अपोलो हॉस्पिटल में बिना ब्लड ट्रांसफ्यूजन के हुआ सफल लीवर ट्रांसप्लांट: मरीज को मिली नई जिंदगी, पत्नी बनीं डोनर

लखनऊ। लखनऊ के अपोलोमेडिक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल ने चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी और दुर्लभ उपलब्धि हासिल की है। यहां डॉक्टरों की टीम ने एक बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया, वह भी बिना एक भी यूनिट ब्लड चढ़ाए। 56 वर्षीय मरीज, जो उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले का निवासी है, गंभीर अवस्था में अस्पताल लाया गया था। उसकी स्थिति इतनी नाजुक थी कि तुरंत लिवर ट्रांसप्लांट की आवश्यकता थी। मरीज की जान बचाने के लिए उसकी 45 वर्षीय पत्नी ने आगे आकर अपना लिवर डोनेट किया, जिससे यह जीवनरक्षक सर्जरी संभव हो सकी।

अस्पताल पहुंचने पर मरीज का MELD स्कोर 30 पाया गया, जो यह दर्शाता है कि उसका लिवर लगभग पूरी तरह से विफल हो चुका था और स्थिति जीवन के लिए अत्यंत जोखिमपूर्ण थी। डॉक्टरों के अनुसार ऐसे मामलों में समय पर ट्रांसप्लांट न हो तो मरीज की जान बचाना मुश्किल हो जाता है। इसी गंभीरता को देखते हुए तुरंत सर्जरी की योजना बनाई गई और विशेषज्ञ टीम को सक्रिय किया गया। मरीज की हालत को देखते हुए यह केस मेडिकल दृष्टि से बेहद चुनौतीपूर्ण माना गया।

अत्याधुनिक तकनीक और रणनीति से बिना ब्लड ट्रांसफ्यूजन हुआ ऑपरेशन

इस जटिल सर्जरी को अपोलोमेडिक्स हॉस्पिटल के वरिष्ठ डॉक्टरों डॉ. अभिषेक यादव (सीनियर डायरेक्टर एवं हेड, लिवर ट्रांसप्लांट) और डॉ. उत्कर्ष श्रीवास्तव (कंसलटेंट, लिवर ट्रांसप्लांट) की टीम ने सफलतापूर्वक पूरा किया। डॉक्टरों ने बताया कि आमतौर पर लिवर ट्रांसप्लांट के दौरान 2 से 3 लीटर तक खून बहने की संभावना रहती है और 8 से 10 यूनिट ब्लड की जरूरत पड़ती है, लेकिन इस केस में विशेष रणनीति अपनाकर ब्लड लॉस को न्यूनतम रखा गया।

वहीं टीम ने ऑपरेशन से पहले ही विस्तृत योजना तैयार की और सर्जरी के दौरान अत्यधिक सावधानी बरतते हुए रक्तस्राव को नियंत्रित किया। नतीजा यह रहा कि पूरा ट्रांसप्लांट बिना किसी ब्लड ट्रांसफ्यूजन के सफलतापूर्वक पूरा हो गया, जो मेडिकल क्षेत्र में एक दुर्लभ उपलब्धि मानी जाती है।

8वें दिन मिली छुट्टी, तेजी से हुआ रिकवरी

आमतौर पर लिवर ट्रांसप्लांट के बाद मरीज को 20 से 25 दिन तक अस्पताल में रहना पड़ता है, लेकिन इस मामले में मरीज की रिकवरी उम्मीद से कहीं बेहतर रही। ऑपरेशन के मात्र 8वें दिन ही मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। डॉक्टरों के अनुसार यह तेज रिकवरी सर्जरी की सफलता और पोस्ट-ऑपरेटिव केयर की गुणवत्ता को दर्शाती है।

पिछले 7 महीनों में 20 सफल लिवर ट्रांसप्लांट

अपोलोमेडिक्स हॉस्पिटल की लिवर ट्रांसप्लांट टीम ने पिछले 7 महीनों में 20 सफल लिवर ट्रांसप्लांट किए हैं, जिनमें कई अत्यंत जटिल केस भी शामिल रहे हैं। सभी मरीज फिलहाल स्वस्थ हैं और नियमित फॉलो-अप में हैं। यह उपलब्धि अस्पताल की बढ़ती विशेषज्ञता और उन्नत सर्जिकल क्षमता को दर्शाती है।

अस्पताल प्रबंधन ने बताया बड़ी उपलब्धि

अपोलोमेडिक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के एमडी और सीईओ डॉ. मयंक सोमानी ने इस सफलता पर कहा कि लिवर ट्रांसप्लांट जैसी जटिल सर्जरी में आमतौर पर बड़ी मात्रा में रक्त की आवश्यकता होती है, लेकिन बिना ब्लड ट्रांसफ्यूजन के इसे सफलतापूर्वक पूरा करना पूरी मेडिकल टीम की असाधारण कुशलता का परिणाम है। उन्होंने कहा कि यह सफलता साबित करती है कि अस्पताल में विश्वस्तरीय विशेषज्ञ, आधुनिक तकनीक और उन्नत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की उपलब्धियां मरीजों को लखनऊ में ही सुरक्षित और उन्नत इलाज उपलब्ध कराने के अस्पताल के संकल्प को और मजबूत करती हैं।