NEET पेपर लीक और परीक्षा में नकल के खिलाफ देशभर में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार अब सख्त कदम उठाने की तैयारी में है।

नई दिल्ली/अमर भारती। दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का धरना-प्रदर्शन जारी है और इसी बीच केंद्र सरकार पेपर लीक के मामलों पर लगाम लगाने के लिए मौजूदा कानून में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। माना जा रहा है कि शुक्रवार दोपहर होने वाली केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में पेपर लीक और नकल के खिलाफ प्रस्तावित संशोधनों को मंजूरी मिल सकती है।
सरकार की योजना सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल और पेपर लीक को रोकने के लिए मौजूदा कानून को और अधिक सख्त बनाने की है। सूत्रों के मुताबिक, संशोधन विधेयक को संसद के आगामी कामकाज में जल्द पेश किया जा सकता है और सरकार इसे जल्द से जल्द पारित कराने की कोशिश करेगी।
पेपर लीक पर केंद्र सरकार का बड़ा प्लान
केंद्र सरकार सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 को और प्रभावी बनाने की तैयारी में है। प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश्य पेपर लीक, नकल, संगठित गिरोह और परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी करने वालों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है। सूत्रों के मुताबिक, नए प्रावधानों में न सिर्फ सजा की अवधि बढ़ाने की योजना है, बल्कि आर्थिक दंड को भी कई गुना बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा ऐसे मामलों की जल्द सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों की स्थापना का प्रावधान भी किया जा सकता है। इसका सीधा मतलब यह है कि पेपर लीक जैसे मामलों में जांच और कानूनी कार्रवाई को लंबा खिंचने से रोकने के लिए सरकार एक तेज न्यायिक प्रक्रिया तैयार करना चाहती है।
मौजूदा कानून में क्या हैं सजा के प्रावधान?
वर्तमान में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों से जुड़े अपराधों के लिए सख्त सजा का प्रावधान है। अगर कोई व्यक्ति प्रश्नपत्र या परीक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी को लीक करने का दोषी पाया जाता है, तो उसे 3 से 5 साल तक की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
वहीं, अगर पेपर लीक किसी संगठित गिरोह, नेटवर्क या समूह के जरिए किया जाता है, तो दोषियों के खिलाफ और कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। ऐसे मामलों में 5 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 1 करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसियों या सर्विस प्रोवाइडर्स की जिम्मेदारी भी तय की गई है। यदि किसी एजेंसी या सेवा प्रदाता को परीक्षा में संभावित अपराध या गड़बड़ी की जानकारी होती है और वह समय रहते इसकी सूचना नहीं देता, तो उस पर भी 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
प्रस्तावित संशोधन में क्या बदल सकता है?
अब केंद्र सरकार मौजूदा कानून को और सख्त बनाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित संशोधनों के तहत पेपर लीक में शामिल आरोपियों के लिए जेल की अवधि और जुर्माने की राशि दोनों को बढ़ाया जा सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, गंभीर मामलों में सजा की न्यूनतम अवधि को बढ़ाकर 10 साल तक किए जाने और जुर्माने की राशि को 1 करोड़ रुपये या उससे अधिक करने का प्रस्ताव हो सकता है। हालांकि, प्रस्तावित बदलावों की अंतिम तस्वीर कैबिनेट की मंजूरी और संसद में पेश किए जाने के बाद ही साफ होगी। माना जा रहा है कि सरकार पेपर लीक के मामलों में शामिल संगठित नेटवर्क, बिचौलियों और परीक्षा प्रणाली से जुड़े दोषी लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का रास्ता और मजबूत करना चाहती है।
जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन जारी
पेपर लीक के मुद्दे पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों और प्रदर्शनकारियों का विरोध लगातार जारी है। प्रदर्शनकारी परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, पेपर लीक की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इसी बीच केंद्र सरकार की ओर से कानून में संशोधन की तैयारी को बेहद अहम कदम माना जा रहा है। अब सबकी नजर शुक्रवार को होने वाली कैबिनेट बैठक पर है। अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो संसद में संशोधन विधेयक पेश किया जा सकता है।
यानी NEET पेपर लीक विवाद के बीच केंद्र सरकार अब कानून का शिकंजा और कसने की तैयारी में है। सवाल यही है कि क्या सख्त कानून और फास्ट ट्रैक अदालतें पेपर लीक के बढ़ते मामलों पर पूरी तरह लगाम लगा पाएंगी?
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