
पंकज चतुर्वेदी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सुशासन और बेहतर जनसुनवाई के दावों के बीच अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रदेशभर में जिलाधिकारी से लेकर एडीएम, एसडीएम, तहसीलदार, बीडीओ और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के सीयूजी नंबर आम जनता के लिए लगभग बेकार साबित हो रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि अधिकारियों के सरकारी नंबरों पर घंटों घंटी बजती रहती है, लेकिन फोन उठाने वाला कोई नहीं होता। दैनिक स्तर पर प्रशासनिक अधिकारियों तक अपनी समस्या पहुंचाने की कोशिश कर रहे लोग निराश होकर वापस लौटने को मजबूर हैं।
सीएम कार्यालय से हो रैंडम जांच तो सामने आएगी हकीकत
पड़ताल में सामने आया कि करीब 90 प्रतिशत अधिकारी अपने सीयूजी नंबर पर कॉल रिसीव नहीं करते। लोगों का कहना है कि यदि मुख्यमंत्री कार्यालय से ही अधिकारियों के सरकारी नंबरों पर रैंडम कॉल कराई जाए तो वास्तविक स्थिति स्वतः सामने आ जाएगी। फरियादियों का आरोप है कि कई बार लगातार घंटी बजने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिलता और जनता की समस्याएं अनसुनी रह जाती हैं।
‘साहब मीटिंग में हैं’ बना सबसे बड़ा बहाना
यदि किसी अधिकारी का फोन उठ भी जाता है तो अक्सर उनके पीआरओ या गनर एक ही जवाब देते हैं—”साहब मीटिंग में हैं, बाद में कॉल कीजिए।” बाराबंकी के किसान हरिप्रसाद बताते हैं कि वह पिछले एक महीने से जमीन की पैमाइश के लिए एसडीएम से संपर्क करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने करीब 20 बार फोन किया, लेकिन सिर्फ दो बार गनर ने कॉल उठाकर यही कहा कि साहब मीटिंग में हैं। इसके बावजूद उनकी समस्या का समाधान आज तक नहीं हो सका।
विधवा, किसान और छात्र सभी परेशान
गोंडा की सावित्री देवी बताती हैं कि वह विधवा पेंशन के लिए कई बार ब्लॉक कार्यालय गईं, लेकिन अधिकारी नहीं मिले। सीयूजी नंबर पर फोन करने पर भी कोई जवाब नहीं मिलता। उनका कहना है कि बार-बार आने-जाने का खर्च उठाना उनके लिए संभव नहीं है। वहीं अयोध्या के छात्र विनोद कुमार का कहना है कि जाति प्रमाण पत्र में त्रुटि को ठीक कराने के लिए वह कई दिनों से तहसीलदार से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सुबह से शाम तक फोन मिलाने के बावजूद या तो नंबर व्यस्त मिलता है या कोई कॉल रिसीव नहीं करता।
शासनादेश के बावजूद नहीं हो रहा पालन
प्रदेश सरकार के स्पष्ट निर्देश हैं कि सभी अधिकारी कार्यालय समय में अपने सीयूजी नंबर पर उपलब्ध रहेंगे, ताकि आम नागरिक अपनी समस्या सीधे उनके संज्ञान में ला सकें। इसके बावजूद जिलों में डीएम, एडीएम, एसडीएम, तहसीलदार, बीडीओ और थानाध्यक्ष स्तर तक के अधिकारियों के सीयूजी नंबरों पर जनता को अपेक्षित जवाब नहीं मिल रहा। इससे शासन के निर्देशों के पालन पर भी सवाल उठ रहे हैं।
मुख्यमंत्री से कार्रवाई की मांग
प्रदेश के नागरिकों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि मुख्यमंत्री कार्यालय से अधिकारियों के सीयूजी नंबरों की रैंडम जांच कराई जाए। उनका कहना है कि जो अधिकारी सरकारी नंबर पर कॉल रिसीव नहीं करते या जनता को बार-बार गुमराह करते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि सरकारी सीयूजी नंबर केवल औपचारिकता बनकर न रह जाएं और आम लोगों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित हो सके।
सीयूजी नंबरों की स्थिति एक नजर में
90 प्रतिशत अधिकारियों के नंबर पर घंटी जाती है, लेकिन जवाब नहीं मिलता।
5 प्रतिशत नंबर अक्सर स्विच ऑफ या आउट ऑफ कवरेज रहते हैं।
5 प्रतिशत मामलों में ही पीआरओ या गनर कॉल रिसीव करते हैं।
“साहब मीटिंग में हैं” सबसे आम जवाब बताया जाता है।
जनता के सुझाए गए समाधान
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन या सीएम कार्यालय से सीयूजी नंबरों की रैंडम मॉनिटरिंग कराई जाए।
कॉल रिसीव न करने वाले अधिकारियों से स्पष्टीकरण लिया जाए।
प्रत्येक जिले में अधिकारियों की सीयूजी नंबर पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए नियमित जनसुनवाई व्यवस्था लागू की जाए।
निर्धारित समय में कॉल रिसीव न होने पर स्वतः शिकायत दर्ज होने की व्यवस्था विकसित की जाए।