
न छिड़काव, न सफाई… गंदगी और मच्छरों के बीच जीने को मजबूर ग्रामीण, स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही के आरोप
बोबी ठाकुर | कासगंज
कासगंज। जनपद के ढोलना क्षेत्र स्थित ईटउआ गांव में बुखार के बढ़ते मामलों ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। गांव में 35 वर्षीय हिम्मत कुमार की मौत के बाद दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का दावा है कि 50 से अधिक महिला, पुरुष और बच्चे बुखार से पीड़ित हैं। वहीं, स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर लोगों में नाराजगी है।
जानकारी के मुताबिक, हिम्मत कुमार की बुधवार रात हालत बिगड़ने पर उसे शहर के एक निजी क्लीनिक में भर्ती कराया गया था। हालत गंभीर होने पर चिकित्सक ने उसे अलीगढ़ रेफर कर दिया। हालांकि, अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में उसकी मौत हो गई। ग्रामीणों के अनुसार, युवक की मौत डेंगू से हुई है। हालांकि, इसकी आधिकारिक चिकित्सकीय पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है।
हर घर में बीमार, चारपाइयों पर कट रहे दिन
हिम्मत कुमार की मौत के बाद गांव में मातम पसरा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में 50 से अधिक लोग बुखार से पीड़ित हैं। इनमें महिलाएं, पुरुष और बच्चे शामिल हैं। कई लोगों की हालत ऐसी है कि वे चारपाई से उठने की स्थिति में नहीं हैं। बीमारी के बढ़ते मामलों के बीच ग्रामीणों को समुचित स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिलने की शिकायत है। लोगों का आरोप है कि उन्हें निजी चिकित्सकों के यहां इलाज कराना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक परेशानी भी बढ़ रही है।
छिड़काव और सफाई नहीं होने का आरोप
ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय सफाई व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि गांव में गंदगी का अंबार लगा है और मच्छरों से बचाव के लिए नियमित फॉगिंग तथा एंटी-लार्वा छिड़काव नहीं कराया गया। लोगों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों के मुताबिक, विभाग की ओर से एक दिन दवाइयां बांटकर औपचारिकता पूरी कर दी गई, लेकिन बीमारी की रोकथाम के लिए व्यापक अभियान नहीं चलाया गया।
बीमारी से जूझते गांव को इंतजार
गांव में लगातार सामने आ रहे बुखार के मामलों ने लोगों को भयभीत कर दिया है। ग्रामीणों की मांग है कि स्वास्थ्य विभाग तत्काल चिकित्सा शिविर लगाए, बीमार लोगों की जांच कराए और जरूरतमंद मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराए। साथ ही गांव में साफ-सफाई, मच्छरों के लार्वा को नष्ट करने के लिए छिड़काव और फॉगिंग कराई जाए।
फिलहाल, ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि बीमारी की रोकथाम और मरीजों के उपचार के लिए प्रभावी कदम कब उठाए जाएंगे। गांव में बुखार के मामलों की वास्तविक स्थिति, डेंगू की पुष्टि और युवक की मौत के कारणों को स्पष्ट करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की जांच और आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।