नवयुग कन्या महाविद्यालय में स्व-जनगणना जागरूकता कार्यक्रम: छात्राओं की स्किट बनी आकर्षण का केंद्र

लखनऊ। स्व-जनगणना के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से नवयुग कन्या महाविद्यालय में बी.एड विभाग एवं राष्ट्रीय सेवा योजना के संयुक्त प्रयास से एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महाविद्यालय के समस्त शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक स्टाफ को जनगणना की प्रक्रिया, उसके महत्व और डिजिटल माध्यम से उसकी सटीकता के बारे में जागरूक करना था। यह आयोजन महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर मंजुला उपाध्याय के कुशल नेतृत्व में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम के संचालन में स्व-जनगणना नोडल अधिकारी डॉ. मनीषा बड़ौनियाँ का विशेष योगदान रहा, जिनके प्रभावी निर्देशन तथा बी.एड विभाग की शिक्षिकाओं और राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारियों के मार्गदर्शन में पूरे आयोजन को व्यवस्थित रूप दिया गया।

जागरूकता अभियान के तहत बी.एड विभाग की छात्राओं ने एक प्रभावशाली स्किट (लघु नाटिका) प्रस्तुत की, जिसने कार्यक्रम को जीवंत बना दिया। इस नाटिका के माध्यम से छात्राओं ने स्व-जनगणना की पूरी प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से समझाया। पोर्टल पर पंजीकरण से लेकर डाटा फीडिंग तक की तकनीकी बारीकियों को बेहद सरल और रोचक अंदाज में प्रस्तुत किया गया। नाटिका के पात्रों ने सामान्य संवादों के जरिए यह दर्शाया कि किस प्रकार कोई भी व्यक्ति तकनीक का उपयोग करते हुए स्वयं अपनी गणना सटीकता के साथ कर सकता है। साथ ही, स्किट में स्टाफ के मन में उठने वाले संभावित प्रश्नों और शंकाओं को भी प्रभावी ढंग से शामिल कर उनका समाधान प्रस्तुत किया गया।

प्राचार्या ने की सराहना, समयबद्ध गणना पूर्ण करने का आह्वान

कार्यक्रम के अंत में प्राचार्या प्रोफेसर मंजुला उपाध्याय ने छात्राओं के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के डिजिटल नवाचार राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने इसे समय की आवश्यकता बताते हुए सभी को इसमें सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया। वहीं, नोडल अधिकारी डॉ. मनीषा बड़ौनियाँ ने सभी स्टाफ सदस्यों से अपील की कि वे निर्धारित समयसीमा के भीतर अपनी स्व-जनगणना प्रक्रिया पूर्ण करें, जिससे डेटा की सटीकता सुनिश्चित हो सके।

जागरूकता के साथ विकसित हुई छात्राओं में नेतृत्व क्षमता

यह कार्यक्रम न केवल महाविद्यालय के स्टाफ को स्व-जनगणना के प्रति जागरूक करने में सफल रहा, बल्कि इसमें भाग लेने वाली छात्राओं के भीतर नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना का भी विकास हुआ। इस प्रकार का आयोजन शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों को भी सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।