
लखनऊ। दिल की बीमारियों के इलाज के क्षेत्र में लखनऊ के अपोलोमेडिक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल ने एक महत्वपूर्ण और आधुनिक पहल की है। अब हार्ट सर्जरी के लिए मरीजों की छाती पर बड़ा चीरा लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। अस्पताल में नई एंडोस्कोपिक तकनीक के जरिए जटिल हृदय सर्जरी को बेहद कम इनवेसिव तरीके से सफलतापूर्वक अंजाम दिया जा रहा है, जिससे मरीजों को तेजी से रिकवरी और कम दर्द का लाभ मिल रहा है।
छोटे छिद्रों से सर्जरी, हाई-डेफिनिशन कैमरे का इस्तेमाल
कार्डियोथोरेसिक सर्जन डॉ. राहुल भूषण और उनकी टीम ने छोटे-छोटे छिद्रों और हाई-डेफिनिशन कैमरों की मदद से दिल की जन्मजात बीमारियों के कई सफल ऑपरेशन किए हैं। इस प्रक्रिया में छाती की हड्डी को काटने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे सर्जरी के बाद दर्द और जटिलताएं काफी कम हो जाती हैं। मरीज बहुत जल्दी ठीक होकर अस्पताल से डिस्चार्ज भी हो रहे हैं।
एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट का एंडोस्कोपिक इलाज
इस आधुनिक तकनीक के जरिए दिल में छेद यानी एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट का इलाज किया गया। यह एक जन्मजात बीमारी है, जिसमें दिल के ऊपरी हिस्सों के बीच छेद रह जाता है और समय पर इलाज न होने पर यह गंभीर रूप ले सकता है। उत्तर प्रदेश में पहली बार इस तरह की एंडोस्कोपिक कार्डियक सर्जरी लगातार (बैक-टू-बैक) की गई है।
पारंपरिक ओपन हार्ट सर्जरी का विकल्प
अब तक ओपन-हार्ट सर्जरी ही इस तरह के ऑपरेशन का मुख्य तरीका रही है, जिसमें छाती की हड्डी काटनी पड़ती है और शरीर पर बड़ा निशान रह जाता है। इसके विपरीत, नई तकनीक में छोटे कैमरे की मदद से सर्जन को अंदर का स्पष्ट दृश्य मिलता है और वे अत्यंत सटीकता के साथ छोटे छेदों के जरिए सर्जरी कर पाते हैं। इससे शरीर पर आघात कम पड़ता है और रिकवरी का समय भी घटता है।
मरीजों को तुरंत राहत, अगले दिन डिस्चार्ज
जिन तीन मरीजों पर यह सर्जरी की गई, उनमें इसके नतीजे बेहद प्रभावशाली रहे। छाती की हड्डी सुरक्षित रहने के कारण दर्द न्यूनतम रहा और सर्जरी का असर भी बहुत कम पड़ा। मरीज ऑपरेशन के अगले ही दिन घर जाने के लिए तैयार हो गए। यह तकनीक मांसपेशियों और हड्डियों को सुरक्षित रखते हुए सर्जरी के बाद होने वाली जटिलताओं के खतरे को भी कम करती है।
रोबोटिक सर्जरी का किफायती विकल्प
डॉ. राहुल भूषण के अनुसार, यह तकनीक पारंपरिक सर्जरी और महंगी रोबोटिक सर्जरी के बीच की खाई को पाटती है। उन्होंने बताया कि रोबोटिक सर्जरी प्रभावी तो है, लेकिन इसकी लागत काफी अधिक होती है। वहीं, एंडोस्कोपिक तकनीक कम लागत में रोबोट जैसी सटीकता प्रदान करती है, जिससे यह आम मरीजों के लिए अधिक सुलभ बनती है।
प्रदेश में एडवांस्ड कार्डियक केयर को बढ़ावा
रोबोटिक कार्डियक सर्जरी के लिए जहां भारी निवेश और अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होती है, वहीं यह एंडोस्कोपिक तरीका अपेक्षाकृत सुलभ है और बेहतर परिणाम देता है। इससे बड़ी आबादी तक उन्नत हृदय उपचार पहुंचाना संभव हो रहा है।
विश्वस्तरीय इलाज अब लखनऊ में ही उपलब्ध
अपोलोमेडिक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के एमडी और सीईओ डॉ. मयंक सोमानी ने कहा कि अस्पताल का उद्देश्य उत्तर प्रदेश के मरीजों को राज्य से बाहर गए बिना ही विश्वस्तरीय कार्डियक केयर उपलब्ध कराना है। लखनऊ में इस तरह की उन्नत और मिनिमली इनवेसिव तकनीकों को उपलब्ध कराना इसी दिशा में एक बड़ा कदम है।
हेल्थकेयर में बदलाव का संकेत
इस तकनीक की सफलता प्रदेश के हेल्थकेयर सिस्टम में हो रहे बदलाव का संकेत है। अब फोकस केवल सर्जरी की सफलता पर नहीं, बल्कि मरीज की तेजी से रिकवरी और उसकी सामान्य जिंदगी में शीघ्र वापसी पर भी है।
अपोलोमेडिक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल अपने एडवांस्ड कार्डियक प्रोग्राम का लगातार विस्तार कर रहा है और मिनिमली इनवेसिव तथा मरीज-केंद्रित देखभाल को बढ़ावा दे रहा है, जिससे भविष्य में और अधिक मरीजों को इसका लाभ मिल सकेगा।