लोकायुक्त जांच से पहले दूसरी बार बदले गए अड़ींग सचिव, पंचायत में 39 करोड़ की ग्रांट पर फिर उठे सवाल


मथुरा। Lokayukta Uttar Pradesh के निर्देश पर अड़ींग पंचायत में 39 करोड़ रुपये की परफॉर्मेंस ग्रांट में कथित गड़बड़ियों की दोबारा जांच शुरू होने से पहले पंचायत सचिव के दूसरे तबादले को लेकर विवाद गहरा गया है। शिकायतकर्ता और पंचायत सदस्यों ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे जांच प्रभावित करने की कोशिश बताया है।
मंडलायुक्त Nagendra Pratap के आदेश पर गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने शिकायतकर्ता अजीत सैनी को नोटिस भेजकर साक्ष्य मांगे हैं। समिति को 21 मई तक अपनी रिपोर्ट लोकायुक्त को सौंपनी है। जांच टीम जल्द ही भौतिक सत्यापन के लिए अड़ींग पंचायत पहुंच सकती है।
शिकायतकर्ता अजीत सैनी का आरोप है कि पंचायत में घोटालों से जुड़े मामलों में पहले भी जांच के दौरान साक्ष्यों को प्रभावित करने की कोशिश की जाती रही है। उनका कहना है कि पंचायत में जिन कार्यों को लेकर शिकायत होती है, बाद में उन्हें जल्दबाजी में पूरा कराकर गड़बड़ियों पर पर्दा डालने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने कहा कि वह समिति को दस्तावेज केवल अवलोकन के लिए उपलब्ध कराएंगे।
अजीत सैनी ने लोकायुक्त, मुख्य सचिव और मंडलायुक्त को ईमेल भेजकर जिला प्रशासन और डीपीआरओ के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि 21 जून 2025 को लोकायुक्त जांच से पहले तत्कालीन सचिव रामवीर का तबादला कर दिया गया था और अब 12 मई 2026 को वर्तमान सचिव यतिन शर्मा का भी ट्रांसफर कर दिया गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अड़ींग पंचायत में नए सचिव के रूप में भेजे गए मनीष भंडारी के खिलाफ किशनपुर ग्राम पंचायत में कार्यकाल के दौरान विजिलेंस जांच चल रही है। ऐसे में विवादित सचिव की तैनाती पर भी सवाल उठ रहे हैं।
इधर 17 फरवरी से इस्तीफा दे चुके पंचायत सदस्यों ने भी प्रशासन से जांच पूरी होने तक पंचायत खाते से धन निकासी पर रोक लगाने की मांग की है। सदस्यों ने पंचायत में अब तक प्रशासक नियुक्त न किए जाने और संचालन समिति का गठन न होने पर हाईकोर्ट जाने की तैयारी भी शुरू कर दी है।
अड़ींग पंचायत में कथित घोटालों की सूची भी लंबी बताई जा रही है। आरोप है कि 65 लाख रुपये खर्च होने के बाद भी श्मशान घाट का कार्य अधूरा है। ग्रामीणों द्वारा चंदे से बनाए गए शेड पर भी पंचायत द्वारा करीब 4.5 लाख रुपये खर्च दिखाए गए। वहीं सेहरा पायसा स्थित श्मशान में प्रधान के कार्यभार संभालने से पहले ही 46 लाख रुपये के कार्य दर्शाने का आरोप लगाया गया है।
ग्रामीणों का दावा है कि पेयजल व्यवस्था पर करीब 60 लाख रुपये खर्च होने के बावजूद लोगों को आज भी दूषित पानी पीना पड़ रहा है। जल जीवन मिशन का कार्य भी गांव में शुरू नहीं हो सका। इसके अलावा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, बारातघर, कैफेटेरिया और मार्केट कॉम्प्लेक्स जैसे करोड़ों रुपये के एसेट बेकार पड़े होने के आरोप भी लगाए गए हैं।