
लखनऊ/अयोध्या। आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल गुरुवार को लखनऊ पहुंचे, जहां से वह सीधे अयोध्या के लिए रवाना हो गए। लखनऊ एयरपोर्ट पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। इस दौरान राज्यसभा सांसद एवं उत्तर प्रदेश प्रभारी संजय सिंह सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत में अरविंद केजरीवाल ने राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण को लेकर केंद्र सरकार, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और जांच प्रक्रिया पर कई सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि मंदिर से चढ़ावे और अन्य कीमती वस्तुओं के गायब होने की खबरों ने करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत किया है।
केजरीवाल ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के 100 रुपये भी चोरी हो जाते हैं तो पुलिस एफआईआर दर्ज करती है, लेकिन उनके अनुसार इतने बड़े मामले में लंबे समय तक एफआईआर दर्ज न होना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि बिना एफआईआर के किसी भी जांच एजेंसी या एसआईटी की प्रभावशीलता पर सवाल उठते हैं।

आप संयोजक ने एसआईटी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि जांच केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और व्यापक जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में बड़े स्तर पर जवाबदेही तय किए जाने की जरूरत है।
प्रधानमंत्री और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का नाम लेते हुए केजरीवाल ने कहा कि इस पूरे मामले में कई ऐसे प्रश्न हैं जिनका जवाब जनता जानना चाहती है। उन्होंने दावा किया कि श्रद्धालुओं द्वारा भगवान श्रीराम को अर्पित चढ़ावे और मूल्यवान वस्तुओं के संबंध में पारदर्शिता आवश्यक है।

केजरीवाल ने कहा कि वह शुक्रवार को रामलला के दर्शन करेंगे और इसके बाद हनुमानगढ़ी जाकर संतों से मुलाकात भी करेंगे। उन्होंने संकेत दिया कि इस विषय पर वह आगे भी विस्तार से अपनी बात रखेंगे।
उल्लेखनीय है कि राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण को लेकर हाल ही में पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज किया गया है और मामले की जांच जारी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है तथा जांच पूरी होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा।
इस बीच, केजरीवाल के अयोध्या दौरे और उनके बयानों ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अब निगाहें उनके शुक्रवार के कार्यक्रम और इस मुद्दे पर आगे आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हैं।