
लखनऊ। सिटी मॉन्टेसरी स्कूल (सीएमएस) के कानपुर रोड ऑडिटोरियम में शुक्रवार को तीन दिवसीय इंटरनेशनल इंटरफेथ कॉन्फ्रेंस का भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के जलशक्ति एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। सम्मेलन में मिस्र, अमेरिका सहित भारत के विभिन्न राज्यों से आए धर्मगुरु, न्यायविद्, शिक्षाविद् और विचारकों ने भाग लिया।
अपने उद्घाटन संबोधन में मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि समाज में सबसे बड़ी क्रांति कानून से नहीं, बल्कि विचारों से आती है। उन्होंने कहा कि लैंगिक समानता का अर्थ केवल समान अधिकार नहीं, बल्कि समान सम्मान, समान अवसर और समान विश्वास भी है। उन्होंने सीएमएस की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान शिक्षा के साथ-साथ मानवता, नैतिकता, विश्व शांति और विश्व बंधुत्व के मूल्यों को भी आगे बढ़ा रहा है।

सम्मेलन का विषय “रीइमैजिनिंग आवर वर्ल्ड टुगेदर: प्लेसिंग जेंडर इक्वालिटी एट द हार्ट ऑफ ह्यूमैनिटी” रखा गया है। 24 से 26 जुलाई तक आयोजित इस सम्मेलन में विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधि लैंगिक समानता, सामाजिक समरसता और वैश्विक शांति जैसे विषयों पर अपने विचार रखेंगे।
उद्घाटन समारोह में सीएमएस के विद्यार्थियों ने देश-विदेश से आए अतिथियों के सम्मान में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए, जिन्हें उपस्थित लोगों ने खूब सराहा।
सीएमएस की संस्थापिका-निदेशिका डॉ. भारती गांधी ने कहा कि धर्म का वास्तविक संदेश मानव एकता, करुणा और समानता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह सम्मेलन समाज, विशेषकर युवाओं को भेदभाव और लैंगिक असमानता जैसी चुनौतियों से निपटने की प्रेरणा देगा।

सीएमएस की प्रबंध निदेशिका प्रो. गीता गांधी किंगडन ने कहा कि जब धार्मिक शिक्षाएं मानवीय गरिमा, न्याय और महिलाओं के सम्मान को सर्वोच्च स्थान देती हैं, तब आस्था समाज में सकारात्मक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बन जाती है।
सम्मेलन से पहले आयोजित प्रेस वार्ता में देश-विदेश से आए विद्वानों ने कहा कि धर्म यदि करुणा, न्याय और मानवीय गरिमा के मूल्यों पर आधारित हो, तो वह लैंगिक समानता और समावेशी समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
कार्यक्रम में महर्षि भृगुपीठाधीश्वर महामंडलेश्वर गोस्वामी सुशील जी महाराज, जगद्गुरु स्वामी सतीशाचार्य जी महाराज, मिस्र के सुप्रीम कॉन्स्टिट्यूशनल कोर्ट के डिप्टी चीफ जस्टिस डॉ. आदिल ओमर शरीफ, अमेरिका से डॉ. डेविड ई. रिस्ले, परमजीत सिंह चंडोक, मौलाना मोहम्मद अजाजुर रहमान शाहीन कासमी, आचार्य येशी फुंसोक, फादर सेबेस्टियन कोलीथानम, शैलेन्द्र जैन और भिक्षु ज्ञानलोक सहित कई प्रमुख हस्तियां उपस्थित रहीं।
सम्मेलन की संयोजिका एवं सीएमएस प्रधानाचार्या ख्याति लांबा ने बताया कि सम्मेलन का उद्देश्य युवाओं में लैंगिक समानता और वैश्विक नागरिकता की भावना को मजबूत करना है। वहीं सीएमएस के हेड कम्युनिकेशंस ऋषि खन्ना ने बताया कि विभिन्न विषयों पर तकनीकी सत्र 25 जुलाई सुबह 9 बजे से सीएमएस कानपुर रोड ऑडिटोरियम में आयोजित किए जाएंगे।