शी जिनपिंग के भारत आने से पहले चीन का बड़ा संदेश, मतभेद सुलझाने पर जोर

शी जिनपिंग के भारत दौरे से पहले चीन ने भारत के साथ सहयोग और संवाद बढ़ाने का संदेश दिया। मोदी-शी बैठक में रिश्तों पर होगी अहम चर्चा।

शी जिनपिंग और पीएम मोदी की मुलाकात
शी जिनपिंग और पीएम मोदी की मुलाकात

नई दिल्ली/अमर भारती। चीन ने भारत के साथ रिश्तों को लेकर बड़ा सकारात्मक संदेश दिया है। चीनी राजदूत शू फेइहोंग ने कहा है कि चीन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के रणनीतिक मार्गदर्शन में भारत के साथ मिलकर काम करेगा। चीन ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने, बातचीत और सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ दोनों देशों के मतभेदों को उचित तरीके से सुलझाने की बात कही है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत पहुंचे हैं और 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं।

मोदी-शी मुलाकात पर दुनिया की नजर

भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने शुक्रवार रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि चीन और भारत राष्ट्रपति शी जिनपिंग तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच द्विपक्षीय बैठक की व्यवस्था कर रहे हैं। दोनों नेताओं की यह मुलाकात 12 सितंबर को नई दिल्ली में हो रहे BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान होनी है। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच बैठक शाम करीब 5:45 बजे भारत मंडपम में निर्धारित है।

इस बैठक को भारत-चीन संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शी जिनपिंग की भारत यात्रा करीब सात साल बाद हो रही है। चीन के विदेश मंत्रालय ने भी पुष्टि की है कि शी 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।

चीन ने कहा- मतभेदों को सही तरीके से सुलझाएंगे

चीनी राजदूत शू फेइहोंग ने कहा कि दोनों देशों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से अपने संबंधों को संभालना चाहिए। चीन भारत के साथ संवाद बढ़ाने, सहयोग मजबूत करने और मतभेदों को उचित तरीके से प्रबंधित करने के लिए काम करेगा। शी जिनपिंग के आने और पीएम मोदी से द्विपक्षीय बैठक पर दुनिया की नजरें टिकीं है।

चीनी पक्ष का यह संदेश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत और चीन के संबंधों में लंबे समय तक तनाव रहा। दोनों देशों के बीच सीमा पर सैन्य गतिरोध ने राजनीतिक और आर्थिक संबंधों को भी प्रभावित किया था। हालांकि, पिछले कुछ समय में दोनों देशों के बीच संवाद और संपर्क बढ़ा है।

कजान और तियानजिन के बाद तीसरी मुलाकात

शू फेइहोंग ने यह भी रेखांकित किया कि मोदी और शी की यह लगातार तीसरे वर्ष होने वाली मुलाकात होगी। दोनों नेता अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में BRICS सम्मेलन के दौरान मिले थे। इसके बाद 2025 में तियानजिन में SCO सम्मेलन के दौरान भी दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी। अब नई दिल्ली में होने वाली बैठक दोनों देशों के रिश्तों को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम मानी जा रही है।

भारत और शी जिनपिंग के रिश्तों में पिछले कुछ समय में धीरे-धीरे सुधार के संकेत दिखाई दिए हैं। 2024 में सीमा पर सैनिकों की वापसी से जुड़ी प्रक्रिया के बाद दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद बढ़ा है। व्यापार, सीधी उड़ानों और लोगों के बीच संपर्क जैसे मुद्दों पर भी आगे बढ़ने की कोशिश हुई है। हालांकि, सीमा विवाद और रणनीतिक मतभेद अब भी दोनों देशों के रिश्तों की बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

BRICS के मंच से रिश्तों को नई दिशा?

शी जिनपिंग का भारत दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब नई दिल्ली में 18वां BRICS शिखर सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। BRICS मंच पर भारत और चीन दोनों महत्वपूर्ण सदस्य हैं और वैश्विक व्यापार, निवेश, ऊर्जा, तकनीक और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर दोनों देशों की भूमिका अहम है।

ऐसे में मोदी-शी बैठक सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि BRICS के भीतर सहयोग और वैश्विक मुद्दों पर दोनों देशों की स्थिति को भी प्रभावित कर सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक भारत-चीन संबंधों में पूरी तरह सामान्य स्थिति लौटने के लिए सीमा विवाद, व्यापार असंतुलन और रणनीतिक भरोसे जैसे मुद्दों पर ठोस प्रगति जरूरी होगी।

भारत-चीन संबंधों में नए अध्याय की उम्मीद

शी जिनपिंग की करीब सात साल बाद भारत यात्रा और प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी प्रस्तावित द्विपक्षीय बैठक को दोनों देशों के रिश्तों में एक अहम पड़ाव के तौर पर देखा जा रहा है। चीन ने बातचीत, सहयोग और मतभेदों के उचित प्रबंधन का संदेश दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि मोदी और शी की बैठक से सीमा, व्यापार और द्विपक्षीय संबंधों को लेकर क्या ठोस संकेत सामने आते हैं।

फिलहाल चीन का संदेश साफ है कि वह भारत के साथ संवाद और सहयोग को आगे बढ़ाना चाहता है। लेकिन दोनों देशों के रिश्तों में वास्तविक बदलाव का आकलन आने वाले समय में होने वाली बातचीत और जमीन पर उठाए जाने वाले कदमों से ही होगा।

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