69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षण को लेकर शिक्षा मंत्री के आवास पर प्रदर्शन, अभ्यर्थियों ने पारदर्शी चयन सूची की उठाई मांग

लखनऊ। 69 हजार शिक्षक भर्ती में कथित आरक्षण घोटाले के विरोध में शुक्रवार को बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने उत्तर प्रदेश के शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण के नियमों का निष्पक्ष पालन सुनिश्चित करने और पिछड़े व दलित वर्ग के अभ्यर्थियों को उनका संवैधानिक अधिकार दिलाने की मांग की। आंदोलन के दौरान पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर ईको गार्डन भेज दिया।

एफिडेविट में बाहरी अभ्यर्थियों को शामिल करने का आरोप

प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का आरोप है कि 21 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से न्यायालय में प्रस्तुत एफिडेविट में लगभग 5,000 बाहरी अभ्यर्थियों को शामिल कर लिया गया, जबकि पहले जारी 6,800 अभ्यर्थियों की सूची में शामिल करीब 2,500 अभ्यर्थियों को बाहर कर दिया गया। अभ्यर्थियों का कहना है कि इस बदलाव से भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं और इससे पात्र अभ्यर्थियों के हित प्रभावित हुए हैं।

नई सूची बनाने की मांग, आरक्षण नियमों के पालन पर जोर

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमरेन्द्र पटेल ने कहा कि सरकार को पूरी चयन सूची पारदर्शी और न्यायपूर्ण तरीके से दोबारा तैयार करनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि पहले जारी 6,800 अभ्यर्थियों की सूची को आधार बनाकर नियमानुसार नई सूची तैयार की जाए तथा आरक्षण और कटऑफ के नियमों का निष्पक्ष पालन सुनिश्चित किया जाए। उनका कहना था कि सामान्य वर्ग की मेरिट और ओबीसी की निर्धारित कटऑफ के बीच ऐसे अभ्यर्थियों को सूची से हटाया जाए, जो आरक्षण नियमों के अनुरूप पात्र नहीं हैं, ताकि वास्तविक रूप से पात्र पिछड़े और दलित अभ्यर्थियों को न्याय मिल सके।

संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई जारी रहेगी

अमरेन्द्र पटेल ने कहा कि यदि सरकार अभ्यर्थियों की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती और भर्ती सूची में न्यायपूर्ण संशोधन नहीं किया जाता, तो 69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षण के अधिकार की लड़ाई को और व्यापक स्तर पर जारी रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल रोजगार का नहीं, बल्कि संविधान प्रदत्त आरक्षण, सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा का आंदोलन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सभी पात्र अभ्यर्थियों को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।