जातिवाद के नाम पर देश को लूटने वाले राष्ट्रद्रोहियों से सावधान रहें: सीएम योगी


लखनऊ, 24 अप्रैल। Yogi Adityanath ने कहा कि राष्ट्रकवि Ramdhari Singh Dinkar की कालजयी कृति Rashmirathi आज भी राष्ट्र और समाज को दिशा देने वाली प्रेरणा है। उन्होंने आगाह किया कि यदि भारत को मजबूत, आत्मनिर्भर और विकसित बनाना है तो जातिवाद के नाम पर समाज को बांटने वाली शक्तियों से सतर्क रहना होगा। मुख्यमंत्री शुक्रवार को Indira Gandhi Pratishthan में आयोजित तीन दिवसीय ‘रश्मिरथी पर्व’ के शुभारंभ और ‘रश्मिरथी से संवाद’ स्मारिका के विमोचन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘रश्मिरथी’ के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित यह कार्यक्रम साहित्य के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि दिनकर की लेखनी में ऐसी शक्ति थी, मानो मां सरस्वती स्वयं उनकी जिह्वा पर विराजमान हों। इस अवसर पर उन्होंने दिनकर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी रचनाएं समाज को जागरूक करने और राष्ट्र चेतना को सशक्त करने का कार्य निरंतर करती रही हैं।सीएम योगी ने कहा कि वे अक्सर दिनकर की कृतियों के अंशों का उपयोग विरोधियों को जवाब देने में भी करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत शक्ति और बुद्धि में समृद्ध रहा, लेकिन कुछ कमजोरियों के कारण गुलामी झेलनी पड़ी। दिनकर ने अपनी रचनाओं में इन्हीं कमजोरियों पर प्रहार किया। ‘रश्मिरथी’ की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने जातिवाद पर प्रहार का संदेश दोहराया और कहा कि समाज को बांटने वाली सोच से सावधान रहना होगा।मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि देश की आजादी को अक्षुण्ण बनाए रखना है तो राष्ट्रविरोधी ताकतों से सतर्क रहना जरूरी है। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए दिनकर की पंक्तियों के माध्यम से साहस, धैर्य और संघर्ष की भावना अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होता है और यह तय करता है कि हम राष्ट्र को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं।कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि आयोजन के आगामी दिनों में Swami Vivekananda, Bal Gangadhar Tilak और Atal Bihari Vajpayee के जीवन पर आधारित विशेष नाट्य प्रस्तुतियां भी होंगी। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने वैश्विक मंच पर भारत की संस्कृति को प्रतिष्ठा दिलाई और युवाओं को नई दिशा दी। वहीं तिलक ने “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है” का उद्घोष कर स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा दी। अटल बिहारी वाजपेयी की कविताएं भी राष्ट्र चेतना को प्रेरित करती हैं।मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि युवाओं को ऐसे आयोजनों से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने Bhatkhande Sanskriti Vishwavidyalaya सहित अन्य संस्थानों के विद्यार्थियों की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि नई पीढ़ी साहित्य और संस्कृति से जुड़ सके।कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने ‘रश्मिरथी’ के नाट्य मंचन को भी देखा और कलाकारों की प्रस्तुति की सराहना की। उन्होंने संस्कृति विभाग को निर्देश दिया कि इस प्रकार के कार्यक्रमों के माध्यम से आमजन को साहित्यिक कृतियों से जोड़ने के प्रयास तेज किए जाएं।इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्वनी चौबे, डॉ. सत्यपाल सिंह, राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह, महापौर सुषमा खर्कवाल सहित कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।