ग्राहम स्टेंस हत्याकांड: 10 और 6 साल के बच्चों को जिंदा जलाने की वो रात, 27 साल बाद फिर चर्चा में दारा सिंह

22 जनवरी 1999 की वो रात, जब तीन जिंदगियां खत्म हो गईं

ग्राहम स्टेंस हत्याकांड में दारा सिंह की समयपूर्व रिहाई की याचिका
: 1999 के ग्राहम स्टेंस हत्याकांड में दोषी दारा सिंह की समयपूर्व रिहाई की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है।

नई दिल्ली/अमर भारती। ग्राहम स्टेंस हत्याकांड 10 साल के फिलिप और 6 साल के टिमोथी की उम्र इतनी कम थी कि उनकी दुनिया स्कूल, खेल और छुट्टियों तक सीमित थी। लेकिन 22-23 जनवरी 1999 की रात ओडिशा के क्योंझर जिले के मनोहरपुर गांव में हुई एक घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया। ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस अपने दोनों बेटों के साथ एक स्टेशन वैगन में सो रहे थे। रात में भीड़ ने वाहन को घेर लिया और उसमें आग लगा दी। तीनों की मौत हो गई।

27 साल बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में है। वजह है मुख्य दोषी दारा सिंह उर्फ रवींद्र कुमार पाल की समयपूर्व रिहाई की याचिका। सुप्रीम कोर्ट ने 19 अगस्त 2026 को ओडिशा सरकार को इस मामले में फैसला लेने का अंतिम मौका दिया है।

कौन थे ग्राहम स्टेंस?

ग्राहम स्टुअर्ट स्टेंस ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड में जन्मे थे और 1965 में भारत आए थे। उन्होंने ओडिशा में अपना लंबा समय आदिवासी और गरीब समुदायों के बीच सामाजिक सेवा में बिताया। खास तौर पर वे कुष्ठ रोगियों के बीच किए गए अपने काम के लिए जाने जाते थे। मयूरभंज क्षेत्र में उन्होंने लंबे समय तक कुष्ठ रोगियों की सेवा की और मयूरभंज लेप्रसी होम से जुड़े रहे। उनकी पत्नी ग्लैडिस स्टेंस और तीन बच्चे थे—बेटी एस्थर तथा बेटे फिलिप और टिमोथी।

ग्राहम स्टेंस हत्याकांड कैसे हुआ?

जनवरी 1999 में ग्राहम स्टेंस अपने दोनों बेटों के साथ मनोहरपुर पहुंचे थे। वे एक ईसाई कार्यक्रम में शामिल होने के सिलसिले में वहां थे। 22 जनवरी की रात तीनों अपनी स्टेशन वैगन में सो गए। जांच के मुताबिक, इसी दौरान दारा सिंह के नेतृत्व में लोगों का एक समूह वहां पहुंचा। भीड़ ने वाहन को घेर लिया और उस पर हमला किया। इसके बाद वाहन में आग लगा दी गई। ग्राहम स्टेंस हत्याकांड और उनके दोनों बेटों के पास बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा। कुछ ही देर में वाहन आग की लपटों में घिर गया और तीनों की मौत हो गई। घटना की भयावहता ने पूरे देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आक्रोश पैदा किया।

दारा सिंह तक कैसे पहुंची जांच?

मामले की जांच में दारा सिंह उर्फ रवींद्र कुमार पाल को मुख्य आरोपी बनाया गया। न्यायमूर्ति डी.पी. वाधवा की अध्यक्षता में गठित आयोग ने भी दारा सिंह को हत्याकांड का मुख्य सूत्रधार माना था। वाधवा आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि दारा सिंह ने ईसाई मिशनरियों के खिलाफ अपने विचारों के चलते हमले की योजना बनाई थी। ग्राहम स्टेंस हत्याकांड को लेकर आयोग ने यह भी कहा कि ग्राहम स्टेंस की हत्या के पीछे धर्म के प्रति कट्टर सोच एक प्रमुख कारण थी।

क्या हत्या की वजह धर्मांतरण थी?

हत्याकांड के बाद ग्राहम स्टेंस पर आदिवासियों के धर्मांतरण के आरोप लगाए गए थे। यही आरोप इस पूरे विवाद के केंद्र में रहा। हालांकि, जांच के दौरान ग्राहम स्टेंस के व्यक्तिगत रूप से जबरन धर्मांतरण कराने का कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया। वाधवा आयोग से जुड़े रिकॉर्ड में भी यह बात सामने आई कि क्षेत्र में ईसाई धर्म अपनाने की घटनाएं थीं, लेकिन ग्राहम स्टेंस के व्यक्तिगत रूप से धर्मांतरण कराने का प्रमाण नहीं मिला।

वहीं, अलग-अलग संगठनों और जांचों ने इस मामले की व्यापक सांप्रदायिक पृष्ठभूमि और धर्मांतरण को लेकर उस समय बने तनाव पर अलग-अलग सवाल उठाए थे। इसलिए इस हत्याकांड की वजह को सिर्फ एक पहलू तक सीमित करके देखना उचित नहीं होगा।

2003 में दारा सिंह को सुनाई गई मौत की सजा

दारा सिंह को जनवरी 2000 में गिरफ्तार किया गया। बाद में सीबीआई अदालत ने 2003 में उसे ग्राहम स्टेंस और उनके दोनों बेटों की हत्या के मामले में दोषी ठहराया और मौत की सजा सुनाई। इसके बाद मामला उड़ीसा हाई कोर्ट पहुंचा। हाई कोर्ट ने दारा सिंह की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया। कुछ अन्य आरोपियों को भी राहत मिली, जबकि महेंद्र हेम्ब्रम की उम्रकैद की सजा बरकरार रही।

2011 में सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद बरकरार रखी

मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। वर्ष 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने दारा सिंह की मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने के हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। शीर्ष अदालत ने अपराध को बेहद गंभीर और निंदनीय माना, लेकिन इसे मौत की सजा के लिए ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी का मामला नहीं माना। इस तरह दारा सिंह की मौत की सजा उम्रकैद में बदल गई।

25 साल जेल काटने के बाद रिहाई की मांग

दारा सिंह ने जेल में 25 साल से ज्यादा समय बिताने का हवाला देते हुए समयपूर्व रिहाई की मांग की। उसकी ओर से दलील दी गई कि जेल में लंबे समय तक रहने और कथित पश्चाताप को देखते हुए उसे सजा में छूट दी जानी चाहिए। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा सरकार को उसकी रिहाई की याचिका पर निर्णय लेने के लिए समय दिया था। जुलाई 2026 में अदालत ने सरकार से 19 अगस्त तक निर्णय लेने की अपेक्षा जताई थी।

ग्लैडिस स्टेंस ने हत्यारों को माफ किया

ग्राहम स्टेंस की पत्नी ग्लैडिस स्टेंस ने अपने पति और दोनों बेटों की हत्या के बाद भी ओडिशा में सामाजिक सेवा का काम जारी रखा। उन्होंने सार्वजनिक रूप से हत्यारों को माफ करने की बात कही थी। उनके सामाजिक कार्यों के लिए वर्ष 2005 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

19 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

इस मामले में 19 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। अदालत को बताया गया कि ओडिशा की संबंधित Sentence Review Board ने अभी तक दारा सिंह की समयपूर्व रिहाई पर फैसला नहीं किया है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई और ओडिशा सरकार को एक और मौका दिया। अदालत ने कहा कि अगर राज्य सरकार फैसला नहीं करती है तो अदालत खुद इस मामले में निर्णय ले सकती है। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 2 सितंबर 2026 की तारीख तय की है। यानी अब इस 27 साल पुराने हत्याकांड में दारा सिंह की संभावित रिहाई का फैसला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में है।

दारा सिंह की रिहाई का विरोध क्यों हो रहा है?

दारा सिंह की समयपूर्व रिहाई की संभावना के बीच ओडिशा के वामपंथी दलों ने इसका विरोध किया है। उनका तर्क है कि इतने गंभीर सांप्रदायिक अपराध के दोषी की रिहाई से न्याय व्यवस्था में लोगों का भरोसा प्रभावित हो सकता है। दूसरी ओर, दारा सिंह की ओर से लंबे समय तक जेल में रहने और कथित पश्चाताप को समयपूर्व रिहाई के पक्ष में आधार बनाया गया है। अब अंतिम फैसला ओडिशा सरकार की प्रक्रिया और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट के रुख पर निर्भर करेगा।

27 साल बाद भी क्यों याद किया जाता है स्टेंस हत्याकांड?

ग्राहम स्टेंस और उनके दोनों बेटों की हत्या भारतीय इतिहास की उन घटनाओं में शामिल है, जिसने धर्म, धर्मांतरण, सांप्रदायिक तनाव और कानून-व्यवस्था को लेकर देश में गहरी बहस छेड़ दी थी। इस मामले में अदालतों ने दारा सिंह की भूमिका और उसकी सजा पर फैसला दिया। वहीं, ग्राहम स्टेंस की पत्नी ग्लैडिस का क्षमा और सेवा का रास्ता चुनना भी इस त्रासदी की एक अलग मानवीय तस्वीर पेश करता है। आज 27 साल बाद दारा सिंह की समयपूर्व रिहाई का सवाल इस पुराने मामले को फिर सुर्खियों में ले आया है। अब नजर 2 सितंबर 2026 की अगली सुनवाई पर है।

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