राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: 7 करोड़ की कथित हेराफेरी से इस्तीफों तक, जानिए पूरा घटनाक्रम और अब तक की कार्रवाई?

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले में SIT जांच के बाद 8 गिरफ्तारियां, 79 लाख रुपये बरामद और चंपत राय का इस्तीफा। जानिए 7 जून से 26 जून 2026 तक की पूरी टाइमलाइन और राजनीतिक प्रतिक्रिया।

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले में SIT जांच और गिरफ्तारियां
राम मंदिर दान मामले में SIT रिपोर्ट के बाद 8 गिरफ्तारियां और 79 लाख रुपये की बरामदगी

नई दिल्ली/अमर भारती। अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और बहुमूल्य वस्तुओं में कथित अनियमितताओं का मामला अब राष्ट्रीय स्तर की बड़ी राजनीतिक और धार्मिक बहस बन चुका है। मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट के बाद पुलिस ने 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके पास से लगभग 79 लाख रुपये की बरामदगी का दावा किया है। वहीं, जांच के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफों ने मामले को और चर्चा में ला दिया है। सरकार का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ रही है, जबकि विपक्ष लगातार इस मुद्दे को लेकर सरकार और ट्रस्ट पर सवाल उठा रहा है।

7 जून: पहली बार सामने आया मामला

राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण पहली बार 7 जून 2026 को चर्चा में आया, जब अयोध्या के पूर्व विधायक पवन पांडे ने आरोप लगाया कि मंदिर को प्राप्त करोड़ों रुपये के चढ़ावे में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने दावा किया कि 7 करोड़ रुपये से अधिक की राशि और अन्य बहुमूल्य सामग्री का हिसाब मेल नहीं खा रहा है। इसके बाद समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी मामले को उठाते हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि यह मामला करोड़ों रामभक्तों की आस्था से जुड़ा है और इसकी पारदर्शी जांच आवश्यक है।

8-9 जून: CBI जांच की मांग तेज

सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में मामला तेजी से चर्चा का विषय बन गया। भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग की। इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने राम मंदिर ट्रस्ट से पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तलब की। राम मंदिर चढ़ावा मामला 2026 में नये अपडेट सामने आ रहे हैं।

10-12 जून: ट्रस्ट ने आरोपों को बताया निराधार

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मंदिर में प्राप्त दान की गिनती बैंकिंग मानकों और निगरानी व्यवस्था के तहत की जाती है। महासचिव चंपत राय ने कहा कि नकदी की गिनती भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की निगरानी में होती है और किसी भी प्रकार की हेराफेरी की संभावना नहीं है।

13 जून: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बनाई SIT

मामले के बढ़ते राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) के गठन को मंजूरी दी। सरकार ने जांच टीम को 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया।

14 से 18 जून: गहन जांच और दस्तावेजों की पड़ताल

SIT ने मंदिर परिसर, सुरक्षा व्यवस्था, दान प्रबंधन प्रणाली, बैंक रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज की जांच शुरू की। जांच के दौरान टीम ने ट्रस्ट के पदाधिकारियों, कर्मचारियों और दान प्रबंधन से जुड़े लोगों से पूछताछ की। कई वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक दस्तावेज और डिजिटल डेटा अपने कब्जे में लेकर उनकी फॉरेंसिक जांच शुरू की गई। जांच के दौरान नकदी, आभूषण और कथित तौर पर कुछ कीमती धातुओं से जुड़े रिकॉर्ड में विसंगतियां मिलने की बात सामने आई, जिसकी पुष्टि के लिए आगे की जांच जारी रखी गई।

19 जून: योगी आदित्यनाथ की पहली प्रतिक्रिया

अयोध्या दौरे के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा, “500 साल इंतजार किया है, कुछ दिन और इंतजार कर लीजिए। जांच में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।”

23-24 जून: SIT ने सरकार को सौंपी रिपोर्ट

करीब दो सप्ताह की जांच के बाद SIT ने अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी। सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में दान प्रबंधन प्रणाली में कई सुधारात्मक सुझाव दिए गए और कुछ व्यक्तियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हुआ।

25 जून: पहली FIR और 8 गिरफ्तारियां

SIT रिपोर्ट के आधार पर रामजन्मभूमि थाना में पहली एफआईआर दर्ज की गई। शिकायत में धोखाधड़ी, चोरी और आपराधिक विश्वासघात सहित कई गंभीर धाराएं लगाई गईं। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 8 लोगों को गिरफ्तार किया।

गिरफ्तार किए गए लोगों में:

  • लवकुश मिश्रा
  • अनुकल्प मिश्रा
  • रमाशंकर यादव (टिन्नू यादव)
  • मनीष यादव
  • रमाशंकर मिश्रा
  • अविनाश शुक्ला
  • सुभाष
  • करुणेश

शामिल बताए गए हैं। पुलिस के अनुसार आरोपियों के पास से लगभग 79 लाख रुपये बरामद किए गए हैं। बरामद राशि और अन्य साक्ष्यों की जांच जारी है।

26 जून: चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा

जांच के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। हालांकि दर्ज एफआईआर में दोनों के नाम शामिल नहीं हैं, लेकिन SIT उनसे पूछताछ कर चुकी है। प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही के लिहाज से इन इस्तीफों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विपक्ष का हमला और सरकार का जवाब

अखिलेश यादव का आरोप

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि यह मामला भाजपा के दावों और वास्तविकता के बीच अंतर को उजागर करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

अरविंद केजरीवाल का बयान

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने SIT जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल जांच समिति बना देने से जनता के मन में उठ रहे सवाल खत्म नहीं होंगे। उन्होंने पूरे मामले की पारदर्शी जांच की मांग की।

सरकार का जवाब

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्षी आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि सरकार ने शुरुआत से ही जांच का समर्थन किया और रिपोर्ट मिलते ही कार्रवाई शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास अतिरिक्त सबूत हैं तो वे जांच एजेंसियों को सौंपें।

अब आगे क्या?

  • गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है।
  • बरामद धनराशि की जांच की जा रही है।
  • वित्तीय रिकॉर्ड और बैंक लेनदेन की फॉरेंसिक जांच चल रही है।
  • SIT की अंतिम रिपोर्ट के आधार पर और गिरफ्तारियां संभव हैं।
  • ट्रस्ट की दान प्रबंधन व्यवस्था में बड़े बदलाव किए जा सकते हैं।
  • सरकार मंदिरों में डिजिटल ऑडिट और पारदर्शिता बढ़ाने के नए मानक लागू कर सकती है।

राम मंदिर चढ़ावा मामला केवल कथित वित्तीय अनियमितता का मामला नहीं है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, दान प्रबंधन की पारदर्शिता और धार्मिक संस्थाओं की जवाबदेही से भी जुड़ा हुआ है। SIT जांच के बाद हुई गिरफ्तारियां और शीर्ष स्तर पर हुए इस्तीफे इस बात का संकेत हैं कि मामला गंभीरता से लिया जा रहा है। अब पूरे देश की नजर जांच के अगले चरण और अंतिम निष्कर्ष पर टिकी हुई है।

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