जब जब धरती पर अधर्म बढ़ता है तब तब भगवान का अवतरण होता है – अतुल कृष्ण भारद्वाज

रामनगर बाराबंकी। श्रीराम कथा के तीसरे दिन गुरुवार को कथा व्यास अतुल कृष्ण भारद्वाज ने कहा कि जब-जब धरती पर अधर्म का बोलबाला बढ़ता है, तब-तब भगवान किसी न किसी रूप में अवतार लेकर धर्म की स्थापना करते हैं। भगवान कण-कण में विद्यमान हैं। निर्मल और स्वच्छ मन से की गई सच्ची भक्ति के माध्यम से ही प्रभु की प्राप्ति संभव है।भगवान श्रीराम के जन्म प्रसंग की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि त्रेता युग में जब असुरों का अत्याचार बढ़ा तो भगवान श्रीराम ने माता कौशल्या की कोख से जन्म लेकर अधर्म का नाश किया। उन्होंने कहा कि भगवान सर्वत्र हैं और भक्त प्रेम से पुकारे तो कहीं भी प्रकट हो सकते हैं। भक्त के भाव के अनुरूप निराकार परमात्मा साकार रूप धारण करते हैं।कथा व्यास ने धर्म और संप्रदाय के अंतर को समझाते हुए कहा कि धर्म मनुष्य के भीतर एकता का भाव पैदा करता है, जबकि संप्रदाय बाहरी रूप से जोड़ता है। भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण ने अवतार लेकर अधर्म का नाश किया और धर्म की रक्षा का संदेश दिया।उन्होंने युवा पीढ़ी के पाश्चात्य सभ्यता की ओर बढ़ते आकर्षण पर चिंता जताई। माताओं से कहा कि गर्भावस्था के दौरान उनके चिंतन, खान-पान, पठन-पाठन और रहन-सहन का बच्चे के व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए गर्भावस्था में सात्विक भोजन, सकारात्मक चिंतन और भगवान का स्मरण करना चाहिए।भगवान श्रीराम के जन्म प्रसंग में उन्होंने विष्णु के द्वारपाल जय-विजय के श्राप तथा मनु-सतरूपा की तपस्या का वर्णन किया। जैसे ही कथा व्यास ने श्रीराम जन्म का भजन सुनाया, श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे और पूरा वातावरण राममय हो गया।