पिता की डांट से नाराज छात्र ने रची अपहरण की झूठी कहानी: पुलिस ने 40 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगालकर किया खुलासा

प्रयागराज। यूपी के प्रयागराज के कौंधियारा थानाक्षेत्र में पिता की डांट से नाराज हाईस्कूल के एक छात्र ने अपने छोटे भाई के साथ मिलकर खुद के अपहरण की झूठी कहानी रच डाली और अकेले ही ट्रेन से मुंबई जाने के लिए निकल पड़ा। हालांकि कौंधियारा पुलिस की तत्परता, मजबूत सूचना तंत्र और कानपुर जीआरपी के सहयोग से छात्र को महज नौ घंटे के भीतर जालौन के उरई रेलवे स्टेशन से सकुशल बरामद कर लिया गया। शनिवार को आवश्यक कार्रवाई पूरी करने के बाद पुलिस ने छात्र को उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस की सक्रियता और कार्यकुशलता की क्षेत्र में सराहना हो रही है।

अपहरण की सूचना मिलते ही हरकत में आई पुलिस

कौंधियारा क्षेत्र निवासी अंकित प्रताप सिंह एक निजी विद्यालय में शिक्षक हैं। उनके चार पुत्र हैं, शुक्रवार सुबह करीब साढ़े छह बजे दोनों भाई कोचिंग के लिए घर से निकले थे। सुबह करीब आठ बजे आकाश अकेले घर लौटा और पिता को बताया कि स्कॉर्पियो सवार बदमाशों ने उसके बड़े भाई विकास का अपहरण कर लिया है। सूचना मिलते ही अंकित प्रताप सिंह ने कौंधियारा थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने तत्काल जांच शुरू कर दी।

सीसीटीवी फुटेज ने खोली कहानी की परतें

पुलिस ने बाजार और आसपास लगे करीब 40 से 45 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। जांच में विकास सुबह करीब 11 बजे ई-रिक्शा से जारी बाजार की ओर जाता दिखाई दिया। इसके बाद दोपहर करीब 12 बजे वह कौंधियारा बस अड्डे से प्रयागराज सिटी जाने वाली निजी बस में बैठता नजर आया। अलग-अलग स्थानों पर छात्र के अकेले सफर करते दिखाई देने पर पुलिस को अपहरण की कहानी संदिग्ध लगी।

इसी आधार पर पुलिस ने छोटे भाई आकाश से दोबारा पूछताछ की। सख्ती से पूछताछ करने पर उसने पूरी सच्चाई बता दी। आकाश ने स्वीकार किया कि विकास का अपहरण नहीं हुआ था, बल्कि वह खुद मुंबई जाने की योजना बनाकर घर से निकला था और इसी उद्देश्य से दोनों भाइयों ने अपहरण की झूठी कहानी गढ़ी थी।

प्रयागराज से लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस में बैठा था छात्र

सच्चाई सामने आने के बाद पुलिस ने प्रयागराज स्टेशन रोड और रेलवे स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज की जांच की। फुटेज में विकास प्रयागराज जंक्शन पर बैठा दिखाई दिया। इसके बाद मुंबई जाने वाली ट्रेनों की जानकारी जुटाई गई। जांच में पता चला कि छात्र दोपहर करीब 1:15 बजे लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस (01074) में सवार हुआ था, जो सुबेदारगंज से मुंबई की ओर जा रही थी।

कौंधियारा पुलिस ने तत्काल कानपुर जीआरपी को छात्र की फोटो और अन्य विवरण भेजे। इसके बाद कानपुर पुलिस ने विशेष टीम गठित कर ट्रेन की लगातार निगरानी शुरू की और उसकी लोकेशन ट्रैक करती रही। लगातार प्रयासों के बाद शाम करीब साढ़े छह बजे छात्र को जालौन जिले के उरई रेलवे स्टेशन से सकुशल बरामद कर लिया गया। शनिवार दोपहर उरई जीआरपी छात्र को कौंधियारा थाने लेकर पहुंची, जहां परिजनों को बुलाकर उसे सुरक्षित उनके हवाले कर दिया गया।

छात्र का इरादा गलत नहीं था: डीसीपी

डीसीपी विवेक चंद्र यादव ने बताया कि छात्र का उद्देश्य किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल होना नहीं था। वह केवल मुंबई जाने की इच्छा के कारण घर से निकला था और उसी के लिए अपहरण की झूठी कहानी बनाई गई थी। उन्होंने बताया कि छात्र को सुरक्षित बरामद कर उसके परिजनों को सौंप दिया गया है। पुलिस की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई के चलते मामला कुछ ही घंटों में सुलझ गया।