सीजेपी ने सरकार पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगाया

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि आंदोलन में शामिल विद्यार्थियों को परेशान किया जा रहा है और उन्हें हिरासत में लेने या गिरफ्तारी की धमकी दी जा रही है।
इसी बीच सीजेपी ने आरोप लगाया कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है और यदि छात्रों के खिलाफ कार्रवाई नहीं रुकी तो वह दोबारा बड़ा आंदोलन शुरू करेगी।
सीजेपी की यह प्रतिक्रिया उस समय सामने आई है जब सुप्रीम Court ने हाल ही में जंतर-मंतर और विभिन्न राज्यों में हुए छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामलों पर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। पार्टी का दावा है कि सरकार और प्रशासन अदालत के आदेशों की भावना के विपरीत काम कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीजेपी की आपत्ति
सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का इस्तेमाल सरकार के हित साधने के लिए नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि अदालत के निर्देशों को राजनीतिक हथियार बनाकर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को जारी रखने का प्रयास नहीं होना चाहिए।
सौरव दास के अनुसार, सरकार ने आंदोलन के दौरान और बाद में सार्वजनिक रूप से आश्वासन दिया था कि छात्रों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस आश्वासन का सम्मान होना चाहिए और प्रदर्शन से जुड़े सभी मामलों को वापस लिया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति का आपराधिक रिकॉर्ड है तो पुलिस उसके पुराने मामलों में कानूनी प्रक्रिया अपना सकती है, लेकिन इसका इस्तेमाल उन विद्यार्थियों को निशाना बनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए जिन्होंने प्रदर्शन में हिस्सा लिया था।
सीजेपी ने दोबारा आंदोलन की दी चेतावनी
सीजेपी का आरोप है कि कई राज्यों से ऐसी शिकायतें मिल रही हैं जिनमें छात्रों को पूछताछ के नाम पर परेशान किए जाने की बात सामने आई है। पार्टी का कहना है कि यदि यह सिलसिला जारी रहा तो वह एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा आंदोलन शुरू करेगी।

सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक वीडियो संदेश में कहा कि छात्रों को डराने-धमकाने की कोशिशें बंद होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि विद्यार्थियों को डिटेन करने, गिरफ्तार करने या उनके खिलाफ दबाव बनाने का प्रयास जारी रहा तो पार्टी फिर से व्यापक आंदोलन करेगी।
अभिजीत दीपके के अनुसार, यह आंदोलन केवल कुछ लोगों का नहीं बल्कि युवाओं के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है और पार्टी ऐसे किसी भी प्रयास का विरोध करेगी जो छात्रों की आवाज दबाने के लिए किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे, ने छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं।
अदालत ने विभिन्न राज्यों में हिरासत में लिए गए नाबालिगों को तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया। साथ ही स्पष्ट किया कि यह राहत उन लोगों को नहीं मिलेगी जिनका आपराधिक रिकॉर्ड है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस कार्रवाई को लेकर लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग करते हैं। अदालत ने संकेत दिया कि वह मामले की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति या विशेष जांच तंत्र के गठन पर विचार कर सकती है।
हालांकि अंतिम निर्णय लेने से पहले अदालत ने केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है।
7 राज्यों और केंद्र को नोटिस
सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार और कई राज्यों को नोटिस जारी किए। इनमें दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, केरल, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य शामिल हैं।
कोर्ट ने कहा कि जिन राज्यों में प्रदर्शन और हिंसा से जुड़े आरोप सामने आए हैं, वे अदालत के समक्ष अपना पक्ष रख सकते हैं। इसके अलावा अदालत ने सभी संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए।
न्यायालय ने सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, वायरलेस संचार रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को संरक्षित रखने को कहा ताकि भविष्य में किसी जांच की स्थिति में उनका उपयोग किया जा सके।
एफआईआर और छात्रों की सुरक्षा पर सीजेपी का दावा
सीजेपी का कहना है कि सरकार के साथ हुई बातचीत में यह भरोसा दिया गया था कि आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी। पार्टी नेताओं का दावा है कि कुछ राज्यों की सरकारों ने भी सार्वजनिक रूप से ऐसा आश्वासन दिया था।
इसके बावजूद सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो और पोस्ट सामने आए हैं जिनमें छात्रों को हिरासत में लेने या पूछताछ के लिए बुलाए जाने के दावे किए गए हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
सीजेपी का आरोप है कि इन्हीं घटनाओं से छात्रों के बीच भय का माहौल बन रहा है। पार्टी का कहना है कि सरकार को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि उसके रुख और जमीन पर हो रही कार्रवाई में अंतर क्यों दिखाई दे रहा है।
केंद्रीय मंत्रियों के आश्वासन का भी किया जिक्र
सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में कहा कि 25 जुलाई को केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ हुई चर्चा में विद्यार्थियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का आश्वासन दिया गया था।
उन्होंने कहा कि यदि इस आश्वासन का पालन नहीं किया जाता है तो इससे सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे। रांका ने कहा कि छात्रों के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई उस भरोसे के विपरीत होगी जो बातचीत के दौरान दिया गया था।
पत्थरों से भरे ट्रक को लेकर दिल्ली पुलिस पर सवाल
सीजेपी ने जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े एक अन्य मुद्दे को भी उठाया है। पार्टी ने दावा किया है कि प्रदर्शन स्थल के पास मिला पत्थरों से भरा ट्रक पहले दिल्ली पुलिस की कस्टडी में था।
पार्टी ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि यह ट्रक 20 जुलाई से पहले चार दिनों तक जब्त वाहनों में शामिल था। सीजेपी ने सवाल उठाया कि ऐसा वाहन शांतिपूर्ण प्रदर्शन स्थल के पास कैसे पहुंचा।
पार्टी का कहना है कि इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए और यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि वाहन को वहां रखने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया था।
हालांकि इस संबंध में सीजेपी ने आरोप लगाए हैं, लेकिन मामले पर संबंधित एजेंसियों की प्रतिक्रिया और जांच प्रक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
भड़क रही बड़े आंदोलन की चिंगारी?
सीजेपी आंदोलन विवाद अब केवल छात्र प्रदर्शनों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सुप्रीम कोर्ट के आदेशों, एफआईआर, पुलिस कार्रवाई और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का बड़ा मुद्दा बन चुका है। सीजेपी ने सरकार पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए छात्रों के खिलाफ कार्रवाई रोकने की मांग की है। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिगों की रिहाई, डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने और स्वतंत्र जांच की आवश्यकता पर महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। आने वाले दिनों में केंद्र और राज्यों के जवाब के बाद इस मामले की दिशा और स्पष्ट हो सकती है। (Expose India)
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