आजम खान पर ED का शिकंजा कस गया है। जौहर यूनिवर्सिटी समेत रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली के 10 ठिकानों पर छापेमारी, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जांच तेज।

नई दिल्ली/अमर भारती। दो पैन कार्ड मामले में 10 साल की सजा काट रहे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव मोहम्मद आजम खान की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। आयकर विभाग की कार्रवाई के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी आजम खान से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की है। बुधवार सुबह ईडी ने रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली में करीब 10 ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई शुरू की। रामपुर में जौहर यूनिवर्सिटी और आजम खान के जेल रोड स्थित आवास समेत उनके करीबियों से जुड़े परिसरों को भी जांच के दायरे में लिया गया है।
जौहर यूनिवर्सिटी में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच
ईडी की कार्रवाई मुख्य रूप से आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों और ट्रस्ट की वित्तीय गतिविधियों की जांच से जुड़ी बताई जा रही है। जांच एजेंसी को आशंका है कि विश्वविद्यालय के निर्माण और उससे जुड़ी गतिविधियों में बड़ी मात्रा में ऐसी धनराशि का इस्तेमाल हुआ हो सकता है, जिसका पूरा हिसाब उपलब्ध नहीं कराया गया है।
मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के माध्यम से विश्वविद्यालय का संचालन और निर्माण किया गया है। आयकर विभाग लंबे समय से ट्रस्ट की आय-व्यय और विश्वविद्यालय के निर्माण पर खर्च हुई रकम से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रहा है। इसी जांच के बाद अब ईडी की कार्रवाई सामने आई है।
ट्रस्ट नहीं दे पाया 494 करोड़ के खर्च का पूरा हिसाब
जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण पर अनुमानित 494 करोड़ रुपये के खर्च का पूरा ब्योरा उपलब्ध कराने को लेकर आयकर विभाग ने ट्रस्ट से जानकारी मांगी थी। विभाग ने वर्ष 2015 से 2020 के बीच ट्रस्ट की आय और व्यय, विश्वविद्यालय के लिए जमीन खरीद, इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्माण कार्यों पर खर्च की गई रकम से जुड़े दस्तावेज मांगे थे।
इसके अलावा दान के नाम पर ट्रस्ट को करोड़ों रुपये देने वाली 11 संदिग्ध फर्मों से संबंधित रिकॉर्ड भी मांगा गया था। आरोप है कि आजम खान के ट्रस्ट निर्धारित समय में इन सभी जानकारियों और दस्तावेजों को उपलब्ध नहीं करा पाया। ट्रस्ट की ओर से आयकर विभाग से अतिरिक्त समय देने की मांग की गई थी।
जून में ट्रस्ट का पंजीकरण हुआ था रद्द
आयकर विभाग ने 23 जून को आजम खान मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट का पंजीकरण रद्द कर दिया था। विभाग की कार्रवाई में आय और व्यय का पूरा ब्योरा उपलब्ध न कराने सहित अन्य कथित अनियमितताओं को आधार बनाया गया था। इसके बाद से ही जौहर यूनिवर्सिटी की फंडिंग और निर्माण पर खर्च हुई रकम को लेकर जांच तेज होने की संभावना जताई जा रही थी। अब ईडी की छापेमारी को इसी वित्तीय जांच की अगली कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है।
जुलाई में ED ने मांगा था मुकदमों का ब्योरा
ईडी ने जुलाई में रामपुर पुलिस और प्रशासन से आजम खान के खिलाफ दर्ज मुकदमों की जानकारी मांगी थी। इसके बाद से ही माना जा रहा था कि जांच एजेंसी जल्द ही रामपुर में कार्रवाई कर सकती है। बुधवार सुबह करीब 7 बजे ईडी की टीमों ने एक साथ कई स्थानों पर छापेमारी शुरू की। जांच के दौरान दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य संबंधित सामग्री की पड़ताल की जा रही है।
2022 में भी जौहर यूनिवर्सिटी पहुंची थी ED
आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मामलों में ईडी की दिलचस्पी नई नहीं है। इससे पहले 2022 में भी ईडी की एक टीम विश्वविद्यालय से जुड़े मामलों की प्रारंभिक जांच के लिए रामपुर पहुंची थी। अब दोबारा हुई कार्रवाई से इस मामले में जांच का दायरा बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि, छापेमारी के दौरान ईडी को क्या-क्या दस्तावेज या अन्य सामग्री मिली है, इसकी आधिकारिक जानकारी जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेगी।
16 मामलों में फैसला, 8 में हुई सजा
आजम खान के खिलाफ दर्ज मामलों में अब तक 16 मामलों में अदालत का फैसला आ चुका है। इनमें आठ मामलों में उन्हें सजा हुई है, जबकि आठ मामलों में राहत मिली है। मौजूदा समय में आजम खान रामपुर जेल में अपने बेटे अब्दुल्ला आजम के साथ सजा काट रहे हैं।
दो पैन कार्ड मामले और डूंगरपुर प्रकरण में उन्हें 10-10 साल की सजा सुनाई गई है। हाल में जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े 38 भवनों के ध्वस्तीकरण के मामले को लेकर भी आजम खान चर्चा में रहे थे। रामपुर विकास प्राधिकरण ने बिना स्वीकृत नक्शे के निर्माण को लेकर ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया था, जिस पर मंडलायुक्त ने अंतरिम रोक लगा दी थी।
अब ईडी की जौहर यूनिवर्सिटी और आजम खान से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी ने इस पूरे मामले को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। जांच एजेंसी की कार्रवाई के बाद यह देखना अहम होगा कि वित्तीय लेन-देन और यूनिवर्सिटी के निर्माण में इस्तेमाल धन को लेकर जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।
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