ढाका में कानून की पढ़ाई कर रहे हिंदू छात्र सुभाष देउरी के कथित अपहरण, मारपीट और फिरौती मांगने का मामला सामने आया है। पुलिस जांच में जुटी है, जबकि पीड़ित का अस्पताल में इलाज चल रहा है।

नई दिल्ली/अमर भारती। बांग्लादेश की राजधानी ढाका से एक चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां कानून की पढ़ाई कर रहे एक हिंदू छात्र के कथित अपहरण, बंधक बनाने और फिरौती मांगने की घटना ने लोगों का ध्यान खींचा है। पीड़ित की पहचान 25 वर्षीय Subhash Deuri के रूप में हुई है, जो ढाका की Jagannath University में कानून के छात्र हैं। वह पढ़ाई के साथ-साथ एक मंदिर में पुजारी के रूप में भी सेवा करते हैं। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि उन्हें उनकी धार्मिक पहचान की वजह से निशाना बनाया गया या फिर यह फिरौती के उद्देश्य से की गई आपराधिक घटना थी।
देर रात घर से निकले, फिर लापता हो गए
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सुभाष देउरी सोमवार रात करीब 11:30 बजे अपने किराए के अपार्टमेंट से बाहर निकले थे। उनके साथ रहने वाले दोस्त दुर्जॉय साहा ने बताया कि इसके कुछ समय बाद उन्हें सुभाष के फोन से कॉल आया, जिसमें पैसों की मांग की गई। दुर्जॉय के अनुसार, कॉल करने वाले लोगों ने तुरंत धनराशि भेजने के लिए कहा, लेकिन उनके पास पर्याप्त पैसे नहीं थे, इसलिए वह रकम नहीं भेज सके।
परिवार से भी मांगी गई फिरौती
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अपहरणकर्ताओं ने सुभाष के परिवार से भी संपर्क किया। उनकी बहन जया ने बताया कि मंगलवार तड़के करीब एक बजे उन्हें सुभाष के मोबाइल फोन से कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने कथित तौर पर 30 हजार बांग्लादेशी टका की फिरौती मांगी और बैंक खाते की जानकारी भी दी। बाद में परिवार की ओर से लगभग 26 हजार टका ट्रांसफर किए जाने की बात सामने आई है।
सड़क किनारे बेहोशी की हालत में मिले
मंगलवार सुबह सुभाष देउरी ढाका के पुराने हिस्से (ओल्ड ढाका) में एक सड़क पर बेहोशी की हालत में पाए गए। स्थानीय लोगों और दोस्तों की मदद से उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। उन्हें Dhaka Medical College Hospital में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। अस्पताल पुलिस चौकी के प्रभारी मोहम्मद फारूक ने बताया कि सुभाष को सुबह करीब सात बजे गंभीर अवस्था में आपातकालीन विभाग में लाया गया था।
प्रताड़ना के गंभीर आरोप
पीड़ित के दोस्तों के अनुसार, होश में आने के बाद सुभाष ने बताया कि अपहरणकर्ताओं ने उनके साथ शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना की। आरोप है कि उन्हें बंधक बनाकर रखा गया, मारपीट की गई और परिवार से पैसे मांगने के लिए मजबूर किया गया। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी नहीं हो सकी है, लेकिन घटना ने स्थानीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।
पुलिस जांच का इंतजार
मंगलवार तक इस मामले में औपचारिक शिकायत दर्ज होने की जानकारी नहीं मिली थी। हालांकि घटना सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां और स्थानीय प्रशासन पूरे मामले की जानकारी जुटाने में लगे हुए हैं। पुलिस का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद विस्तृत जांच की जाएगी और आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी।
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
इस घटना के बाद बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बहस शुरू हो गई है। हालांकि अभी तक जांच एजेंसियों ने यह नहीं कहा है कि घटना धार्मिक पहचान से जुड़ी थी, लेकिन मामले ने समाज के विभिन्न वर्गों में चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के पीछे वास्तविक मकसद क्या था।
सुभाष देउरी से जुड़ा यह मामला फिलहाल कई सवाल खड़े कर रहा है। कथित अपहरण, फिरौती और प्रताड़ना के आरोपों के बीच पुलिस जांच और चिकित्सकीय रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। आने वाले दिनों में जांच के नतीजे यह तय करेंगे कि घटना के पीछे कौन लोग थे और उनका उद्देश्य क्या था।
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