Sawan: सावन का महीना, सड़कों पर शिवभक्तों की कतार, कंधों पर गंगाजल और हर ओर ‘हर हर महादेव’ के जयकारे. लेकिन इस बार कुछ ऐसा हुआ, जिसने सबका ध्यान खींचा. भीड़ में एक शख्स ऐसा भी था, जो ना तो कांवड़ लेकर चला, ना तिलक लगाए था और ना ही भगवा पहना था.
Sawan: शिव भक्तों की हो रही जमकर सेवा
सिर पर सफेद टोपी, चेहरे पर लंबी दाढ़ी, लेकिन जब उसने बोला ‘जय भोलेनाथ’, तो वहां मौजूद हर शख्स ठहर गया. भोलेनाथ के ये मुस्लिम भक्त पेशे से एक डॉक्टर हैं. लेकिन बागपत के इस डॉक्टर का दिल भोलेनाथ की भक्ति में है.
भोलेनाथ का मुस्लिम भक्त-
भोलेनाथ के इस भक्त का नाम डॉ. बाबू खान उर्फ बाबू मलिक है. मुस्लिम्भनाम के ये भक्त बागपत के रहने वाले है और पेशे से एक डॉक्टर हैं. डॉ. बाबू खान पिछले 23 सालों से सावन में कांवड़ियों की सेवा में जुटे हैं. न धर्म देखा, न जात देखा, इन्होंने हर कांवड़ियों की सेवा की. डॉ. बाबू खान हर साल कांवड़ यात्रा में मेडिकल कैंप लगाते हैं. शिवभक्तों को दवाएं बांटते हैं, थके हुए यात्रियों को विश्राम की सुविधा देते हैं और जरूरत पड़ने पर खुद उठकर इलाज भी करते हैं.
मरीज की सेवा सबसे बड़ा धर्म- बाबू खान
उनकी सेवा देखकर कोई नहीं कह सकता कि वो किसी एक मजहब के प्रतिनिधि हैं. बाबू कहते है कि मैं डॉक्टर हूं और मेरे लिए मरीज़ का दर्द सबसे बड़ा धर्म है. जब कांवड़िए मेरे पास आते हैं तो मैं मजहब नहीं पूछता, बस ये सोचता हूं कि ये मेरे भाई हैं.
आपको बता दें राजनीति सिर्फ धर्म के नाम पर करने वालों के लिए भी एक सच्चा और अच्छा उदाहरण डॉ बाबू खान जैसे लोग हों सकते है जिनको इस बात का कोई गुमान नहीं है कि वो किसी अन्य धर्म के लोगों का इलाज कर रहे है उनका तो सीधा मानना है कि इंसानियत सबसे पहले होतीं है और हर हर महादेव का जयकारा उनका प्रथम प्रेम है.
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