Sonam Wangchuk को दिल्ली हाई कोर्ट ने तुरंत मेदांता अस्पताल शिफ्ट करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि पसंद के अस्पताल में इलाज कराना अनुच्छेद 19 और 21 के तहत मौलिक अधिकार है।

नई दिल्ली/अमर भारती। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा आदेश दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि सोनम वांगचुक को तुरंत मेदांता अस्पताल ले जाया जाए। कोर्ट ने कहा कि उन्हें अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज कराने का अधिकार है और यह संविधान के अनुच्छेद 19 और अनुच्छेद 21 के तहत उनका मौलिक अधिकार है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो जब चाहें अपने पति से मुलाकात कर सकती हैं। इसके अलावा, मेदांता अस्पताल में सोनम वांगचुक के इलाज और स्वास्थ्य की निगरानी के लिए डॉक्टरों की एक कमेटी गठित की जाएगी।
कोर्ट में सोनम वांगचुक की मेडिकल रिपोर्ट पर हुई चर्चा
सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से मेदांता अस्पताल स्थानांतरित करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान उनकी मेडिकल रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा हुई। सोनम वांगचुक की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल ने मेडिकल रिपोर्ट का हवाला दिया। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने डॉक्टर से पूछा कि यूरिया और यूरिक एसिड का बढ़ा हुआ स्तर क्या संकेत देता है? क्या शरीर में एसिड का स्तर बढ़ना किसी गड़बड़ी का संकेत नहीं है? डॉक्टर ने बताया कि जब शरीर को ग्लूकोज नहीं मिलता तो ऊर्जा के लिए वह फैट का इस्तेमाल करता है। फैट के टूटने से शरीर में कीटोन बनने लगते हैं। कई दिनों तक उपवास या भूखे रहने की स्थिति में शरीर में इस तरह के बदलाव स्वाभाविक रूप से देखे जा सकते हैं।
एम्स के डॉक्टर ने स्वास्थ्य को लेकर जताई चिंता
सुनवाई के दौरान एम्स की ओर से पेश डॉक्टरों ने सोनम वांगचुक की मेडिकल रिपोर्ट पर चिंता जताई। डॉक्टरों ने बताया कि उनके शरीर में कई महत्वपूर्ण पैरामीटर सामान्य स्तर पर नहीं हैं। एम्स की ओर से कहा गया कि रिपोर्ट में WBC यानी सफेद रक्त कोशिकाओं का स्तर कम पाया गया है। डॉक्टर के मुताबिक, यह सामान्य स्थिति नहीं है। WBC का स्तर कम होने पर शरीर की प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो सकती है। डॉक्टरों ने यह भी बताया कि हीमोग्लोबिन, WBC और प्लेटलेट्स सामान्य रेंज में नहीं हैं। इसके अलावा, सोनम वांगचुक के शरीर में पोटैशियम का स्तर भी कम पाया गया है।
‘पोटैशियम की कमी का इलाज चल रहा है’
सुनवाई के दौरान एम्स के निदेशक ने कहा कि सोनम वांगचुक के पोटैशियम का स्तर कम है और उन्हें इसकी कमी पूरी करने के लिए दवा दी जा रही है। उन्होंने कहा कि उनका इलाज जारी है। डॉक्टर ने यह भी बताया कि संभावित संक्रमण से लड़ने की उनकी क्षमता कम हो सकती है। इसी वजह से अस्पताल में उनसे मिलने आने वाले लोगों के लिए गाउन, कैप और मास्क पहनना जरूरी किया गया है।
केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने भी मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि TLC यानी Total Leukocyte Count से जुड़ी स्थिति को डॉक्टरों ने गंभीर बताया है। उन्होंने संभावित स्वास्थ्य जोखिमों की ओर भी अदालत का ध्यान आकर्षित किया।
अखिल सिब्बल ने कहा- वांगचुक के वाइटल्स स्थिर
सोनम वांगचुक की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि फिलहाल उनके वाइटल्स स्थिर हैं। उन्होंने कहा कि कुछ मेडिकल पैरामीटर्स में बदलाव जरूर हुआ है, लेकिन डॉक्टरों की निगरानी जारी रखी जा सकती है। अखिल सिब्बल ने कहा कि सोनम वांगचुक की नियमित निगरानी में कोई आपत्ति नहीं है। उनका तर्क था कि बेहतर निगरानी और इलाज के लिए उन्हें उनकी पसंद के अस्पताल में स्थानांतरित किया जाना चाहिए।
मेदांता शिफ्ट करने पर केंद्र को कोई आपत्ति नहीं
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने सोनम वांगचुक को मेदांता अस्पताल स्थानांतरित करने का सुझाव दिया। इस पर केंद्र सरकार की ओर से पेश एएसजी ने कहा कि उन्हें स्थानांतरण पर कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि, एएसजी ने स्पष्ट किया कि सोनम वांगचुक को डॉक्टरों की मेडिकल सलाह के बिना अस्पताल से छुट्टी नहीं दी जा सकती। इसके बाद अदालत ने सोनम वांगचुक को मेदांता अस्पताल ले जाने का आदेश दिया।
मेदांता में बनेगा डॉक्टरों का पैनल
अदालत ने निर्देश दिया कि सफदरजंग अस्पताल में सोनम वांगचुक के इलाज से जुड़ी सभी मेडिकल रिपोर्ट और जानकारी तत्काल मेदांता अस्पताल को उपलब्ध कराई जाए। मेदांता अस्पताल के निदेशक को डॉक्टरों का एक पैनल गठित करने का निर्देश दिया गया है। यह पैनल सोनम वांगचुक के इलाज और स्वास्थ्य की निगरानी करेगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो जब चाहें उनसे मिल सकती हैं। अदालत का यह आदेश ऐसे समय आया है जब सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य और उनके लंबे उपवास को लेकर लगातार चिंता जताई जा रही थी।
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