
एत्मादपुर कस्बे के बाला जी मैरिज होम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय स्कंध में मंगलवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कथा व्यास आचार्य विनोद दीक्षित ने सृष्टि की रचना, भगवान के विराट स्वरूप और भगवत प्राप्ति के साधनों का विस्तार से वर्णन कर श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।
कथा के दौरान आचार्य विनोद दीक्षित महाराज ने बताया कि जब राजा परीक्षित ने मोक्ष प्राप्ति का मार्ग पूछा, तब श्री शुकदेव जी ने उन्हें सृष्टि के विकास, ईश्वर के विराट स्वरूप और अनन्य भक्ति का रहस्य समझाया। उन्होंने कहा कि भगवान की कृपा प्राप्त करने के लिए मनुष्य को भक्ति, ध्यान और सद्कर्म का मार्ग अपनाना चाहिए।
महाराज जी ने सृष्टि उत्पत्ति का वर्णन करते हुए बताया कि जब ब्रह्मा जी सृष्टि की रचना करने लगे, तब उन्हें इसकी पूर्ण जानकारी नहीं थी। कठोर तपस्या के बाद भगवान ने उन्हें दर्शन देकर भागवत ज्ञान प्रदान किया। कथा स्थल को फूलों से भव्य रूप से सजाया गया था, जहां व्यासपीठ से ज्ञान की गंगा प्रवाहित हो रही थी।
कथा में भगवान के विराट स्वरूप का भी भावपूर्ण वर्णन किया गया। आचार्य श्री ने बताया कि संपूर्ण ब्रह्मांड भगवान का ही स्वरूप है, जिसमें पाताल उनके चरण और आकाश उनकी नाभि के समान माना गया है। उन्होंने कहा कि सांसारिक मोह-माया से मुक्ति केवल ईश्वर भक्ति से ही संभव है।
कथा के दौरान व्यास जी ने अपने मधुर कंठ से कई भक्तिमय भजन प्रस्तुत किए। भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे और पूरा पंडाल जयकारों से गूंज उठा। महिलाओं और बच्चों सहित बड़ी संख्या में मौजूद भक्तों ने दोनों हाथ उठाकर भगवान के जयकारे लगाए और भक्ति में लीन नजर आए।
श्रद्धालुओं ने कथा के बीच-बीच में व्यास जी को मालाएं पहनाकर उनका भव्य स्वागत किया तथा आशीर्वाद प्राप्त किया। आरती और प्रसाद वितरण के साथ आज के सत्र का समापन हुआ।