
नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली और उससे सटे एनसीआर क्षेत्र में आग की घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनती जा रही हैं। पिछले दो वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि आग की घटनाओं ने न केवल लोगों की जान ली है, बल्कि सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक तैयारियों पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। हाल ही में मालवीय नगर स्थित एक होटल एवं रेस्टोरेंट में लगी भीषण आग में 21 लोगों की मौत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे के बाद एक बार फिर फायर सेफ्टी व्यवस्था और भवन सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई है।
2025 में 18 हजार से अधिक फायर कॉल
दिल्ली फायर सर्विस के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में आग लगने की घटनाओं से संबंधित कुल 18,670 कॉल प्राप्त हुई थीं। यह संख्या बताती है कि राजधानी में लगभग हर दिन दर्जनों स्थानों पर आग लगने की घटनाएं सामने आती हैं। इन घटनाओं में करीब 70 लोगों की जान चली गई थी। आग के कारण औद्योगिक इकाइयों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, गोदामों और रिहायशी क्षेत्रों में भारी नुकसान भी दर्ज किया गया था।
विशेष रूप से जनवरी से मार्च 2025 के बीच आग की घटनाओं में 18 लोगों की मौत हुई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकांश मामलों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी, विद्युत शॉर्ट सर्किट, ज्वलनशील पदार्थों का गलत भंडारण और आपातकालीन निकासी व्यवस्था का अभाव प्रमुख कारण बनकर सामने आया।
2026 में भी जारी रहा हादसों का सिलसिला
वर्ष 2026 में भी आग की घटनाओं का सिलसिला थमता नहीं दिखा। 15 मार्च 2026 तक दिल्ली फायर सर्विस को 2,716 आग संबंधी कॉल प्राप्त हो चुकी थीं। इन घटनाओं में 13 लोगों की मौत हुई, जबकि 111 लोग घायल हुए। यह आंकड़ा दर्शाता है कि आग की घटनाएं अभी भी राजधानी के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले वर्षों की तुलना में फायर सर्विस की प्रतिक्रिया क्षमता में सुधार हुआ है, लेकिन तेजी से बढ़ते शहरीकरण और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में सुरक्षा नियमों के पालन की कमी अभी भी गंभीर समस्या बनी हुई है।
मालवीय नगर अग्निकांड ने हिलाई राजधानी
3 जून 2026 को दक्षिणी दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक होटल और रेस्टोरेंट में लगी भीषण आग हाल के वर्षों की सबसे बड़ी त्रासदियों में शामिल हो गई। इस हादसे में 21 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए। आग इतनी भयावह थी कि इमारत में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए दमकल विभाग, पुलिस और राहत टीमों को घंटों तक बचाव अभियान चलाना पड़ा।
घटना के बाद होटल प्रबंधन, फायर सेफ्टी इंतजामों और भवन स्वीकृति से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू की गई। प्रारंभिक जांच में सुरक्षा मानकों को लेकर कई सवाल उठे हैं। इसी कारण पुलिस ने होटल मालिक और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया तेज कर दी है।
सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
लगातार सामने आ रही आग की घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कई इमारतों में फायर सेफ्टी नियमों का पालन केवल कागजों तक सीमित है। विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकांश व्यावसायिक भवनों, होटल, रेस्टोरेंट, कोचिंग सेंटर और गोदामों में आपातकालीन निकास मार्ग, अग्निशमन उपकरण और सुरक्षा प्रशिक्षण की गंभीर कमी है।
मालवीय नगर हादसे के बाद दिल्ली प्रशासन ने ऐसे सभी प्रतिष्ठानों की विशेष जांच के निर्देश दिए हैं जो सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। इसके तहत होटल, रेस्टोरेंट, कोचिंग सेंटर, मॉल और अन्य व्यावसायिक परिसरों का निरीक्षण किया जाएगा।
भविष्य के लिए चेतावनी
दिल्ली-एनसीआर में पिछले दो वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि आग की घटनाएं केवल दुर्घटनाएं नहीं हैं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों का संकेत भी हैं। वर्ष 2025 में 70 मौतें, वर्ष 2026 के शुरुआती महीनों में 13 मौतें और मालवीय नगर अग्निकांड में 21 लोगों की जान जाने के बाद कुल मृतकों की संख्या 90 से अधिक पहुंच चुकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन नहीं किया गया और नियमित निरीक्षण व्यवस्था लागू नहीं हुई, तो भविष्य में भी ऐसे हादसे दोहराए जा सकते हैं। ऐसे में प्रशासन, भवन मालिकों और आम नागरिकों सभी की जिम्मेदारी है कि फायर सेफ्टी को प्राथमिकता दें, ताकि जान-माल की हानि को रोका जा सके।