
नई दिल्ली/अमर भारती। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के खिलाफ सिलीगुड़ी के साइबर क्राइम थाने में एक शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत में उन पर ऐसे बयान देने का आरोप लगाया गया है, जिनसे देश की छवि और भारत-बांग्लादेश संबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। शिकायतकर्ता अधिवक्ता Rinky Singh Chatterjee ने दावा किया है कि वह इस मामले में आगे कानूनी कार्रवाई करते हुए 8 जून को Calcutta High Court में याचिका भी दायर करेंगी।
कैसे ममता अपने गुमाहों का जाल में फंसी?
शिकायत के अनुसार, 2 जून को कोलकाता के Rani Rashmoni Road पर आयोजित एक विरोध कार्यक्रम के दौरान ममता बनर्जी ने बांग्लादेशी नागरिक उस्मान हादी की हत्या के मामले में केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah और केंद्रीय गृह मंत्रालय को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायतकर्ता का कहना है कि मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक मंच से यह संकेत दिया कि बांग्लादेश में हुई हत्या के पीछे भारत सरकार के गृह मंत्रालय की भूमिका हो सकती है।
वैश्विक छवि प्रभावित करने का आरोप
रिंकी सिंह चटर्जी का आरोप है कि इस तरह के बयान बिना ठोस साक्ष्यों के दिए गए और इससे न केवल राजनीतिक विवाद बढ़ा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गलत संदेश गया। उनका कहना है कि भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध संवेदनशील हैं और ऐसे आरोप दोनों देशों के बीच अनावश्यक तनाव पैदा कर सकते हैं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि इस प्रकार की टिप्पणियों से भारत की वैश्विक छवि प्रभावित हो सकती है।
शुभेंदु सरकार का एक्शन, टीएमसी में विभाजन
शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया है कि ऐसे बयानों का असर बांग्लादेश में रहने वाले हिंदू समुदाय की सुरक्षा पर पड़ सकता है। उनका तर्क है कि यदि किसी राजनीतिक नेता द्वारा सार्वजनिक रूप से गंभीर आरोप लगाए जाते हैं, तो उसका असर सीमाओं के पार भी देखने को मिल सकता है।
भारतीय संविधान के खिलाफ बयानबाजी का आरोप
रिंकी सिंह चटर्जी ने अपनी शिकायत में यह भी उल्लेख किया है कि संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति से जिम्मेदार और तथ्यों पर आधारित सार्वजनिक वक्तव्यों की अपेक्षा की जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी अपने बयानों के माध्यम से समाज में विभाजनकारी माहौल बनाने वाले तत्वों को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा दे रही हैं।
पुलिस जांच में खुलेंगे कई बड़े राज
हालांकि, इस मामले में अभी तक जांच एजेंसियों की ओर से कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है और न ही अदालत ने किसी आरोप को प्रमाणित माना है। फिलहाल यह मामला शिकायत और आरोपों के स्तर पर है। आने वाले दिनों में पुलिस जांच और संभावित न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
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