
लखनऊ। आम आदमी पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रभारी और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों के ध्वस्तीकरण के आदेश पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संजय सिंह ने लखनऊ में जारी एक बयान में भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मोदी और योगी सरकार देश की आने वाली पीढ़ियों को शिक्षा से वंचित कर उन्हें अनपढ़ और जाहिल बनाए रखना चाहती है। उन्होंने देश के सरकारी स्कूलों की जर्जर हालत और बंद होते शिक्षण संस्थानों का हवाला देते हुए कहा कि एक तरफ बुनियादी शिक्षा खत्म की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ स्थापित विश्वविद्यालयों को राजनीतिक द्वेष के चलते नष्ट किया जा रहा है।
राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने जौहर यूनिवर्सिटी के ध्वस्तीकरण के आदेश को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि यह कार्रवाई दर्शाती है कि सरकार को शिक्षा और ज्ञान के केंद्रों से कितनी नफरत है। उन्होंने कहा कि जिस देश में शिक्षा को बढ़ावा मिलना चाहिए, वहां राजनीतिक प्रतिशोध के कारण एक विश्वविद्यालय को तोड़ने की तैयारी की जा रही है। संजय सिंह के अनुसार, यह सिर्फ एक इमारत गिराने का मामला नहीं है, बल्कि यह उन हजारों छात्रों के भविष्य पर हमला है जो वहां शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं या करने वाले थे।
एक शिक्षक के भरोसे चल रहे सवा लाख स्कूलों पर जताई चिंता
आप सांसद संजय सिंह ने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आज देश के 1.20 लाख सरकारी स्कूलों की हालत यह है कि वहां पूरी व्यवस्था मात्र एक शिक्षक के भरोसे टिकी है। उन्होंने सवाल किया कि क्या एक अकेला शिक्षक पांच कक्षाओं के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दे सकता है? संजय सिंह ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को आईसीयू में पहुंचाकर सरकार अब उच्च शिक्षण संस्थानों को ध्वस्त करने का जश्न मना रही है, जो किसी भी लोकतांत्रिक समाज के लिए शर्मनाक है।
बेटियों के लिए टॉयलेट की कमी और बुनियादी सुविधाओं का अभाव
संजय सिंह ने महिला सशक्तिकरण के दावों की पोल खोलते हुए कहा कि देश के 98 हजार स्कूलों में आज भी बच्चियों के लिए टॉयलेट का इंतजाम नहीं है। उन्होंने कहा कि “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” का नारा देने वाली सरकार जमीनी स्तर पर बुनियादी सुविधाएं तक मुहैया नहीं करा पा रही है। जब स्कूलों में मूलभूत ढांचे का अभाव है, तब सरकार का पूरा ध्यान सिर्फ विपक्षी नेताओं द्वारा बनवाए गए संस्थानों को नष्ट करने पर लगा हुआ है।