किसी के काम जो आए उसे इंसान कहते हैं, पराया दर्द जो अपनाए उसे इंसान कहते हैं।

निघासन।हम बात करते हैं निघासन तहसील क्षेत्र के झंडी स्टेट के निवासी राजा राजराजेश्वर सिंह की जो कि लंबे समय से निघासन क्षेत्र की समस्याओं को लेकर काफ़ी सक्रिय रहते हैं, आम जनमानस का कहना है कि क्षेत्र में बाढ़ हो या जलभराव, गरीब परिवार की मदद हो या गांव की कोई स्थानीय समस्या, जरूरतमंद लोग अपनी बात लेकर उनके पास पहुंचते रहे हैं और उन सबकी समस्याओं का यथोचित निस्तारण होता है, साथ ही अपने स्तर से मदद और सूबे के मुख्यमंत्री से लेकर संबंधित अधिकारियों तक समस्या पहुंचाने का प्रयास कर समस्याओ से निजात दिलवाने में भी सहायक होते हैं।
निघासन क्षेत्र में हर वर्ष बाढ़ और जलभराव बड़ी समस्या बनकर सामने आता है ऐसी स्थिति में राजा राजराजेश्वर सिंह की ओर से प्रभावित गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों की मदद, भोजन और आवश्यक सामग्री की व्यवस्था कराने के प्रयास किए जाते रहे हैं।
शारदा नदी और जलनिकासी की समस्या पर लगातार पैरवी
क्षेत्र में शारदा नदी के पानी और उसके जलनिकासी की समस्या लंबे समय से ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण रही है। इसे लेकर भी राजा राजराजेश्वर सिंह पिछले करीब दस वर्षों से लगातार अधिकारियों के समक्ष समस्या उठाते और समाधान की मांग करते रहे हैं। बाढ़ और जलभराव से स्थायी राहत के लिए नालों, पुल-पुलियों और जलनिकासी व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत पर भी उन्होंने समय-समय पर आवाज उठाई है।
ढखेरवा खालसा के रपटा पुल पर सुरक्षा का मुद्दा

ढखेरवा खालसा गांव में बने रपटा पुल पर हादसों की घटनाओं के बाद सुरक्षा रेलिंग की मांग भी उठी। बताया जाता है कि इस संबंध में राजा राजराजेश्वर सिंह ने जिलाधिकारी से लेकर खंड विकास अधिकारी तक अधिकारियों से मुलाकात कर सुरक्षा रेलिंग की व्यवस्था कराने के लिए प्रयास किया। और जब तक बन नहीं गई तब तक प्रयास जारी रखा, नतीजा यह है कि आज रपटा पुल पर सुरक्षा रेलिंग बनकर तैयार है, जब से रेलिंग बनी है तब से कोई भी अप्रिय घटना नहीं हुई है। जिसकी ग्रामीणों ने सरहाना भी की।
ग्रामीणों के लिए किसी छोटी दिखने वाली समस्या का समाधान भी उनके लिए महत्वपूर्ण है—यही जनप्रतिनिधित्व की बुनियादी सोच होनी चाहिए।

गरीब परिवारों की बेटियों की शादी में भी मदद

राजा राजराजेश्वर सिंह के सामाजिक कार्यों में गरीब परिवारों की मदद भी शामिल रही है। जरूरतमंद परिवारों में शादी-विवाह के अवसर पर आर्थिक एवं अन्य सहयोग किए जाने की बातें क्षेत्र में अक्सर सामने आती रही हैं। समर्थकों का कहना है कि यह मदद राजनीतिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रही, बल्कि लंबे समय से सामाजिक सरोकार के रूप में होती रही है।