तमिलनाडु के CM विजय का विधायकों को बड़ा तोहफा, सरकारी कार के साथ ₹75 हजार भत्ता, DMK ने उठाए सवाल

तमिलनाडु CM विजय ने सभी 234 विधायकों को सरकारी कार, ₹75 हजार मासिक भत्ता और ₹25 लाख हेल्थ कवर देने का ऐलान किया। DMK ने फैसले पर सवाल उठाए।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय विधायकों को सरकारी कार और ₹75 हजार भत्ता देने की घोषणा करते हुए
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय विधायकों को सरकारी कार और ₹75 हजार भत्ता देने की घोषणा करते हुए

नई दिल्ली/अमर भारती। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने राज्य के सभी 234 विधायकों के लिए कई नई सुविधाओं का ऐलान किया है। विधायकों को सरकारी वाहन देने के साथ-साथ फ्यूल और मेंटेनेंस के लिए हर महीने ₹75 हजार का भत्ता दिया जाएगा। इसके अलावा सचिव रखने के लिए ₹25 हजार की अतिरिक्त सरकारी सहायता और स्वास्थ्य बीमा कवर को ₹5 लाख से बढ़ाकर ₹25 लाख करने की घोषणा की गई है। फैसले को लेकर जहां सत्ता पक्ष के नेताओं ने इसे जनसेवा के लिए जरूरी बताया है, वहीं DMK ने सरकार पर फिजूलखर्ची का आरोप लगाया है।

विधायकों को मिलेंगी ये बड़ी सुविधाएं

मुख्यमंत्री विजय सरकार के फैसले के तहत तमिलनाडु के सभी 234 विधायकों को सरकारी वाहन उपलब्ध कराया जाएगा। इसका उद्देश्य विधायकों को अपने विधानसभा क्षेत्रों में लगातार दौरा करने और जनता की समस्याओं तक पहुंचने में मदद करना बताया गया है। सरकार की ओर से वाहन के ड्राइवर, फ्यूल और मेंटेनेंस से जुड़े खर्चों के लिए प्रत्येक विधायक को हर महीने ₹75,000 का विशेष भत्ता दिया जाएगा। इसके अलावा विधायकों को अपना कामकाज संभालने के लिए सचिव या सहायक रखने के लिए ₹25,000 मासिक अतिरिक्त सहायता देने की बात कही गई है।

इस फैसले के साथ विधायकों को मिलने वाले स्वास्थ्य कवर में भी बड़ा बदलाव किया गया है। उनका हेल्थ इंश्योरेंस कवर ₹5 लाख से बढ़ाकर ₹25 लाख किया गया है। मुख्यमंत्री विजय की सरकार पहले ही राज्य के हर परिवार के लिए ₹25 लाख तक के स्वास्थ्य बीमा की नीति को अपने 2026 के शासन एजेंडे में शामिल कर चुकी है।

CM विजय ने विधानसभा में फैसले का किया बचाव

मुख्यमंत्री विजय ने विधानसभा में इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि विधायकों को अपने निर्वाचन क्षेत्रों में जनता की समस्याओं को समझने और उनका समाधान कराने के लिए लगातार दौरे करने पड़ते हैं। सरकार का तर्क है कि बड़ी संख्या में विधायक पहली बार निर्वाचित हुए हैं और उनके लिए क्षेत्रीय स्तर पर काम करने के लिए पर्याप्त लॉजिस्टिक सपोर्ट जरूरी है। सरकार के मुताबिक सरकारी वाहन और स्टाफ की सुविधा मिलने से विधायकों को निजी संसाधनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और वे अपने क्षेत्र में अधिक प्रभावी तरीके से जनसेवा कर सकेंगे।

वाहन और सहायक भत्ते को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस शुरू हो गई है। कुछ लोगों ने इसे विधायकों के कामकाज के लिए जरूरी सुविधा बताया, जबकि आलोचकों ने सवाल उठाया है कि क्या सभी 234 विधायकों को सरकारी वाहन और अतिरिक्त भत्ता देना राज्य के खजाने पर उचित खर्च है।

VCK और सत्ता पक्ष के नेताओं ने किया स्वागत

विधायकों के लिए लॉजिस्टिक्स सपोर्ट की मांग के बाद सरकार की ओर से यह फैसला सामने आया। सत्ता पक्ष के नेताओं ने इसे विधायकों की कार्यक्षमता बढ़ाने वाला कदम बताया है। सरकार का कहना है कि वाहन, ड्राइवर और सचिव की व्यवस्था से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं। समर्थकों के मुताबिक विधायक अपने क्षेत्र में अधिक समय दे पाएंगे और जनता की शिकायतों के समाधान के लिए उनकी पहुंच बेहतर होगी।

DMK ने बताया फिजूलखर्ची

वहीं, मुख्य विपक्षी दल DMK ने मुख्यमंत्री विजय सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का तर्क है कि राज्य के सभी 234 विधायकों को नई सरकारी कारें उपलब्ध कराने और हर महीने भारी भत्ते देने से सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। DMK ने सरकार से सवाल किया है कि जब राज्य में विकास, रोजगार और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ी कई प्राथमिकताएं मौजूद हैं, तब विधायकों की सुविधाओं पर इतना खर्च करना कितना उचित है।

234 विधायकों पर कितना होगा खर्च?

सिर्फ ₹75 हजार मासिक वाहन, फ्यूल और मेंटेनेंस भत्ते की बात करें तो 234 विधायकों पर यह खर्च हर महीने करीब ₹1.75 करोड़ और सालाना लगभग ₹21.06 करोड़ बैठता है। इसमें सरकारी वाहनों की खरीद, ड्राइवर, सचिव के लिए ₹25 हजार मासिक सहायता और अन्य प्रशासनिक खर्च शामिल नहीं हैं। इसलिए योजना की कुल लागत इससे काफी अधिक हो सकती है।

अब मुख्यमंत्री विजय सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस फैसले को प्रभावी तरीके से लागू करने और सरकारी खर्च को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देने की होगी। एक तरफ सरकार इसे बेहतर जनसेवा के लिए जरूरी लॉजिस्टिक सपोर्ट बता रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे सरकारी संसाधनों का अतिरिक्त इस्तेमाल करार दे रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में विधायकों की सरकारी कार और ₹75 हजार भत्ता तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है।

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