H1N1 को कोई नया स्ट्रेन नहीं बताया है और इसे मौसमी फ्लू का सामान्य रूप बताया है।
अब Swine Flu को लेकर क्या समझना जरूरी है?
मौजूदा स्थिति में सबसे अहम बात यह है कि H1N1 को लेकर अनावश्यक घबराहट के बजाय जोखिम वाले लोगों पर विशेष ध्यान दिया जाए। ICMR के अनुसार, हर व्यक्ति को फ्लू वैक्सीन लगवाने की सिफारिश नहीं की गई है और हर मरीज का टेस्ट भी जरूरी नहीं है।
वहीं, गंभीर बीमारी के जोखिम वाले मरीजों में डॉक्टर की सलाह के अनुसार एंटीवायरल उपचार पर विचार किया जा सकता है। घर पर आराम, खांसते-छींकते समय मुंह ढकना और हाथ साफ रखना संक्रमण रोकने में मददगार उपाय बताए गए हैं। (Expose India)
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