KGMU में दुर्लभ बीमारी का हुआ सफल उपचार: 11 वर्षीय बच्चे की रोबोटिक सर्जरी से मिली नई जिंदगी

लखनऊ। लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग ने एक जटिल और दुर्लभ बीमारी से पीड़ित 11 वर्षीय बच्चे का सफलतापूर्वक रोबोटिक सर्जरी के माध्यम से उपचार कर नई मिसाल पेश की है। कानपुर के पडीलालपुर निवासी गौरव का 11 वर्षीय बेटा लंबे समय से कोलेडोकल सिस्ट नामक जन्मजात बीमारी से ग्रसित था। परिजनों के अनुसार बच्चे का उपचार कानपुर और लखनऊ के कई अस्पतालों में कराया गया, लेकिन बीमारी का स्थायी समाधान नहीं मिल सका। अखिरकार 5 मई 2026 को बच्चे को केजीएमयू के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया।

जटिलता को देखते हुए विशेषज्ञों ने सुझाई रोबोटिक सर्जरी

मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए विभाग द्वारा तत्काल प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराई गई और आवश्यक जांचें कराई गईं। जांच रिपोर्टों के आधार पर प्रो. जेडी रावत के नेतृत्व वाली टीम ने मरीज के अभिभावकों को रोबोटिक तकनीक से सर्जरी कराने की सलाह दी। विभाग के अनुसार पीडियाट्रिक सर्जरी में जटिल बीमारियों के इलाज के लिए रोबोटिक सर्जरी की सुविधा अपेक्षाकृत कम खर्च में उपलब्ध कराई जा रही है।

26 मई को हुआ सफल ऑपरेशन, 4 जून को स्वस्थ होकर डिस्चार्ज

चिकित्सकों की टीम ने 26 मई 2026 को रोबोटिक तकनीक की मदद से बच्चे का सफल ऑपरेशन किया। कोलेडोकल सिस्ट पित्त नलिकाओं (बाइल डक्ट्स) से जुड़ी एक दुर्लभ जन्मजात बीमारी है। यदि इसका समय पर उपचार न किया जाए तो लीवर से संबंधित गंभीर जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं। इस सर्जरी में असामान्य पित्त नलिका को हटाकर लीवर से आंत तक पित्त के प्रवाह के लिए नया मार्ग तैयार किया जाता है।

रोबोटिक तकनीक के उपयोग से सर्जिकल टीम को अत्यंत छोटे चीरे लगाकर अधिक स्पष्टता और सूक्ष्म सटीकता के साथ ऑपरेशन करने में मदद मिली। विशेषज्ञों के अनुसार पारंपरिक ओपन सर्जरी की तुलना में इस तकनीक से ऑपरेशन के बाद दर्द कम होता है, रक्तस्राव न्यूनतम रहता है और मरीज तेजी से स्वस्थ होता है। सफल सर्जरी के बाद बच्चे की रिकवरी लगातार बेहतर रही और पूर्ण रूप से स्वस्थ होने पर उसे 4 जून 2026 को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

विशेषज्ञ टीम ने निभाई अहम भूमिका

इस जटिल ऑपरेशन को सफल बनाने में प्रो. जेडी रावत के साथ डॉ. सुधीर सिंह, डॉ. गुरमीत सिंह, डॉ. कृति पटेल और डॉ. कृतिका की महत्वपूर्ण भूमिका रही। नर्सिंग स्टाफ में रीता, संजय और रिंकेश ने मरीज की देखभाल में सहयोग दिया। वहीं एनेस्थीसिया विभाग की ओर से डॉ. आयुषी बग्गा ने ऑपरेशन के दौरान अहम जिम्मेदारी निभाई।

कुलपति ने दी पूरी टीम को बधाई

केजीएमयू की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने इस सफल सर्जरी पर पूरी चिकित्सकीय टीम को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय लगातार आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के माध्यम से मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।