Reservation Hatao Andolan: सोशल मीडिया पर तेजी से बढ़ रहा ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’, 56 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स

Reservation Hatao Andolan सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इंस्टाग्राम पर 56 लाख से अधिक फॉलोअर्स वाले इस अभियान की मांग जाति आधारित आरक्षण खत्म करने की है।

रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन का सोशल मीडिया अभियान और बढ़ती लोकप्रियता
सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हो रहा ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ आरक्षण नीति पर नई बहस छेड़ रहा है।

नई दिल्ली/अमर भरती। नीट पेपर लीक और शिक्षा सुधार के मुद्दे पर चर्चा के केंद्र में आई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) की सफलता के बाद अब सोशल मीडिया पर कई नए मुद्दा-आधारित अभियान उभरने लगे हैं। इन्हीं में से एक है ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ (Reservation Hatao Andolan – RHA), जो जाति आधारित आरक्षण के खिलाफ ऑनलाइन समर्थन जुटा रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से लोकप्रिय हो रहे इस अभियान ने आरक्षण नीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। समर्थक इसे समान अवसर और योग्यता आधारित व्यवस्था की मांग बता रहे हैं, जबकि आलोचक इसे सामाजिक न्याय के खिलाफ कदम मान रहे हैं।

इंस्टाग्राम पर 56 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स

‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ ने बहुत कम समय में सोशल मीडिया पर बड़ी मौजूदगी दर्ज कराई है। अभियान के इंस्टाग्राम अकाउंट पर 56 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं, जबकि एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इसके 17 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स बताए जा रहे हैं। यह समूह खुद को गैर-राजनीतिक और नागरिकों द्वारा संचालित आंदोलन बताता है। अभियान का दावा है कि उसका उद्देश्य जाति आधारित पहचान की राजनीति को समाप्त कर “एक राष्ट्र, एक पहचान – भारतीय” की भावना को मजबूत करना है।

क्या हैं आंदोलन की प्रमुख मांगें?

आरएचए का मुख्य उद्देश्य जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था को समाप्त करना बताया जा रहा है। आंदोलन से जुड़े लोग मानते हैं कि सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में अवसर योग्यता और आर्थिक स्थिति के आधार पर मिलने चाहिए।

अभियान की प्रमुख मांगों में शामिल हैं:

  • जाति आधारित आरक्षण समाप्त किया जाए।
  • सरकारी दस्तावेजों और आवेदन पत्रों में जाति पूछने की अनिवार्यता खत्म हो।
  • आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सहायता मिले।
  • दिव्यांग, अनाथ और शहीदों के बच्चों को विशेष आरक्षण दिया जाए।
  • सभी नागरिकों के लिए समान अवसर की व्यवस्था हो।

‘समानता, योग्यता, न्याय’ को बनाया आदर्श वाक्य

इस अभियान का लोगो “समानता, योग्यता, न्याय” (Equality, Merit, Justice) के सिद्धांत पर आधारित है। दिलचस्प बात यह है कि आरएचए अपने संदेशों में डॉ. भीमराव आंबेडकर के प्रसिद्ध नारे “शिक्षित बनो, संघर्ष करो, संगठित हो जाओ” का भी उपयोग करता है। आंदोलन का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी समुदाय का विरोध नहीं बल्कि अवसरों की समानता और नागरिकों की एक समान पहचान को बढ़ावा देना है।

आरक्षण पर क्यों छिड़ी नई बहस?

भारत में आरक्षण व्यवस्था सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए लागू की गई थी। वर्तमान में केंद्र स्तर पर आरक्षण की कुल सीमा 50 प्रतिशत मानी जाती है, हालांकि विभिन्न राज्यों और राजनीतिक दलों की ओर से इसे बढ़ाने की मांग समय-समय पर उठती रही है। ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ की बढ़ती लोकप्रियता ने एक बार फिर आरक्षण, सामाजिक न्याय, समान अवसर और योग्यता आधारित चयन जैसे मुद्दों को सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

समर्थक और विरोधी क्या कह रहे हैं?

आंदोलन के समर्थकों का तर्क है कि आज के दौर में अवसर योग्यता और आर्थिक स्थिति के आधार पर मिलने चाहिए। उनका कहना है कि जाति आधारित पहचान को लगातार बनाए रखने से सामाजिक विभाजन बढ़ता है। वहीं आरक्षण समर्थक समूहों का मानना है कि सामाजिक और ऐतिहासिक असमानताएं अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। इसलिए सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए आरक्षण व्यवस्था अभी भी आवश्यक है।

‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ सोशल मीडिया पर तेजी से उभरता एक नया अभियान बन गया है। लाखों फॉलोअर्स के साथ यह आरक्षण नीति पर राष्ट्रीय बहस को नई दिशा देने की कोशिश कर रहा है। हालांकि यह मुद्दा बेहद संवेदनशील और जटिल है, जिस पर समाज, सरकार और न्यायपालिका के स्तर पर लंबे समय से अलग-अलग विचार मौजूद हैं। आने वाले समय में इस अभियान का प्रभाव और इसकी मांगों पर होने वाली बहस पर सभी की नजर रहेगी।

यहां भी पढ़ें-

CM योगी ने किए मां पाटेश्वरी के दर्शन: स्वस्थ-समृद्ध प्रदेश के लिए की प्रार्थना, मंदिर की व्यवस्थाओं का किया निरीक्षण

काशी की तर्ज पर विकसित होगा बाराबंकी का प्राचीन शिवधाम: 48.79 करोड़ से बदलेगी लोधेश्वर धाम की तस्वीर