Barrier-Free-Tolling-2027:टोल प्लाजा पर बिना रुके गुजरेंगे वाहन, AI टोलिंग का प्लान

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए टोल व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में बताया कि भारत एआई आधारित डिजिटल और बैरियर-फ्री टोलिंग (Barrier-Free-Tolling-2027) प्रणाली की ओर बढ़ रहा है। नई व्यवस्था फरवरी-मार्च 2027 तक लागू होने की उम्मीद है, जिसके बाद वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
मार्च 2027 तक लागू हो सकती है बैरियर-फ्री टोलिंग व्यवस्था
नितिन गडकरी ने शुक्रवार को ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 को संबोधित करते हुए कहा कि एआई और निर्बाध टोल प्रणाली के जरिए टोल प्लाजा पर रुकने वाली पुरानी व्यवस्था को खत्म करने की दिशा में काम किया जा रहा है। Barrier-Free-Tolling-2027: नई प्रणाली के लागू होने के बाद वाहन टोल चौकियों पर बिना रुके सीधे आगे बढ़ सकेंगे।
गडकरी के मुताबिक, भविष्य का राजमार्ग इंटेलिजेंट, बाधा-रहित और पूरी तरह कैशलेस होगा। सरकार की योजना राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल वसूली को ज्यादा डिजिटल और सुगम बनाने की है।
कैसे काम करेगी नई टोल प्रणाली?
नई बैरियर-फ्री टोलिंग (Barrier-Free-Tolling-2027) व्यवस्था में स्वचालित वाहन नंबर प्लेट पहचान यानी ANPR और FASTag को एक-दूसरे से जोड़ा जाएगा। इस एकीकरण के जरिए टोल वसूली स्वचालित तरीके से की जाएगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य टोल प्लाजा पर वाहनों के रुकने और इंतजार करने की जरूरत को खत्म करना है। यानी वाहन बिना बैरियर पर रुके टोल प्लाजा से गुजर सकेंगे और डिजिटल माध्यम से टोल वसूली की प्रक्रिया पूरी होगी।
FASTag ने पहले ही घटाया वेटिंग टाइम
गडकरी ने FASTag की सफलता का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि FASTag को 2014 में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया था और 2021 में इसे अनिवार्य कर दिया गया।
वर्तमान में राष्ट्रीय राजमार्गों के टोल प्लाजा पर 98 प्रतिशत से अधिक वाहनों में FASTag का इस्तेमाल हो रहा है। देश में अब तक 13 करोड़ से अधिक FASTag जारी किए जा चुके हैं।
FASTag व्यवस्था ने पहले टोल प्लाजा पर लगने वाले 12 से 30 मिनट के प्रतीक्षा समय को 80 से 90 प्रतिशत तक कम किया है। अब प्रस्तावित बैरियर-फ्री टोलिंग (Barrier-Free-Tolling-2027) व्यवस्था के जरिए इस प्रक्रिया को और निर्बाध बनाने की योजना है।

सालाना टोल राजस्व में 10,000 करोड़ रुपये बढ़ने का अनुमान
सरकार को उम्मीद है कि नई डिजिटल और बाधा-मुक्त टोलिंग (Barrier-Free-Tolling-2027) व्यवस्था से वाहन चालकों के समय की बचत होगी। इसके साथ ही टोल संग्रह में पारदर्शिता बढ़ने की संभावना है।
मूल कंटेंट के मुताबिक, इस नई प्रणाली से सालाना टोल राजस्व में करीब 10,000 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी का अनुमान है। एआई आधारित प्रणाली और डिजिटल टोलिंग के जरिए टोल संग्रह की प्रक्रिया को ज्यादा प्रभावी बनाने की कोशिश की जा रही है।
OneTag से बैंक बदलने पर नहीं लेना होगा नया FASTag
ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में नितिन गडकरी ने ‘OneTag’ नाम की नई सुविधा भी लॉन्च की है। इसके तहत FASTag उपयोगकर्ताओं को अपना बैंक बदलने के लिए नया FASTag खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

नई व्यवस्था (Barrier-Free-Tolling-2027) में वाहन चालक पुराने FASTag को हटाए बिना और नया टैग खरीदे बिना अपने FASTag से जुड़े बैंक को बदल यानी पोर्ट कर सकेंगे। इससे बैंक बदलने की प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद है।
टोल व्यवस्था में क्या बदलेगा?
नई बैरियर-फ्री टोलिंग व्यवस्था लागू होने के बाद टोल प्लाजा पर वाहनों के रुकने की जरूरत खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ेगा। ANPR और FASTag के एकीकरण से टोल वसूली डिजिटल तरीके से होगी।
वहीं OneTag सुविधा FASTag उपयोगकर्ताओं को बैंक बदलने के लिए नया टैग लेने की परेशानी से बचाएगी। इस तरह सरकार की योजना टोल भुगतान को ज्यादा डिजिटल, कैशलेस और निर्बाध बनाने की है।
संक्षेप में
मार्च 2027 तक बैरियर-फ्री टोलिंग (Barrier-Free-Tolling-2027) व्यवस्था लागू होने की उम्मीद है। ANPR और FASTag के एकीकरण से वाहन बिना रुके टोल प्लाजा पार कर सकेंगे, जबकि OneTag सुविधा के जरिए FASTag को बदले बिना बैंक पोर्ट करने की सुविधा मिलेगी। सरकार को इस डिजिटल व्यवस्था से सालाना टोल राजस्व में करीब 10,000 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी का अनुमान है। (Expose India)
यह भी पढ़ें
BRICS पर कांग्रेस में दो राय: शशि थरूर ने गिनाए फायदे, पी. चिदंबरम ने उठाए सवाल