यूपी रेरा ने 10वें वर्ष में रखा कदम, 1 मई को ‘रेरा दिवस’; निवेश और प्रोजेक्ट में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (यूपी रेरा) ने अपने 10वें वर्ष में प्रवेश कर लिया है। इस अवसर पर रेरा अध्यक्ष संजय आर भूसरेड्डी ने प्रेस वार्ता में बताया कि अब हर साल 1 मई को ‘रेरा दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना रेरा का मुख्य उद्देश्य है।
प्रेस वार्ता में बताया गया कि प्रदेश में रियल एस्टेट सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहा है। वर्ष 2023 में जहां 197 प्रोजेक्ट पंजीकृत थे, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 308 हो गई, जो 19 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। वर्ष 2026 के पहले चार महीनों में ही 106 नए प्रोजेक्ट पंजीकृत हो चुके हैं।
अध्यक्ष ने बताया कि लखनऊ रियल एस्टेट विकास का नया केंद्र बनकर उभरा है, जहां 2025 में 67 प्रोजेक्ट पंजीकृत हुए, जबकि गौतमबुद्ध नगर में 69 परियोजनाएं दर्ज की गईं। एनसीआर से बाहर भी रियल एस्टेट का विस्तार तेजी से हो रहा है। वर्ष 2025 में 84,976 आवासीय इकाइयों का प्रस्ताव आया और पिछले तीन वर्षों में 2 लाख से अधिक यूनिट्स उपलब्ध कराई गई हैं। वहीं 2026 के शुरुआती महीनों में 33,206 नई यूनिट्स प्रस्तावित की गई हैं, जिससे घर खरीदारों के विकल्प बढ़े हैं।
निवेश के मोर्चे पर भी रेरा ने रिकॉर्ड उपलब्धि दर्ज की है। वर्ष 2025 में ₹68,328 करोड़ का निवेश हुआ, जो 53.5 प्रतिशत की वृद्धि है। 2026 में भी निवेश की रफ्तार तेज बनी हुई है।
उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए रेरा ने प्रभावी कदम उठाए हैं। 8,029 आवंटियों को ₹2,126 करोड़ की राहत दी गई है। साथ ही रिकवरी सर्टिफिकेट के जरिए ₹1,581 करोड़ की वसूली और समझौते के माध्यम से ₹545 करोड़ की अतिरिक्त वसूली की गई है। कुल 11,377 मामलों में ₹5,943 करोड़ का निपटारा किया गया, जबकि रेरा पीठों में 3,095 और सुलह मंच के माध्यम से 1,617 मामलों का समाधान हुआ।
‘रेरा संवाद’ को एक प्रभावी शिकायत निवारण मंच बताते हुए अध्यक्ष ने कहा कि इसके 198 सत्रों में 5,287 मामलों का समाधान किया गया है। कोविड काल में शुरू की गई डिजिटल पहल भी सफल रही है।
अंत में संजय आर भूसरेड्डी ने कहा कि आगे भी पारदर्शिता, जवाबदेही और निवेश को और मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास जारी रहेंगे।