महाराष्ट्र में ‘ऑपरेशन टाइगर’ के बाद सियासी हलचल तेज। छह सांसदों की बगावत के बाद अब ठाकरे गुट के कुछ विधायकों के भी शिंदे गुट में शामिल होने का दावा किया जा रहा है।

नई दिल्ली/अमर भारती। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर होने के संकेत मिल रहे हैं। ठाकरे गुट की शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के बगावती रुख के बाद अब कुछ विधायकों के भी उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की चर्चा तेज हो गई है। शिंदे गुट के विधायक बच्चू कडू ने दावा किया है कि मानसून सत्र शुरू होने से पहले राज्य की राजनीति में बड़ा राजनीतिक भूचाल देखने को मिल सकता है।
सांसदों के बाद विधायकों की बगावत की अटकलें
शिंदे गुट के विधायक बच्चू कडू ने कहा कि ठाकरे गुट के कई जनप्रतिनिधि भविष्य की राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए अपने फैसले ले रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि छह सांसदों के बाद अब कुछ विधायक भी शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं। कडू ने एकनाथ शिंदे की राजनीतिक रणनीति की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी योजना पूरी तरह सटीक है और आने वाले दिनों में इसके और परिणाम सामने आ सकते हैं।
क्या है ‘ऑपरेशन टाइगर’?
पिछले कुछ समय से महाराष्ट्र की राजनीति में ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा जोरों पर है। राजनीतिक गलियारों में यह नाम उस अभियान को दिया जा रहा है जिसके तहत ठाकरे गुट के नेताओं और जनप्रतिनिधियों को शिंदे गुट में शामिल करने की कोशिश की जा रही है। खबरों के मुताबिक ठाकरे गुट के छह सांसदों ने अलग समूह बनाकर आगे चलकर शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ जाने की तैयारी दिखाई है। यदि ऐसा होता है तो लोकसभा में शिंदे गुट की राजनीतिक ताकत और बढ़ सकती है।
16 विधायकों के संपर्क में होने का दावा
शिंदे गुट के नेताओं ने पहले भी दावा किया था कि ठाकरे गुट के कई सांसद और विधायक उनके संपर्क में हैं। कुछ नेताओं ने यहां तक कहा था कि शिवसेना (यूबीटी) के 16 विधायक भी उनके संपर्क में हैं। हालांकि इन दावों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इन चर्चाओं ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है।
उद्धव ठाकरे ने बुलाई अहम बैठक
राजनीतिक हलचल के बीच शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पार्टी के विधायकों और विधान परिषद सदस्यों की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक पार्टी के भीतर असंतोष की स्थिति को समझने और संभावित टूट को रोकने की रणनीति तैयार करने के लिए बुलाई गई है। आने वाले दिनों में इस बैठक के नतीजे पार्टी की दिशा तय कर सकते हैं।
संजय राऊत का पलटवार
सांसदों की कथित बगावत की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राऊत ने बागी नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने शिंदे गुट की कार्यशैली की आलोचना करते हुए दावा किया कि राजनीतिक दबाव बनाकर पार्टी को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि शिंदे गुट इन आरोपों को खारिज कर रहा है और इसे नेताओं की स्वेच्छा से लिया गया राजनीतिक फैसला बता रहा है।
क्या फिर होगी बड़ी राजनीतिक टूट?
साल 2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद शिवसेना में यह दूसरी बड़ी टूट मानी जा रही है। यदि सांसदों के बाद विधायक भी शिंदे गुट में शामिल होते हैं तो इसका सीधा असर ठाकरे गुट की संगठनात्मक और राजनीतिक ताकत पर पड़ सकता है। फिलहाल किसी विधायक के शामिल होने को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन मानसून सत्र से पहले बढ़ती राजनीतिक गतिविधियों ने महाराष्ट्र की राजनीति को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब सभी की नजरें आने वाले दिनों में होने वाले राजनीतिक घटनाक्रम और उद्धव ठाकरे की रणनीति पर टिकी हुई हैं।
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