हरीश रावत ने कांग्रेस के संगठनात्मक पदों से दिया इस्तीफा, बोले- पार्टी के संघर्ष में मेरी वजह से कमजोरी न आए

हरीश रावत ने कांग्रेस के संगठनात्मक पदों से हटने का ऐलान किया। पूर्व ओएसडी के घर ED कार्रवाई के बाद उन्होंने पार्टी संघर्ष का हवाला दिया।

हरीश रावत ने कांग्रेस के संगठनात्मक पदों से दिया इस्तीफा
हरीश रावत ने कांग्रेस के संगठनात्मक पदों से दिया इस्तीफा

नई दिल्ली/अमर भारती। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने पार्टी के संगठनात्मक पदों से हटने का ऐलान किया है। शुक्रवार को उनके पूर्व ओएसडी चंदन सिंह जीना के घर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के बाद उत्तराखंड की राजनीति में हलचल तेज हो गई। इसके बाद देर रात हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट लिखकर कांग्रेस के दो संगठनात्मक पदों से हटने की इच्छा जताई।

हरीश रावत ने कहा कि वह उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी के सदस्य और कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के स्थायी आमंत्रित सदस्य के पद से हटना चाहते हैं। उन्होंने इसके पीछे वजह बताते हुए कहा कि उनके किसी भी कृत्य से पार्टी के भ्रष्टाचार विरोधी संघर्ष में कोई कमजोरी नहीं आनी चाहिए।

पूर्व ओएसडी के घर ED कार्रवाई के बाद लिया फैसला

हरीश रावत ने अपनी पोस्ट में चंदन सिंह जीना के साथ अपने पुराने संबंधों का जिक्र किया। उन्होंने स्वीकार किया कि जीना उनके ओएसडी रहे हैं और उन्होंने पार्टी तथा सरकार में अपने कार्यकाल के दौरान महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली थीं। रावत ने कहा कि सामने आ रही खबरों में उनके पूर्व सहयोगी के पास कथित तौर पर भारी मात्रा में कैश और ज्वैलरी मिलने की बात कही जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन दावों की वास्तविकता आने वाले समय में सामने आएगी। उन्होंने चंदन सिंह जीना को “सज्जन, विनम्र और काम करने वाला व्यक्ति” बताते हुए कहा कि यदि ग्राम सेवकों की भर्ती में OMR शीट से छेड़छाड़ जैसे किसी आरोप के प्रमाण सामने आते हैं, तो वह ऐसे कृत्य के लिए शर्मिंदा होंगे। हालांकि, उन्होंने कहा कि फिलहाल उन्हें इन आरोपों पर विश्वास नहीं है।

‘मेरी वजह से पार्टी के संघर्ष में कमजोरी नहीं आनी चाहिए’

हरीश रावत ने कहा कि उत्तराखंड में आने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दांव काफी बड़ा है। उन्होंने अपने पुराने अंदाज का जिक्र करते हुए कहा कि वह मजाक में कहा करते थे कि चुनाव तब होंगे, जब CBI उनके दरवाजे पर दस्तक देगी। रावत ने कहा कि इस बार उनके घर के बजाय उनके एक सहयोगी के घर पर कार्रवाई हुई है और उनके मुताबिक इसके जरिए एक नैरेटिव बनाने की कोशिश की गई है।

उन्होंने कांग्रेस के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का भी जिक्र किया और कहा कि पार्टी कार्यकर्ता भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। ऐसे में यदि उनके किसी कृत्य से पार्टी के संघर्ष को नुकसान पहुंचता है, तो वह ऐसा बिल्कुल नहीं चाहेंगे। इसी वजह से उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने इष्ट देवता का स्मरण करने के बाद संगठनात्मक जिम्मेदारियों से हटने का फैसला किया है।

भर्ती प्रक्रिया पर भी हरीश रावत ने दी सफाई

हरीश रावत ने अपने बयान में उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग और सरकारी भर्तियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आयोग का गठन राज्य के युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखकर किया गया था। रावत ने दावा किया कि उनके करीब तीन साल के कार्यकाल में 42 हजार से ज्यादा सरकारी पदों पर भर्तियां हुईं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को तेज करने के लिए अलग-अलग भर्ती बोर्ड भी बनाए थे, जिनमें मेडिकल और शिक्षा से जुड़े भर्ती बोर्ड शामिल थे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि नियुक्तियों की प्रक्रिया में उनकी सरकार की ओर से कोई “एरर ऑफ जजमेंट” हुआ है, तो वह उत्तराखंड के लोगों से उसके लिए माफी मांगते हैं।

‘भर्ती में गड़बड़ी युवाओं के भविष्य से खिलवाड़’

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी नियुक्तियों और परीक्षाओं में किसी भी तरह की गड़बड़ी आने वाली पीढ़ी के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि यदि जाने-अनजाने में उनसे कोई ऐसी गलती हुई है, जिसका राज्य के युवाओं के भविष्य पर नकारात्मक असर पड़ा है, तो वह उसके लिए खुद को जवाबदेह मानते हैं।

हरीश रावत ने सार्वजनिक तौर पर अपील करते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति के पास भर्ती प्रक्रिया में उनकी कथित संलिप्तता से जुड़े कोई प्रमाण हैं, तो वे उन्हें CBI, ED या राज्य पुलिस को उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि बड़े पद की जिम्मेदारी संभालने वाले हर व्यक्ति को प्रलोभनों से बचना चाहिए। यदि उनसे कोई चूक हुई है, तो कानून के मुताबिक उन्हें दंड मिलना चाहिए।

चुनाव से पहले हरीश रावत के फैसले से सियासी हलचल

उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। ऐसे समय में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत का संगठनात्मक पदों से हटने का फैसला पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, रावत ने अपनी पोस्ट में पार्टी छोड़ने की बात नहीं कही है। हरीश रावत का फैसला मुख्य रूप से उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी और कांग्रेस कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य के पद से हटने को लेकर है। अब इस फैसले के बाद कांग्रेस की आगे की रणनीति और उत्तराखंड की चुनावी राजनीति पर इसका क्या असर पड़ता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।

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