Azam Khan News: जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों पर मंडरा रहा बुलडोजर का खतरा, आजम खान के पुराने ‘तनखैया’ अब करेंगे फैसला?

38 भवनों के ध्वस्तीकरण के खिलाफ मंडलायुक्त के यहां अपील

जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों के ध्वस्तीकरण के खिलाफ अपील
जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों के ध्वस्तीकरण आदेश के खिलाफ मंडलायुक्त न्यायालय में अपील दाखिल।

नई दिल्ली/अमर भारती। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और तत्कालीन रामपुर जिलाधिकारी आंजनेय कुमार सिंह के बीच 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान हुआ विवाद एक बार फिर चर्चा में है। उस समय आजम खान ने आंजनेय कुमार सिंह के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी करते हुए उन्हें ‘तनखैया’ कहा था। आज वही अधिकारी, जो अब मंडलायुक्त हैं, जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े एक अहम मामले में निर्णायक भूमिका में हैं।

दरअसल, रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने जौहर विश्वविद्यालय परिसर में बने 40 में से 38 भवनों को अवैध बताते हुए उनके ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया है। इस आदेश के खिलाफ विश्वविद्यालय प्रबंधन ने मंडलायुक्त के न्यायालय में अपील दायर की है। मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी।

विश्वविद्यालय प्रबंधन को मिला 20 दिन का समय

जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों को बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्मित बताए जाने के बाद RDA उपाध्यक्ष और रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया था। आदेश के तहत विश्वविद्यालय प्रबंधन को अपने स्तर पर भवनों को ध्वस्त करने के लिए 20 दिन का समय दिया गया है। यदि तय समय सीमा में कार्रवाई नहीं की जाती है, तो रामपुर विकास प्राधिकरण खुद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा। इस कार्रवाई में होने वाला खर्च भी विश्वविद्यालय प्रबंधन से वसूल किए जाने की बात कही गई है।

15 पेज की अपील में क्या दलील दी गई?

सोमवार को विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से अधिवक्ता जुनैद एजाज ने मंडलायुक्त के न्यायालय में RDA के आदेश के खिलाफ अपील दाखिल की। 15 पेज की अपील में विश्वविद्यालय प्रबंधन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को कानूनी आधार पर चुनौती दी है। अपील में कहा गया है कि विश्वविद्यालय जिस क्षेत्र में स्थित है, वह भवन निर्माण के समय ग्राम सींगनखेड़ा के अंतर्गत आता था और उस समय क्षेत्र ग्राम पंचायत के अधीन था।

विश्वविद्यालय प्रबंधन का तर्क है कि उस समय उत्तर प्रदेश जिला पंचायत एवं क्षेत्र पंचायत अधिनियम, 1961 के प्रावधान लागू थे। इसके तहत भवन निर्माण की अनुमति से जुड़े प्रावधान क्षेत्र पंचायत के स्तर पर थे। अपील में यह भी कहा गया है कि अनुमति न लेने की स्थिति में अधिकतम 500 रुपये के जुर्माने का प्रावधान था।

‘2018 में बन चुके थे भवन, बाद में बना RDA’

विश्वविद्यालय प्रबंधन ने अपनी अपील में रामपुर विकास प्राधिकरण के गठन की तारीख को भी अहम आधार बनाया है। दलील दी गई है कि RDA का गठन 27 सितंबर 2024 को हुआ, जबकि जौहर विश्वविद्यालय के भवन वर्ष 2018 में ही निर्मित हो चुके थे। अपील में कहा गया है कि बाद में गठित विकास प्राधिकरण को पहले से निर्मित भवनों के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने इसी आधार पर RDA के आदेश को निरस्त करने की मांग की है।

भूमि उपयोग को लेकर भी विश्वविद्यालय की दलील

अपील में भूमि उपयोग को लेकर भी तर्क दिया गया है। विश्वविद्यालय प्रबंधन का कहना है कि RDA के नोटिस में स्वयं भूमि को शैक्षिक गतिविधियों के लिए चिन्हित बताया गया है। जौहर विश्वविद्यालय परिसर में शैक्षिक गतिविधियां संचालित होने की बात कहते हुए प्रबंधन ने दावा किया है कि भूमि उपयोग के आधार पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई उचित नहीं है। विश्वविद्यालय की ओर से कहा गया है कि जिस उद्देश्य के लिए भूमि चिन्हित है, उसी उद्देश्य के लिए परिसर का इस्तेमाल किया जा रहा है।

हाई कोर्ट जाने का भी विकल्प खुला

सपा विधि प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष और अधिवक्ता कासिफ खान ने बताया कि मंडलायुक्त न्यायालय में दाखिल अपील पर सुनवाई के बाद यदि RDA का ध्वस्तीकरण आदेश निरस्त कर दिया जाता है, तो मामला वहीं समाप्त हो जाएगा। हालांकि, यदि मंडलायुक्त न्यायालय RDA के आदेश को सही ठहराता है, तो विश्वविद्यालय प्रबंधन के पास उच्च न्यायालय का रुख करने का विकल्प खुला रहेगा। अब सभी की नजर 28 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर है। इस सुनवाई में यह तय होगा कि जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों पर जारी ध्वस्तीकरण आदेश पर रोक लगेगी या RDA की कार्रवाई आगे बढ़ेगी।

यहां भी पढ़ें-

बंटी यादव हत्याकांड पर प्रशांत किशोर का सरकार पर हमला, बोले- पुलिस अपनी गलती छिपाने के लिए मृतक के चरित्र पर सवाल उठा रही

फर्टिलाइजर कंपनियों की मनमानी के खिलाफ एकजुट हुए खुदरा खाद व्यापारी, समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष का ऐलान