आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट भर्ती में देरी पर अभ्यर्थियों का प्रदर्शन: मंत्री आवास का घेराव कर परीक्षा तिथि घोषित करने की मांग

लखनऊ। लखनऊ में आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट भर्ती के अभ्यर्थियों ने गुरुवार को आयुष राज्यमंत्री दयाशंकर मिश्र के आवास के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। अभ्यर्थियों ने हजरतगंज स्थित डालीबाग में मंत्री आवास का घेराव करते हुए नारेबाजी की और भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने “योगी बाबा न्याय दो” और “परीक्षा तिथि घोषित हो” जैसे नारे लगाए। उनका कहना था कि लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया लंबित होने के कारण हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।

इस दौरान करीब 50 अभ्यर्थी मंत्री आवास के बाहर एकत्र हुए थे। प्रदर्शन की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर इको गार्डन भेज दिया। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि कोर्ट से उनके पक्ष में फैसला आने के बावजूद सरकार की ओर से परीक्षा आयोजित करने और भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाने में अनावश्यक देरी की जा रही है, जिससे उम्मीदवारों को मानसिक और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

क्या है अभ्यर्थियों की मांगे

प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि वर्ष 2024 में आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट के पदों पर भर्ती निकाली गई थी। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद मामला न्यायालय में चला गया, जिसके चलते भर्ती प्रक्रिया रुक गई। अभ्यर्थियों के अनुसार उन्होंने करीब दो वर्षों तक कानूनी लड़ाई लड़ी और आखिरकार फैसला उनके पक्ष में आया। अब उनकी मांग है कि सरकार जल्द से जल्द परीक्षा की तिथि और विस्तृत पाठ्यक्रम (सिलेबस) जारी करे ताकि भर्ती प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी हो सके।

प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि अधिकांश उम्मीदवार साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं। परिवार की जिम्मेदारियां उनके कंधों पर हैं और माता-पिता को उनसे काफी उम्मीदें हैं। उन्होंने कहा कि नौकरी मिलने में लगातार हो रही देरी से अभ्यर्थियों की स्थिति कठिन होती जा रही है। इसी वजह से वे मंत्री आवास पर अपनी मांगों को लेकर पहुंचे हैं और सरकार से भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने तथा परीक्षा तिथि घोषित करने की अपील कर रहे हैं।

प्रदेश में आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट के 60 प्रतिशत पद खाली

प्रदर्शन में शामिल अभ्यर्थियों ने बताया कि प्रदेश में आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट के लगभग 60 प्रतिशत पद रिक्त हैं। सरकार ने 1002 पदों पर भर्ती निकाली थी, जबकि आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट के कुल स्वीकृत पदों की संख्या करीब 2100 है। इसके बावजूद लगभग 1200 पद अब भी खाली पड़े हुए हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में रिक्त पद होने के बावजूद भर्ती प्रक्रिया पूरी न होना चिंता का विषय है।

अभ्यर्थियों ने कहा कि उन्होंने वर्ष 2024 की भर्ती में आवेदन किया था, लेकिन मामला न्यायालय में जाने के कारण प्रक्रिया अटक गई। उनका आरोप है कि अब न्यायालय से राहत मिलने के बाद भी भर्ती को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है। उम्मीदवारों का कहना है कि आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट के पद लंबे समय तक खाली रहने से आयुष और स्वास्थ्य सेवाओं पर सीधा असर पड़ रहा है। विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में दवाओं के वितरण, औषधि प्रबंधन और फार्मेसी संचालन की व्यवस्था प्रभावित हो रही है, जिससे आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।