
रिपोर्ट: प्रवेश सिंह, वाराणसी
वाराणसी। प्रधानमंत्री Narendra Modi के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में पुलिस चौकी के ठीक बाहर एक युवक के साथ हुई कथित मारपीट की घटना ने कानून-व्यवस्था और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। दशाश्वमेध थाना क्षेत्र में हुई इस घटना के बाद स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि यदि पुलिस चौकी के सामने भी लोग सुरक्षित नहीं हैं, तो शहर के अन्य इलाकों में सुरक्षा की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
घायल युवक किशन साहनी का आरोप है कि मामूली विवाद के बाद भाजपा के एक मनोनीत पार्षद के करीबियों ने उसे घेर लिया और पुलिस चौकी के बाहर ही दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। इस हमले में उसके सिर में गंभीर चोट आई और वह घायल हो गया। पीड़ित का कहना है कि विवाद एक ग्राहक को लेकर शुरू हुआ था, जिसका उसने विरोध किया था। इसके बाद कथित रूप से उसके साथ मारपीट की गई।
सबसे गंभीर बात यह बताई जा रही है कि घटना पुलिस चौकी के बेहद करीब हुई। ऐसे में स्थानीय नागरिक सवाल उठा रहे हैं कि जब पुलिस की मौजूदगी वाले क्षेत्र में भी इस तरह की घटनाएं हो सकती हैं, तो आम जनता खुद को सुरक्षित कैसे महसूस करेगी। लोगों का कहना है कि पुलिस चौकी और थाने केवल भवन बनकर न रह जाएं, बल्कि उनकी मौजूदगी का असर भी कानून व्यवस्था पर दिखाई देना चाहिए।
अक्सर अपराध और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात की जाती है लेकिन इस तरह की घटनएं आज आम हो चली हैं। वहीं वाराणसी को विकास और सुशासन का मॉडल शहर बताया जाता है। ऐसे में इस घटना ने प्रशासनिक सतर्कता, पुलिस की सक्रियता और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों की जांच और पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है। पुलिस जांच के बाद ही घटना की पूरी सच्चाई स्पष्ट हो सकेगी।